चुनावी रणनीति के तहत घेराबंदी करेगी कांग्रेस,पंजाब में आप को करेगी सत्ता से बाहर
पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी के बीच एक तीखे राजनीतिक संग्राम में बदल गया है. 1984 के सिख विरोधी दंगों में सजा काट रहे सज्जन कुमार से जुड़े बयानों ने चुनावी माहौल को और भी गरमा दिया है.पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान भीड़ को उकसाने और हिंसा में शामिल होने के गंभीर आरोपों में घिरे रहे. वर्ष 2018 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को रद्द करते हुए, दिल्ली कैंट के राज नगर इलाके में पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारे को जलाने के मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. इस सजा के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. उम्रकैद काट रहे सज्जन कुमार का 20 अगस्त 2026 को 84 वर्ष की आयु में सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया.सज्जन कुमार के निधन के बाद विवाद तब गहराया जब कांग्रेस लोकसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा और पार्टी के अन्य नेताओं के बयान सामने आए. दीपेंद्र हुड्डा ने सज्जन कुमार को महान नेता बताया, जिसके बाद AAP और बीजेपी ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर सिख विरोधी बताते हुए घेरा.

विरोधी दलों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने उन्हें सम्मानित नेता और रोल मॉडल बताकर उनकी सराहना की. इन बयानों पर पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया. दीपेंद्र हुड्डा- कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सज्जन कुमार को महान नेता बताया.चरणजीत सिंह चन्नी- पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने सज्जन कुमार का विरोध करते हुए कहा की कांग्रेस उसके साथ नहीं है, उनका निधन सजा काटते हुए हुआ है और वो सिख विरोधी था. AAP ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इन बयानों से उसकी सिख विरोधी सोच एक बार फिर सामने आ गई है. आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने में लगी है. विवाद बढ़ता देख पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने इसे व्यक्तिगत बयान बताकर खुद को अलग कर लिया. हालांकि, दिल्ली कांग्रेस नेताओं के रुख से पार्टी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं. पंजाब चुनावों में 1984 के जख्मों की गूंज एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में हैं. AAP और अकाली दल ने इन बयानों को सीधे सिख समुदाय की भावनाओं से जोड़ते हुए बड़ा मुद्दा बना दिया है. जहां कांग्रेस इसे नेताओं की निजी राय बताकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में जुटी है. आम आदमी पार्टी इसे आगामी चुनाव में एक प्रमुख राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती दिखाई दे रही है.
