भारतीय शेयर बाजार को आखिर किसकी लग गई है नजर,कब तक जारी रहेगी गिरावट?
भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों भारी बिकवाली का दौर चल रहा है. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार से तेजी से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है. पिछले चार कारोबारी सत्रों के आंकड़े काफी डराने वाले हैं. इस दौरान एफआईआई ने करीब 35000 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले हैं. इस भारी बिकवाली का असर शेयर बाजार की चाल पर पड़ा है. सेंसेक्स से लेकर निफ्टी तक, सभी प्रमुख सूचकांक लगातार लाल निशान में बंद हो रहे हैं. बाजार में छाई इस मायूसी से निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई है.शेयर बाजार के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हो जाता है. विदेशी निवेशक हर दिन औसतन 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर रहे हैं. 28 सितंबर को इन निवेशकों ने 5,353.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इसके अगले दिन यानी 29 सितंबर को बिकवाली का ये आंकड़ा तेजी से बढ़कर 9,980.22 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. बाजार से पैसा निकालने का ये सिलसिला यहीं नहीं रुका. 30 सितंबर को एफआईआई ने 10,148.41 करोड़ रुपये की बड़ी निकासी की. इसके बाद 1 अक्टूबर को भी 9,484.22 करोड़ रुपये के शेयर बाजार में बेचे गए. कुल मिलाकर महज चार कारोबारी दिनों के भीतर विदेशी निवेशकों ने करीब 34,966 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम भारतीय बाजार से निकाल ली है.एक तरफ विदेशी निवेशक लगातार शेयर बेच रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार को गिरने से बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. डीआईआई लगातार खरीदारी करके बाजार को सहारा दे रहे हैं. 28 सितंबर को इन्होंने 5,189.02 करोड़ रुपये का निवेश किया. 29 सितंबर को 6,952.71 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे गए. 30 सितंबर को घरेलू निवेशकों ने 11,271.73 करोड़ रुपये की बंपर खरीदारी की. वहीं 1 अक्टूबर को भी डीआईआई ने 10,041.84 करोड़ रुपये का निवेश किया. इन चार दिनों में डीआईआई ने कुल 33,455 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं.

आंकड़ों से साफ है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का एक बहुत बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों ने खरीद लिया है.बाजार में इस भारी उतार-चढ़ाव का सीधा नुकसान आम निवेशकों की जेब पर हुआ है. इस पूरे हफ्ते बाजार लगातार चार दिन गिरकर बंद हुआ है. निफ्टी में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स भी करीब 3 प्रतिशत टूट चुका है. निफ्टी बैंक इंडेक्स में 2 प्रतिशत की कमजोरी आई है. ब्रॉडर मार्केट पर भी इस गिरावट का गहरा असर है. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स लगभग 4 प्रतिशत नीचे आ गया है. सबसे चिंताजनक बात ये है कि बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में करीब 20 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आई है. ये आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों की कितनी बड़ी संपत्ति बाजार की इस गिरावट में स्वाहा हो गई.शेयर बाजार में मचे इस हाहाकार का सीधा असर भारतीय करेंसी पर भी देखने को मिल रहा है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है. गुरुवार को रुपये में 48 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इस भारी गिरावट के साथ ही रुपया टूटकर 96 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया. पिछले दो महीनों के दौरान रुपये में दर्ज की गई ये एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है. विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही डॉलर की निकासी के कारण ही रुपये पर इतना भारी दबाव बना हुआ है. बाजार के मौजूदा हालात बता रहे हैं कि जब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं थमती, तब तक बाजार के साथ रुपये पर भी दबाव बना रहेगा.
