ईरान ने ट्रंप को दी खुली चुनौती,दम है तो आर्मी भेजे अमेरिका
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर अमेरिका अपने अगले कदम पर विचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि वह अभी फैसला लेने की स्थिति में हैं और जल्द ही बहुत बड़ी घटनाएं हो सकती हैं. ट्रंप के इस बयान के बीच ईरान ने बताया कि उसने अपनी कुछ मांगें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं. ये मांगें कतर के जरिए अमेरिका को भेजी गई हैं. कतर दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. ईरान ने कहा है कि किसी नई बातचीत के लिए कुछ शर्तें पूरी होना जरूरी हैं. इनमें सबसे प्रमुख शर्त जारी लड़ाई को रोकना और ईरान पर लगी समुद्री नाकाबंदी हटाना शामिल है. इस तरह एक ओर अमेरिका अपने अगले कदम पर विचार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रख रहा है. आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है या स्थिति और बिगड़ती है, यह उनके अगले फैसलों पर निर्भर करेगा.ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने नया हमला किया, तो वह बिना किसी सीमा के जवाबी कार्रवाई करेगा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर अमेरिका के सामने मुख्य रूप से तीन विकल्प हैं- ईरान को पूरी तरह तबाह करना, उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर होने देना या फिर किसी समझौते तक पहुंचना. ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि उनके सामने सवाल यह है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह ईरान के खिलाफ बेहद कठोर सैन्य कार्रवाई कब करें. उन्होंने ईरान से कहा कि उसे अपने व्यवहार में सावधानी बरतनी चाहिए।रेजाई ने अमेरिका को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि अगर वॉशिंगटन युद्ध को लेकर गंभीर है तो अमेरिकी सैनिकों को ईरान में दाखिल होना चाहिए.

उनकी दलील थी कि अमेरिका अभी तक बड़े पैमाने पर हवाई शक्ति का इस्तेमाल कर रहा है. ईरान का आरोप है कि अमेरिकी सेना आसमान से बम बरसाती है और फिर पीछे हट जाती है. रेजाई के बयान का संकेत साफ था- अगर अमेरिका ईरान पर अपना सैन्य दबाव निर्णायक बनाना चाहता है तो उसे जमीन पर उतरकर लड़ना होगा.ईरान का क्षेत्रफल बड़ा है और वहां पहाड़ी इलाकों की संख्या भी काफी है. ऐसे देश में बड़ी संख्या में विदेशी सैनिक भेजना और लंबे समय तक किसी इलाके पर नियंत्रण बनाए रखना बेहद जटिल सैन्य अभियान होगा. यही वजह है कि ईरान पर चल रहे अमेरिकी अभियान में हवाई हमलों और दूर से किए जाने वाले सैन्य हमलों को प्रमुख भूमिका मिली है.रेजाई पहले भी दावा कर चुके हैं कि अमेरिका के हमलों की रणनीति में बदलाव आया है और ईरान को आशंका है कि भविष्य में जमीन पर अभियान की कोशिश की जा सकती है. अगस्त में उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित जमीनी अभियान की तैयारी के लिए बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया हो सकता है।ईरान में अमेरिकी सैनिकों का बड़े पैमाने पर प्रवेश युद्ध को एक बिल्कुल नए चरण में ले जाएगा. हवाई हमलों में किसी सैन्य ठिकाने या दूसरे लक्ष्य को दूर से निशाना बनाया जा सकता है. लेकिन जमीनी अभियान में सैनिकों को दुश्मन के इलाके में प्रवेश करना, आगे बढ़ना, कब्जे वाले इलाके की सुरक्षा करना और लंबे समय तक अपनी रसद व्यवस्था बनाए रखना पड़ता है.ईरान का पहाड़ी भूगोल इस चुनौती को और बढ़ा सकता है. यही वजह है कि रेजाई का सवाल केवल अमेरिका को दी गई चुनौती नहीं है, बल्कि वह अमेरिकी युद्ध रणनीति पर भी सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं- क्या सिर्फ हवाई हमलों के जरिए ईरान पर निर्णायक दबाव बनाया जा सकता है?रेजाई ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है और अब वह अमेरिकी हवाई हमलों का जवाब देने के लिए पहले से ज्यादा तैयार है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाकर जवाब और तेज कर सकता है.20 सितंबर की एक रिपोर्ट में भी रॉयटर्स ने बताया कि ईरान की सैन्य कमान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के किसी नए हमले की स्थिति में अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय हितों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
