NCP में सब कुछ नहीं है ठीक!पार्टी के अंदर फिर से मचेगी विद्रोह

 NCP में सब कुछ नहीं है ठीक!पार्टी के अंदर फिर से मचेगी विद्रोह
Sharing Is Caring:

महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय काफी उथल-पुथल मची हुई है. एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर चर्चा जोरों पर है. इस बीच राज्यसभा सांसद पार्थ पवार की सीएम देवेंद्र फडणवीस से मीटिंग को लेकर चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. कहा जा रहा है कि पार्टी में नाराजगी है. हालांकि इसपर पार्थ पवार ने मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. उन्होंने बताया कि ‘जयंत पाटिल और हमारी वर्षा बंगले पर कोई मुलाकात नहीं हुई. जयंत पाटिल अपने विधानसभा क्षेत्र को लेकर चर्चा करने वर्षा बंगले पर गए थे, ये सच है और ये उन्होंने मीडिया से भी कहा है’.उन्होंने आगे बताया, ‘मैं और प्रफुल्ल भाई (प्रफुल्ल पटेल) अलग गए थे. पार्लियामेंट अधिवेशन शुरू होने के पहले एक प्रथा रही है कि सूबे के राज्य सरकार का कोई प्रश्न होगा तो सांसद उसे मिलकर सुनते हैं. हमने सीएम का समय मांगा था, प्रफुल्ल भाई ने भी समय मांगा था और हम गए. अगर ये मुलाकात राजनैतिक होती तो हम सुनेत्रा वाहिनी (सुनेत्रा पवार) को बताते, लेकिन ये राजनीतिक मुलाकात नहीं थी, इसलिए बताने का कोई विषय नहीं आया. उसके बाद हमारी पार्टी के कोर कमिटी की बैठक हुई, जिसमें SIR पर, अजीत दादा के जन्मदिन के कार्यक्रम को लेकर हमारी चर्चा भी हुई. जो आदर मेरे मन मैं अजीत दादा के लिए था, वहीं आदर सुनेत्रा वाहिनी के लिए है और उनके नेतृत्व में एनसीपी आगे बढ़ रही है’.वहीं, इस मुद्दे पर NCP के स्टेट प्रेसिडेंट सुनील तटकरे ने कहा कि ‘मुझे पार्थ के चीफ मिनिस्टर से मिलने के बारे में पता नहीं है. उनके मिलने में अजीब लगने की कोई वजह नहीं है. एकनाथ शिंदे चीफ मिनिस्टर के पद पर रह चुके हैं, मुझे नहीं लगता कि वह कहेंगे कि कोई खास डिपार्टमेंट दूसरी पार्टी को नहीं दिया जाना चाहिए.

1000790142

हमारी मांग है कि हमें फाइनेंस पोर्टफोलियो मिले. डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुनेत्राताई के नेतृत्व में हम इस बारे में चीफ मिनिस्टर से भी मिलेंगे. मुझे नहीं लगता कि जयंत पाटिल-एकनाथ शिंदे मीटिंग में कोई पॉलिटिकल इक्वेशन होगा’.उन्होंने आगे कहा, ‘शरद पवार ग्रुप के सरकार में शामिल होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है. सुप्रियाताई (सुप्रिया सुले) ने कहा है कि हम UPA में सुले बिल पर चर्चा और विचार करेंगे, वह एक जिम्मेदार लीडर हैं. जब अजित दादा जिंदा थे, तब मर्जर के बारे में चर्चा हुई थी और यह फाइनल स्टेज तक गई थी. अगर दादा जिंदा होते, तो आज हम दादा की योजना के अनुसार मर्जर देखते. अभी हमारी पार्टी में मर्जर के बारे में कोई चर्चा नहीं हो रही है’. उन्होंने एकनाथ शिंदे को लेकर भी कहा कि ‘शिंदे साहब हमेशा दिल्ली जाते हैं. उनके पास कुछ जरूरी डिपार्टमेंट हैं, वो अपने काम से जाते हैं. उनके हर विजिट का पॉलिटिकल मतलब निकालना ठीक नहीं है’.

Comments
Sharing Is Caring:

Related post