पंजाब कांग्रेस में मची भगदड़,चुनाव से पहले कमजोर हुई पार्टी

 पंजाब कांग्रेस में मची भगदड़,चुनाव से पहले कमजोर हुई पार्टी
Sharing Is Caring:

पंजाब के कई दिग्गज नेता मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए हैं. ऐसे में अध्यक्ष पद पर सबकी नजर थी. लोकल बॉडी चुनावों में पूर्व सीएम और दलित सिख समुदाय से आने वाले चरनजीत चन्नी के इलाके में पार्टी ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, तो अध्यक्ष राजा वड़िंग के इलाके में पार्टी ने खराब प्रदर्शन किया. बस, इसी मौके का फायदा उठाकर बड़ा वर्ग अध्यक्ष बदलने की मांग करने लगा. लेकिन आलाकमान ने चन्नी के सीएम रहते 2022 में बुरी हार के बाद राजा वडिंग को कमान सौंपी तो 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी वापसी करते हुए 13 में से 6 सीटें जीती.ऐसे 8 दौर की बैठकों, सियासी रणनीतिकार सुनील कोनूगोलु की रिपोर्ट और अजय माकन की कमेटी की सिफारिश के आधार पर आलाकमान ने अध्यक्ष बरकरार रखा. साथ ही चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बना दिया. और बाकी बड़े नेताओं को भी कमेटी का अध्यक्ष और सदस्य बना दिया. आलाकमान ने जट सिख, दलित सिख, हिन्दू तीनों समुदायों को जगह देकर बीच का रास्ता अपनाया. वैसे भी अमूमन कांग्रेस में विपक्ष में रहने पर कैंपेन कमेटी का अघोषित चेहरा होता है. ऐसा करके आलाकमान को लगा कि, उसने सबको संतुष्ट कर दिया. लेकिन यहीं से बगावती तेवर सामने आए. सूत्रों के मुताबिक, अध्यक्ष बनने को बेताब चन्नी ने नेताओं और अपने समर्थकों के साथ बैठक करके अपने तेवर दिखाए.इस विवाद को थामने के लिए आलाकमान ने प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल को 5 दिवसीय दौरे पर चंडीगढ़ भेजा. वैसे तो इस दौरे को पंजाब में कांग्रेस की यात्रा का कार्यक्रम तय करना था, जिसे राहुल गांधी हरी झंडी दिखाने वाले थे. लेकिन बदले माहौल में चंडीगढ़ पहुंचे बघेल ने हाल में बनी सभी चुनावी कमेटियों की बैठक बुला ली. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट ने बघेल की बुलाई बैठकों में फिलहाल नहीं जाने का फैसला किया है.

1000781296

अब मंगलवार को अगर ऐसा हो जाता है तो ये आलाकमान के खिलाफ बिगुल की तरह होगा.इससे पहले राजस्थान में गहलोत के सीएम रहते पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खरगे और अजय माकन की बुलाई विधायक दल की बैठक नहीं हो सकी थी, जिसे इन पर्यवेक्षकों का नहीं तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी की अवहेलना माना गया था. जिसे खुद गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर कहा भी. उसी के बाद से गहलोत की माफी और लाख कोशिशों के बाद भी उनको अब कोई अहम पद नहीं मिला. ऐसे में राजा वड़िंग से नाराजगी तो आलाकमान बर्दाश्त कर लेता, लेकिन उसके प्रतिनिधि प्रभारी बघेल से अगर बागी नेता नहीं मिलते तो इसे आलाकमान की बेअदबी माना जाएगा.इधर, चन्नी विरोधी खेमे का कहना है कि, 2022 में चन्नी के सीएम रहते पार्टी हारी, उन पर करप्शन के ढेरों आरोप हैं. वहीं दूसरी तरफ हाल में सुखजिंदर रंधावा ने अमित शाह से मुलाकात भी की है. दिलचस्प है कि, सुखजिंदर रंधावा पूर्व डिप्टी सीएम और सांसद ही नहीं बल्कि राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी महासचिव भी हैं. ऐसे उनका धड़ेबाजी में शामिल होना आलाकमान को नागवार गुजरा है. हालांकि, गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को भले ही वो पंजाब की आंतरिक सुरक्षा के मसले पर बता रहे हैं. ऐसे में कहीं ये कोई बड़ा सियासी खेल तो नहीं है.इससे पहले चन्नी ने पूर्व डिप्टी सीएम और सांसद सुखजिंदर रंधावा, पूर्व मंत्री परगट सिंह, पूर्व मंत्री राणा गुरजीत समेत कई नेताओं के साथ फोटो ट्वीट कर दी और लिखा- unity is strength. इस पर पलटवार करने की बजाय अध्यक्ष राजा वडिंग ने इसे रिट्वीट करके एकता का संदेश देने की कोशिश की.ऐसे में 7 जुलाई यानी मंगलवार का दिन पंजाब कांग्रेस में बड़ी हलचल का दिन है. आलाकमान बागियों के दबाव में झुककर पूरे देश में एक पेन्डूरा बॉक्स नहीं खोलना चाहता. इस बीच अगर बघेल की बुलाई बैठक में अगर बागी रुख अपनाए नेता नहीं आते तो आलाकमान की किरकिरी तय है. कह सकते हैं कि, चुनाव से पंजाब कांग्रेस का बवाल आलाकमान के लिए गले की हड्डी बन गया है.

Comments
Sharing Is Caring:

Related post