बिहार में सीओ की रिपोर्ट के बिना जमीन की नहीं होगी रजिस्ट्री,इन इलाकों में सर्किल रेट सीधे हुआ दोगुना
बिहार में जमीन खरीदना अब पहले जितना आसान नहीं रहा. पिछले कुछ महीनों में राज्य सरकार ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया से लेकर जमीन के दाम और कुछ खास तरह की जमीन की खरीद-बिक्री तक, कई नए नियम लागू किए हैं. एक तरफ अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले अंचल अधिकारी यानी सीओ की जांच रिपोर्ट जरूरी कर दी गई है, ताकि फर्जीवाड़ा रोका जा सके. दूसरी तरफ सर्किल रेट यानी जमीन की न्यूनतम सरकारी कीमत में शहरी इलाकों में सीधे दोगुनी बढ़ोतरी लागू हो चुकी है, जिससे रजिस्ट्री कराना पहले से ज्यादा महंगा हो गया है. इसके अलावा राज्य के कई जिलों में नदियों के रास्ता बदलने से बनी ‘टोपो लैंड’ की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. इन तीनों बदलावों से आम खरीदारों के लिए जमीन का सौदा पहले से ज्यादा जटिल और महंगा हो गया है.बिहार में जमीन की धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्री के मामलों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने चरणबद्ध तरीके से नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है.

सबसे पहले 1 अप्रैल 2026 से खरीदारों को ई-निबंधन पोर्टल पर जमीन से जुड़ी 13 जरूरी जानकारियां देना जरूरी किया गया. फिर 15 मई से यह तय हुआ कि रजिस्ट्री से पहले सीओ खरीदार को जमीन की पूरी रिपोर्ट देंगे. इसके बाद 11 जुलाई 2026 से इस व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया. अब आवेदन मिलने के बाद संबंधित अंचल अधिकारी यानी सीओ को सिर्फ 10 दिनों के अंदर जमीन की जांच कर अपनी रिपोर्ट देनी होगी. इसमें असली मालिक कौन है, जमीन पर कोई विवाद तो नहीं, बैंक का लोन है या नहीं और जमीन की सरकारी स्थिति क्या है, जैसी जरूरी जानकारियां शामिल होंगी.यह रिपोर्ट सीधे आवेदक के लॉगिन अकाउंट पर दिखाई देगी और एसएमएस के जरिए भी इसकी जानकारी दी जाएगी. सरकार का कहना है कि इससे पुराने विवाद, अवैध कब्जे और गलत जमाबंदी वाली जमीन की पहचान आसान होगी. हालांकि खरीदारों के लिए इसका मतलब यह है कि अब रजिस्ट्री पहले की तरह जल्दी नहीं हो सकेगी.जमीन खरीदना महंगा होने की सबसे बड़ी वजह सर्किल रेट यानी जमीन की न्यूनतम सरकारी कीमत में हुई बड़ी बढ़ोतरी है, जो जून 2026 से पूरे राज्य में लागू हो चुकी है. शहरी इलाकों में सर्किल रेट को सीधे दोगुना कर दिया गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसमें 1.6 गुना तक बढ़ोतरी हुई है. साथ ही स्टांप ड्यूटी भी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दी गई है. इसका सबसे बड़ा असर राजधानी पटना में दिख रहा है. राजाबाजार, बोरिंग रोड, फ्रेजर रोड, डाकबंगला और गांधी मैदान जैसे इलाकों में जमीन की सरकारी कीमत 1.25 करोड़ से बढ़कर 2.50 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा तक पहुंच गई है. वहीं पाटलिपुत्र जैसे पॉश रिहायशी इलाकों में यह 1.09 करोड़ से बढ़कर 2.18 करोड़ रुपये हो गई है.नतीजा यह है कि गांधी मैदान जैसे वीवीआईपी इलाकों में एक कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री कराने पर अब करीब 27.50 लाख रुपये तक शुल्क देना होगा. शहरों में 2016 और गांवों में 2013 के बाद यह पहला बड़ा बदलाव है. सरकार ने अब हर साल सर्किल रेट में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का भी फैसला किया है. यानी आने वाले सालों में जमीन की सरकारी कीमत और बढ़ सकती है. हालांकि महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर 5 प्रतिशत की छूट अभी भी जारी रहेगी.तीसरा बड़ा बदलाव टोपो लैंड से जुड़ा है. टोपो लैंड ऐसी जमीन होती है, जो नदियों के बहाव का रास्ता बदलने से बनती है. ऐसी जमीन का पुराने सरकारी रिकॉर्ड में साफ खाता, खेसरा या सर्वे की जानकारी दर्ज नहीं होती. इसी वजह से इसके मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ था. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, भोजपुर, सारण, सिवान, खगड़िया, गोपालगंज, बक्सर और पश्चिम चंपारण समेत 14 जिलों में टोपो लैंड की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है. सरकार का कहना है कि इससे जमीन को लेकर होने वाले विवाद कम होंगे और फर्जी कागजों के जरिए ऐसी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लगेगी. लेकिन इन 14 जिलों में जमीन तलाश रहे लोगों के लिए फिलहाल विकल्प सीमित हो गए हैं.इसके अलावा सरकार ने भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में प्रस्तावित नई सैटेलाइट टाउनशिप वाले इलाकों में भी मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन के ट्रांसफर और नए निर्माण पर 2027 तक रोक लगाई है. यह टोपो लैंड पर लगी रोक से अलग फैसला है. कुल मिलाकर, सीओ की अनिवार्य जांच रिपोर्ट, सर्किल रेट में दोगुनी बढ़ोतरी और टोपो लैंड पर लगी रोक ने बिहार में जमीन खरीदने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा सख्त, धीमा और महंगा बना दिया है. सरकार इन कदमों को फर्जीवाड़ा रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जरूरी बता रही है. वहीं आम खरीदारों को अब जमीन का सौदा पक्का करने से पहले ज्यादा कागजी प्रक्रिया, इंतजार और खर्च का सामना करना पड़ रहा है.
