CMO कर्मचारी पर दर्ज केस ने बढ़ाई सीएम सम्राट की परेशानी,जमुई पीड़िता मामले में मीसा भारती आईं आगे
बिहार के जमुई की नाबालिग पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के मामले में बिहार सरकार और पुलिस की ओर से कार्रवाई सामने आई है. मुख्यमंत्री कार्यालय के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर पोस्ट किए जाने के मामले में CMO के एक कर्मचारी सागर प्रसाद के खिलाफ पटना के सचिवालय थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. हालाकि FIR दर्ज कराने के लिए मीसा भारती सचिवालय थाने के बाहर कई घंटे जमी हुईं थीं. उनके द्वारा दिए गए आवेदन को पुलिस ने जांच में भी शामिल कर लिया है.इस मामले में पुलिस ने सीएमओ के स्टेनो के खिलाफ केस दर्ज किया है. मामला 19 सितंबर को जमुई में नाबालिग बालिका और उसके साथी के साथ अभद्र व्यवहार की घटना से जुड़ा है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद जमुई पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई की थी.

पुलिस की ओर से पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं करने को लेकर भी सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री पर कार्रवाई की जा रही है।विवाद उस समय बढ़ा, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया हैंडल से जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार के साथ मुलाकात की तस्वीर पोस्ट की गई. तस्वीर में पीड़िता का चेहरा ब्लर किए जाने की बात सामने आई, लेकिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि तस्वीर और उससे जुड़ी जानकारी से पीड़िता की पहचान उजागर होने की स्थिति बन सकती है. बाद में यह पोस्ट सोशल मीडिया हैंडल से हटा दी गई.पुलिस के अनुसार, इसी दिन सूचना मिली कि पीड़िता के परिजनों का एक फोटो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपलोड किया गया है. इसके बाद CMO कार्यालय के कर्मी के विरुद्ध मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया.तस्वीर सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर POCSO कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि यदि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में अन्य लोगों पर POCSO के तहत कार्रवाई की जा रही है तो मुख्यमंत्री के मामले में भी कानून समान रूप से लागू होना चाहिए. तेजस्वी ने यह भी कहा था कि यदि पुलिस मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो वह अदालत का रुख करेंगे. उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक तौर पर भी चर्चा में रहा.पुलिस की कार्रवाई में अब मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी को आरोपी बनाया गया है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक CMO के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद पर मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से जमुई पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर पोस्ट करने का आरोप है. सचिवालय थाना में दर्ज मामले में POCSO एक्ट की धारा 23 के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 73 और IT Act की धाराओं का उल्लेख किया गया है. हालांकि, मामले में आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी.पुलिस के मुताबिक लोकसभा सांसद मीसा भारती की ओर से भी इस मामले में आवेदन दिया गया है. पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आवेदन में बिना जांच किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है. पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस आवेदन को पहले से दर्ज कांड के अनुसंधान का हिस्सा बना दिया गया है. पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और नियमानुसार अनुसंधान किया जा रहा है.इधर, जमुई पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में बिहार CMO के स्टेनो पर FIR दर्ज होने के बाद राज्य में सियासी बवाल शुरू हो गया है. हालाकि इससे पहले मीसा भारती ने इस मामले में FIR करने से रोके जाने का आरोप लगाया था. राष्ट्रीय जनता दल की सांसद मीसा भारती ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें मुख्य X हैंडल के खिलाफ FIR दर्ज करने से रोका गया. उन्होंने मांग की कि अगर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के X हैंडल पर कार्रवाई नहीं हो सकती, तो बाकी 250-300 लोगों पर हुए केस भी हटाए जाएं।
