मिडिल ईस्ट की जंग में सऊदी अरब को कोई नहीं दे रहा साथ,अमेरिका ने भी कर लिया किनारा
मिडिल ईस्ट की जंग में सऊदी अरब बुरी तरह फंस गया है. वो भी अकेले. दरअसल, हूती के विद्रोही लड़ाके लगातार सऊदी पर हमलावर हैं. इन लड़ाकों से निपटने के लिए सऊदी को पाकिस्तान, तुर्की और अमेरिका से मदद की उम्मीद थी, लेकिन अब तक तीनों ही देशों ने पल्ला झाड़ लिया है. ताजा मामला अमेरिका का है.अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के मुताबिक सऊदी के क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद मांगी थी, ट्रंप ने मदद देने से इनकार कर दिया है. कहा जा रहा है कि ईरान जंग में सऊदी ने अमेरिका की मदद नहीं की थी. अब अमेरिका ने हूती और सऊदी की लड़ाई में खुद को अलग-थलग कर लिया है.रिपोर्ट के मुताबिक क्राउन प्रिंस ने गुरुवार को ट्रंप से कहा कि हूती के विद्रोही लाल सागर की ओर बढ़ रहे हैं. अगर वे बाब अल मंडेब पर कंट्रोल कर लेते हैं तो इसका बड़ा असर होगा. मोहम्मद बिन सलमान ने आगे कहा कि हूती विद्रोहियों को खत्म करने के लिए वाशिंगटन को आगे आना चाहिए.मीटिंग की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने एक्सियोस को बताया कि ट्रंप ने सीधे मना कर दिया. ट्रंप ने कहा कि हम हूती के मामले में दखल देने पर विचार नहीं कर रहे हैं. 2025 में अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच एक समझौता हुआ था.ईरान के खिलाफ अमेरिका ने फरवरी 2026 में युद्ध की शुरुआत की. उस वक्त अमेरिका को सऊदी से समर्थन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सऊदी ने न्यूट्रल रूख अख्तियार कर लिया.

सऊदी ने अमेरिका से साफ कह दिया कि रियाद युद्ध का समर्थन नहीं करता है.सऊदी के कारण अमेरिकी फाइटर जेट को ईरान पर हमला करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. अमेरिकी फाइटर जेट को सऊदी ने ईंधन भरने के लिए उतरने तक की इजाजत नहीं दी.कई मौकों पर सऊदी की दखल के कारण अमेरिका को ईरान पर हमला टालना पड़ा. राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की. हालांकि, सऊदी का इस पर कोई असर नहीं हुआ.अब जब सऊदी हूती से लड़ाई में फंस गया है तब, उसने अमेरिका से मदद की गुहार लगाई है. हालांकि, अमेरिका ने सहायता करने से फिलहाल इनकार कर दिया है.सऊदी की एक गलती पाकिस्तान और तुर्की पर भरोसा करना है. कुछ ही महीने पहले सऊदी ने तुर्की के साथ मिलकर पाकिस्तान के नेतृत्व में मक्का रक्षा समझौता किया. इस समझौते के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो इसे तीनों देश पर हमला माना जाएगा.सऊदी को अब तक लग रहा था कि अब उसे हर लड़ाई में पाकिस्तान और तुर्की बचाने आएगा, लेकिन हूती लड़ाई में पाकिस्तान ने चुप्पी साध ली है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पाकिस्तान फिलहाल हूती हमले को लेकर कुछ भी विचार नहीं कर रहा है.हूती को ईरान समर्थित मिलिशिया माना जाता है. हूती पर हमले का मतलब है- ईरान को नाराज करना. पाकिस्तान इस वक्त ऐसा कुछ भी नहीं करने वाला है. ईरान से सऊदी के रिश्ते काफी ज्यादा खराब हैं. वहीं यूएई से भी सऊदी की लड़ाई हो गई है. यमन में कंट्रोल को लेकर सऊदी ने यूएई के टैंकरों पर हमला कर दिया था. ईरान युद्ध के दौरान भी सऊदी ने यूएई की कोई मदद नहीं की. अब बदला लेने की बारी यूएई की है.हूती यमन के विरोधी समूह हैं, जिसे ईरान का करीबी माना जाता है. यमन और सऊदी की सीमा एक दूसरे से लगती है. हूती विद्रोही यमन की सरकार के खिलाफ गृह युद्ध लड़ रही है. इस लड़ाई में सऊदी की सरकार यमन के साथ है. इसी कारण हूती के निशाने पर सऊदी है.हालिया ईरान जंग में अमेरिका ने जब तेहरान की नाकाबंदी शुरू की, तब ईरान ने हूती की मदद से लाल सागर को घेरना शुरू कर दिया है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक इसके कारण सऊदी की तेल सप्लाई में कमी आई है.रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी का तेल उत्पादन जुलाई के करीब 8.1 मिलियन बैरल/दिन से घटकर अगस्त में 6.26.24 मिलियन बैरल/दिन रह गया. यानी 23 प्रतिशत की गिरावट हुई है.हूती के लड़ाके गुरिल्ला युद्ध में माहिर माने जाते हैं. 2025 में इन लड़ाकों के खिलाफ अमेरिका ने युद्ध छेड़ा था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. इजराइल ने भी कोशिश की, लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिली.हूती के लड़ाकों का लाल सागर के एक अहम हिस्से पर नियंत्रण है. यहां से तेल और गैस की करीब 12 प्रतिशत सप्लाई होती है. यही वजह है कि कोई भी देश इस लड़ाई में हूती के खिलाफ उतरना नहीं चाहता है.
