निशांत के लिए कैसे राजी हो गए नीतीश कुमार?परिवारवाद विरोधी वाली छवि को कर दिया धूमिल!
बिहार मंत्रिमंडल विस्तार में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी सत्ता और संगठन पर मजबूत पकड़ बनाए हुए नीतीश कुमार अब, अपने बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री को लेकर, विपक्ष के निशाने पर हैं. 8 मार्च को राजनीति में औपचारिक शुरुआत करने वाले निशांत कुमार केवल दो महीने के भीतर बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बन गए हैं. इसे लेकर विपक्ष परिवारवाद का आरोप लगा रहा है, जबकि जदयू इसे कार्यकर्ताओं और जनता की मांग बता रही है.8 मार्च को जदयू कार्यालय में भव्य कार्यक्रम के साथ निशांत कुमार ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी. इसके बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने और नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि उस समय निशांत ने मंत्री पद लेने से साफ इनकार कर दिया था. लेकिन अब मंत्रिमंडल विस्तार में उन्होंने मंत्री पद की शपथ लेकर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।नीतीश कुमार ने कभी कहा था- ‘कर्पूरी जी ने कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया. कुछ लोग सिर्फ परिवार को प्रमोट करते हैं. कर्पूरी जी की प्रेरणा से मैंने भी परिवार को नहीं बढ़ाया.’ ऐसे में जो नीतीश हमेशा RJD और लालू प्रसाद यादव के खिलाफ परिवारवाद के मुद्दे को उठाते रहे थे. सवाल उठता है कि निशांत कुमार के राजनीति और सम्राट कैबिनेट में शामिल होने से नीतीश कुमार के इस बयान का क्या होगा? आखिर निशांत को मंत्री बनाने की क्यों जरूरत पड़ी है.जदयू नेताओं का कहना है कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री किसी पारिवारिक योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि जनता और कार्यकर्ताओं की मांग का परिणाम है. जदयू के वरिष्ठ नेता निहोरा यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव को लालू प्रसाद यादव ने सार्वजनिक रूप से अपनी विरासत घोषित कर लॉन्च किया था, जबकि निशांत कुमार को नीतीश कुमार ने नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की मांग पर राजनीति में लाया गया है.

जदयू विधायक शालिनी मिश्रा ने कहा कि निशांत कुमार ने सही फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि यदि वे चाहते तो उपमुख्यमंत्री भी बन सकते थे, लेकिन उन्होंने बेहद साधारण तरीके से मंत्री पद स्वीकार किया. उन्होंने यह भी कहा कि बाल्मीकिनगर से बिहार यात्रा की शुरुआत ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा किया है और उम्मीद है कि वे अपने पिता की तरह बिहार के विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगे.निशांत कुमार के मंत्री बनने के बाद विपक्ष को बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल गया है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि अब उन पर परिवारवाद का आरोप लगाने वालों को खुद जवाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि अब मुझ पर परिवारवाद का आरोप लगाने का नैतिक अधिकार किसी के पास नहीं बचा.नीतीश कुमार 20 सालों से अधिक समय से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहे और अपने परिवार के सदस्यों को सरकार और पार्टी में कोई भी बड़ी जिम्मेदारी देने से बचते रहे. नीतीश ने परिवार को राजनीति से दूर रखा, यही नहीं पार्टी नेताओं के परिवार को भी राजनीति में बहुत तवज्जो नहीं दी. लेकिन अब जिस प्रकार से निशांत की एंट्री हुई और अभी मंत्री बने हैं, उसके कारण नीतीश भले ही खुलकर निशांत को लेकर कोई बयान अब तक नहीं दिया हो, लेकिन परिवारवाद के आरोप से कैसे बच पाएंगे?अब निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री और सीधे मंत्री पद मिलने के बाद यह छवि बदलती दिख रही है. भले ही नीतीश कुमार ने अब तक इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं कहा हो, लेकिन विपक्ष इसे उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा विरोधाभास बता रहा है.मंत्री पद की शपथ लेने के बाद निशांत कुमार ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उसे वे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे. शपथ ग्रहण के बाद वे जदयू कार्यालय भी पहुंचे, जहां पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया.पार्टी कार्यकर्ताओं में निशांत के मंत्री बनने को लेकर काफी उत्साह है. कई नेता उन्हें भविष्य में नीतीश कुमार के राजनीतिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं. हालांकि कुछ कार्यकर्ताओं में यह मायूसी भी है कि वे उपमुख्यमंत्री नहीं बन सके और फिलहाल केवल मंत्री पद तक ही सीमित रहे।
