वक्फ संपत्तियों के सत्यापन में सरकार ने तेज की प्रक्रिया,इन राज्यों में निकली सबसे अधिक संपत्ति

 वक्फ संपत्तियों के सत्यापन में सरकार ने तेज की प्रक्रिया,इन राज्यों में निकली सबसे अधिक संपत्ति
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देशभर में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने और उन्हें कानूनी मान्यता देने की प्रक्रिया तेज हो गई है, लेकिन इस बीच अभी भी करीब 1.2 लाख वक्फ संपत्तियां ऐसी हैं जिनका सत्यापन पूरा नहीं हो पाया है. वहीं, हजारों संपत्तियां ऐसी भी हैं जिनके रिकॉर्ड में सुधार की जरूरत है. ‘वक्फ संशोधन अधिनियम 2025’ लागू होने से पहले मौजूद वक्फ संपत्तियों को कानूनी दर्जा दिलाने के लिए सरकार ने सभी वक्फ बोर्डों को अपनी संपत्तियों का विवरण केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे. जिन संपत्तियों का डेटा पहले से पोर्टल पर मौजूद है. उनमें किसी तरह की गलती या कमी को सुधारने की अंतिम तारीख 30 जून तय की गई है. इसके अलावा जिन संपत्तियों की जानकारी अबतक पोर्टल पर अपलोड नहीं हुई है. उनके लिए समय तेजी से खत्म हो रहा है. कानून में फिलहाल समय सीमा बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है.अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार. अब तक देशभर की 7.95 लाख से ज्यादा वक्फ संपत्तियों का डेटा केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है. इनमें से करीब 5.87 लाख संपत्तियों को मंजूरी मिल चुकी है. हालांकि. अभी भी बड़ी संख्या में संपत्तियां जांच और सत्यापन के अलग-अलग चरणों में हैं. मंत्रालय के मुताबिक करीब 1.19 लाख संपत्तियां अभी भी वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजर रही हैं. इनमें दस्तावेजों की जांच, डेटा की पुष्टि और अंतिम मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं.केंद्रीय पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक 88.634 संपत्तियां ऐसी हैं जिन्हें “चेकर या अप्रूवर की ओर से अस्वीकृत और मेकर के पास लंबित” श्रेणी में रखा गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इनमें बड़ी संख्या में डुप्लिकेट एंट्री भी शामिल हैं. जिन्हें हटाया जाएगा. इसके अलावा कई मामलों में दस्तावेजों में गलती या जानकारी अधूरी होने के कारण रिकॉर्ड को सुधार के लिए वापस भेजा गया है. यहां “मेकर” उस अधिकृत व्यक्ति को कहा जाता है जिसने पोर्टल पर संपत्ति से जुड़े दस्तावेज अपलोड किए हैं. अधिकारियों के मुताबिक हरमामले की दोबारा जांच की जा रही है ताकि कोई भी सही दावा गलती से खारिज न हो जाए.राज्यवार आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ राज्यों में वक्फ संपत्तियों की संख्या काफी ज्यादा है और वहां अभी भी बड़ी संख्या में मामलों का सत्यापन बाकी है. पश्चिम बंगाल से अब तक 1.34 लाख वक्फ संपत्तियों का डेटा पोर्टल पर अपलोड किया गया है. इनमें से लगभग 1.15 लाख संपत्तियों को मंजूरी मिल चुकी है. यानी करीब 19 हजार संपत्तियां अभी भी सत्यापन या अन्य प्रक्रिया में हैं. उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से 1.52 लाख संपत्तियों का डेटा अपलोड किया गया है.

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इनमें से करीब 1.03लाख संपत्तियों को मंजूरी मिल चुकी है. इसका मतलब है कि लगभग 49 हजार संपत्तियां अभी भी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं. इसके अलावा केरलम से 80.337 वक्फ संपत्तियों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की गई है. इनमें से 63.103 संपत्तियों को मंजूरी मिल चुकी है. जबकि करीब 17 हजार संपत्तियां अभी भी प्रक्रिया में हैं.केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और उनकी निगरानी के लिए 6 जून 2025 को ‘उम्मीद’ नाम का केंद्रीय वक्फ पोर्टल लॉन्च किया था. इस पोर्टल पर देशभर के वक्फ बोर्ड अपनी संपत्तियों का विवरण अपलोड करते हैं. सत्यापन पूरा होने के बाद प्रत्येक वक्फ संपत्ति को एक यूनिक आईडी नंबर दिया जाता है. इससे संपत्तियों की पहचान. रिकॉर्ड प्रबंधन और विवादों के समाधान में आसानी होगी. सरकार का मानना है कि इस पोर्टल के जरिए वक्फ संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेंगे.पोर्टल लॉन्च होने के छह महीने बाद भी कई वक्फ बोर्ड अपनी संपत्तियों का पूरा डेटा अपलोड नहीं कर पाए थे. इसके बाद कई बोर्डों ने ट्रिब्यूनल से अतिरिक्त समय मांगा था. ट्रिब्यूनल ने कई मामलों में छह महीने का अतिरिक्त समय दिया था. लेकिन अब यह अवधि भी समाप्त होने के करीब है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग वक्फ बोर्डों को अलग-अलग समय पर राहत मिली थी. इसलिए उनकी समय-सीमा भी अलग हो सकती है. कुछ बोर्ड अभी भी ट्रिब्यूनल की ओर से तय समय सीमा के भीतर रिकॉर्ड पूरा करने और उसे पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं.4 जून को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजजू ने कहा था कि सरकार राज्य वक्फ बोर्डों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि बाकी बची संपत्तियों का डेटा भी तय समय सीमा के भीतर अपलोड किया जा सके. उन्होंने कहा कि कई मामलों में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रक्रिया में देरी हुई है. लेकिन सरकार और राज्य वक्फ बोर्ड मिलकर इस काम को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.सरकार ने पहले से अपलोड किए गए रिकॉर्ड में सुधार और त्रुटियों को ठीक करने के लिए 30 जून तक का समय दिया है. इसके बाद रिकॉर्ड में बदलाव करना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में जिन वक्फ संपत्तियों का डेटा अभी तक अपलोड नहीं हुआ है या जिनके दस्तावेजों में किसी तरह की गलती है. उनके लिए यह समय बेहद अहम माना जा रहा है.

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