काले धन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती,भ्रष्ट नेताओं पर अब ऐसे गिरेगी गाज,जानिए नई नियम!
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनावों में काले धन के इस्तेमाल को रोकने के लिए गाइडलाइंस जारी की. कोर्ट ने कहा कि वोटरों को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बेहिसाब कैश स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की नींव पर चोट करता है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि चुनावों में काले धन का इस्तेमाल लोकतंत्र की बुनियाद के लिए गंभीर खतरा है.अदालत कर्नाटक हाई कोर्ट के 2015 के एक आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी. मामले में आरोपी प्रतीक पारसरामपुरिया पर आरोप था कि उन्होंने वोटरों को रिश्वत देने के लिए भारी मात्रा में कैश जमा किया था. पारसरामपुरिया 2014 में बेल्लारी से लोकसभा उपचुनाव में उम्मीदवार थे. हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया था.मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में काले धन से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए कार्यवाही का दायरा बढ़ा दिया.

साथ ही चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस भी जारी किया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइन भी जारी की.नकदी या संपत्ति जब्त करने वाली एजेंसी को 24 घंटे के भीतर डीएम, एडीएम या अदालत को इसकी जानकारी देनी होगी. जब्ती के साथ लिखित रूप से यह बताना होगा कि प्रथमदृष्टया उसका संबंध संदिग्ध चुनावी अपराध से कैसे है? जांच अधिकारियों को FIR दर्ज होने के एक साल के भीतर जांच पूरी करने का हरसंभव प्रयास करना होगा. जांच में देरी होने पर उसका कारण लिखित रूप से दर्ज कर चुनाव आयोग को बताना होगा. जांच की स्थिति की हर तीन महीने में रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी जाएगी. 10 लाख रुपये से ज्यादा नकदी मिलने पर इसकी सूचना आयकर विभाग को दी जाएगी. हाई कोर्ट उम्मीदवारों और मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों की जल्द से जल्द सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करेंगी. चुनावी चक्र के दौरान उम्मीदवारों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने के लिए संबंधित हाई कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य होगी. 2024 लोकसभा और 2019 से 2025 के विधानसभा चुनावों से जुड़े लंबित मामलों को अदालतें जल्द से जल्द फैसले तक पहुंचाने की कोशिश करेंगी.
