इस वजह से विपक्ष का ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खारिज हुई याचिका,समझिए पूरी कहानी

 इस वजह से विपक्ष का ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खारिज हुई याचिका,समझिए पूरी कहानी
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 11 नेताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाए जाने और विभिन्न गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की. हालांकि इंडिया ब्लॉक के चुनाव आयोग के खिलाफ दायर इस याचिका पर आज सुनवाई नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट की ओर से 13 अक्टूबर के लिए जारी सप्लीमेंट्री लिस्ट में राहुल गांधी की याचिका लिस्ट नहीं हुई है, क्योंकि अदालत की रजिस्ट्री ने इसमें 14 कमियां पाई हैं. इन कमियों को दूर करने के बाद ही ये मामला सुनवाई के लिए लिस्ट हो सकेगा.रजिस्ट्री के अनुसार,याचिका में कई तकनीकी और दस्तावेजी खामियां हैं. इनमें लोगों को नाम से प्रतिवादी बनाना, पुराने फैसले की कॉपी न लगाना और 9 याचिकाकर्ताओं का वकालतनामा न होना शामिल है. इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आईडी कार्ड की धुंधली कॉपी दी गई है और कोर्ट को 220 रुपये कोर्ट फीस कम मिली है.

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रजिस्ट्री ने साफ कहा है कि धुंधले दस्तावेज और बाकी कमियों को ठीक करने के बाद ही केस को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।अब आपको हम बता देते है कि याचिका में क्या-क्या खामियां थीं?दरअसल में लोगों को नाम से प्रतिवादी बनाया गया.9 याचिकाकर्ताओं का वकालतनामा नहीं था.सह-याचिकाकर्ता कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की कॉपी धुंधली थी.याचिका में कुछ ऐसे पन्नें हैं जो पढ़े जाने योग्य नहीं हैं.याचिका के कुछ पन्ने बीच में से गायब थे.कोर्ट फीस 220 रुपये कम जमा कराई गई.पेजों (जैसे पेज 57 और 64) की जरूरी रंगीन प्रतियां जमा नहीं की गईं.दस्तावेजों में अक्षरों का फॉन्ट बहुत छोटा था.कई पन्नों के नंबर डालने में गलती थी.क्षेत्रीय भाषा में शामिल पन्नों का आधिकारिक अनुवाद साथ में नहीं लगाया गया.याचिका के समर्थन में कुछ पुराने फैसलों की कॉपी नहीं लगाई गई.याचिका के प्रारूप और दस्तावेजों में अन्य जरूरी कानूनी औपचारिकताएं अधूरी पाई गईं।आइए अब हम आपको बताते है कि याचिका में क्या-क्या मांगें की गई हैं?SIR के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए.समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे और तकनीकी विशेषज्ञ व गणमान्य नागरिक उनकी मदद करें.ये सुनिश्चित किया जाए कि कानून के मुताबिक, बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएयह भी पक्का किया जाए कि पंजाब और दूसरे राज्यों में, जहां चुनाव होने हैं, वहां योग्य लोगों को कानून द्वारा तय आखिरी तारीख तक मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने की इजाजत दी जाए।योग्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए, इस याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार और निर्णय होने तक, देश भर में मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने का अंतरिम आदेश जारी करें।राहुल गांधी के अलावा विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक के 11 बड़े नेताओं की ओर से संयुक्त रूप से ये याचिका दाखिल की गई है. याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं. इनकी पैरवी की जिम्मेदारी अधिवक्ता प्रसन्ना एस. की थी.याचिका में कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है. इनमें पहला प्रतिवादी भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई), जबकि अन्य तीन प्रतिवादी चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं.खामियों यानी डिफेक्ट को ठीक करने के लिए ⁠याचिकाकर्ताओं की ओर से वकीलों ने रजिस्ट्री से वक्त मांगा है और बुधवार को लिस्ट करने का आग्रह किया है. इस बीच डिफेक्ट दुरुस्त किए जाएंगे.राहुल गांधी की कानूनी टीम ने भारतीय चुनाव आयोग की अनियमितताओं को लेकर ये अहम याचिका दाखिल की है. इसको सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दर्ज किया गया है. ये याचिका 12 अक्टूबर को शाम 4:37 बजे फाइल की गई थी।

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