एंथ्रोपिक की चेतावनी आई सामने,AI का गलत इस्तेमाल कर रहा चीन?

 एंथ्रोपिक की चेतावनी आई सामने,AI का गलत इस्तेमाल कर रहा चीन?
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अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईरान, चीन और स्टेट स्पॉन्सर्ड ग्रुप्स ने उसके AI मॉडल क्लॉड का इस्तेमाल प्रचार, खुफिया निगरानी, साइबर हमलों और हथियारों से जुड़े कामों में किया. कंपनी के मुताबिक, दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच ऐसी गतिविधियों को पहचानकर रोका गया. कंपनी की ये रिपोर्ट एक रिसर्चर के इस्तीफे के दो दिन बाद आई है, जिसमें रिसर्चर ने दावा किया था कि कंपनी के मॉडल 2030 तक इंसानों के विलुप्त होने का कारण बन सकते हैं.रिपोर्ट के मुताबिक, एंथ्रोपिक ने ईरान से जुड़े मामलों में तीन राज्य-समर्थित अकाउंट हटाए. ये ईरान के संस्कृति मंत्रालय के इस्लामिक कल्चर एंड कम्युनिकेशंस ऑर्गनाइजेशंस, खोरासान रजवी के इस्लामिक प्रोपेगैंडा ऑफिस और इस्लामिक प्रोपेगैंडा ऑर्गनाइजेशन के बीना कल्चरल ऑब्जर्वेटरी से जुड़े थे.

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क्लॉड से इन अकाउंट्स ने प्रोपेगैंडा कैंपेन, स्ट्रैटेजिक डॉक्यूमेंट, फर्जी प्रोफाइल और टारगेट डेटाबेस तैयार किए. सरकारी बुलेटिनों को फारसी, अरबी, उर्दू, मलय, स्पेनिश और अंग्रेजी में बदला गया और 20 भाषाओं तक कैंपेन की प्लानिंग थी. ये कंटेट X, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे सोशल साइट्स पर फैलाई गई.ईरान के इन अकाउंट ने IRGC प्रवक्ता की आवाज में संदेश तैयार किए. युद्ध के दौरान CSIS, Brookings और RAND जैसी पश्चिमी संस्थाओं के नाम से झूठे दावे फैलाए गए. एक ईरान-लिंक्ड अकाउंट ने खुले सोर्स की जानकारी जुटाकर अमेरिकी नौसैनिक बलों को निशाना बनाने के लिए सिफारिशें तैयार कीं. इसमें सैन्य तस्वीरों से कर्मियों के नाम, जहाज-विमान के ट्रांसपोंडर नंबर, सैटेलाइट इमेजरी स्क्रिप्ट और नौसैनिक गतिविधियों वाली वेबसाइटों की लिस्ट जुटाई गई. जहाजों के सैटेलाइट टर्मिनल और कंट्रोल सिस्टम की कमजोरियों पर जानकारी ली गई.इसी अकाउंट ने ईरान के घरेलू निगरानी प्लेटफॉर्म के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान और मोबाइल डिवाइस को पकड़ने वाली तकनीक पर काम किया. एक प्राइवेट टेलीग्राम ग्रुप के 244 मेंबर्स के डेटा से उनके सामाजिक संबंधों का नक्शा बनाया गया. दूसरे ईरान-लिंक्ड अकाउंट ने इजराइल और यहूदी डायस्पोरा के सैकड़ों लोगों की प्रोफाइलिंग के लिए ओपन सोर्स इंटेलिजेंस टूल बनाया. साथ ही मैलवेयर में बदलाव और उसे छिपाने की तकनीक डेवलप की. ईरान के एक दूसरे प्रोपैगेंडा कैंपेन में फ्री क्लॉड अकाउंट्स से मैलवेयर, फिशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और फेक वेबसाइट्स बनाई गईं. एंथ्रोपिक ने ये अकाउंट बंद किए और इस मामले की जानकारी अमेरिकी सरकार को दी.एंथ्रोपिक ने चीन से जुड़े एक मामले में बताया कि क्लॉड का इस्तेमाल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के लिए एंटी-टॉरपीडो वेपन सिस्टम डेवलप करने में किया गया. एक चीनी डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े एक्टर ने क्लॉड से एंटी-टॉरपीडो फायर-कंट्रोल सिस्टम की चीनी भाषा में रूपरेखा, 200 से ज्यादा पन्नों का तकनीकी प्रस्ताव और प्रेजेंटेशन तैयार किया. उसने अमेरिकी एंटी-टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन प्रोग्राम से अपनी प्रणाली की तुलना भी की और अमेरिकी नौसेना पर ब्रीफिंग बनाई.एंथ्रोपिक ने चीन, ईरान और पश्चिम अफ्रीका से जुड़े सर्विलांस कैंपेन को भी रोका. इनमें हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक लोग, तिब्बती और फालुन गोंग समुदाय, ईरानी अल्पसंख्यक और सरकार विरोधी लोग निशाने पर थे. माली के नेशनल सिक्योरिटी कॉन्ट्रैक्टर ने क्लॉड से खुफिया सॉफ्टवेयर तैयार किया. रिपोर्ट में रूस की जासूसी, साइबर हमलों और रूस, मलेशिया, ईरान और बांग्लादेश में प्रोपेगैंडा कैंपेन का जिक्र है. साथ में यमन, चीन और रूस में बंदूक, मिसाइल, ड्रोन, बम और अन्य हथियारों से जुड़े सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का भी जिक्र है.एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में AI के इस्तेमाल से जैविक हथियार यानी बायोवेपन बनाने के खतरे को गंभीर बताया गया है. कंपनी ने ऐसे मामलों का पता लगाया, जहां वैज्ञानिकों ने उसके AI मॉडल की सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर जैविक शोध में मदद लेने की कोशिश की. एक मामले में चिकनगुनिया वायरस पर स्टेट स्पॉन्सर्ड रिसर्च के लिए AI का इस्तेमाल किया गया. यह रिसर्च वैक्सीन बनाने के लिए भी हो सकता थी, लेकिन इसका जुड़ाव मिलिट्री रिसर्च इंस्टीट्यूट से होने की वजह से चिंता बढ़ गई. एंथ्रोपिक ने कहा कि AI जितना सक्षम होगा, उसके गलत इस्तेमाल का खतरा उतना ही बढ़ेगा.कंपनी का कहना है कि AI अब कुछ मामलों में इंजीनियरिंग कर्मचारियों की जगह ले रहा है. एंथ्रोपिक ने चेतावनी दी कि मॉडल ज्यादा सक्षम होंगे तो उनके दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ेगा. इसलिए AI कंपनियों और सरकारों को मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनानी होगी.

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