मौसम ने ली अंगड़ाई,तेज रफ्तार आंधी के साथ होगी बारिश!
इस साल मानसून की शुरुआत में डर था कि इस बार अल नीनो के चक्कर में खेल बिगड़ जाएगा और बारिश कम होगी, लेकिन राहत की बात यह रही कि ऐसा कुछ खास हुआ नहीं. लोकल वेदर सिस्टम ने अल नीनो को हावी होने ही नहीं दिया. बंगाल की खाड़ी में एक के बाद एक नए सिस्टम बनते गए और देश भर में बादलों की आवाजाही बनी रही.हालांकि,मौसम के जानकारों का कहना है कि यह अल नीनो साल के अंत तक पूरी तरह से पैर पसार लेगा, जिसका सीधा असर आने वाली सर्दियों पर पड़ सकता है और ठंड का मिजाज बदल सकता है. फिलहाल की बात करें तो मौसम विभाग का कहना है कि अगले एक हफ्ते तक मानसून पूरे फॉर्म में रहने वाला है. बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर कम दबाव का क्षेत्र तैयार हो चुका है.

इसका असर यह होगा कि पूरब से लेकर उत्तर भारत और मध्य भारत के तमाम राज्यों में झमाझम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा.अगर राज्यों के हिसाब से देखें, तो उत्तर भारत में 17-18 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में जोरदार बारिश का अनुमान जताया गया है. उत्तर प्रदेश का माहौल भी काफी भीगा-भीगा रहने वाला है. पश्चिमी और पूर्वी यूपी में अगले तीन-चार दिनों तक भारी बारिश के साथ-साथ बादल गरजने और बिजली कड़कने का पूरा अंदेशा है. पहाड़ों पर भी आफत कम नहीं मानसून की रेखा अपनी जगह से थोड़ा उत्तर की तरफ खिसकी हुई है, इसलिए पहाड़ों पर भी आफत कम नहीं है. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में कई दिनों तक मूसलाधार बारिश हो सकती है, जिससे लैंडस्लाइड जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है. दूसरी तरफ, पूर्वी भारत के राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बादलों ने पूरी तरह से डेरा डाल रखा है.ओडिशा और बंगाल के कुछ हिस्सों में तेज बारिश की चेतावनी दी गई है. झारखंड और बिहार में भी अगले तीन-चार दिनों तक पानी बरसने का पूरा माहौल बना हुआ है. पूर्वोत्तर के राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड, में तो वैसे भी बारिश का लंबा दौर चलता है, और इस बार भी 22 अगस्त तक वहां रुक-रुक कर भारी बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं रहने वाले हैं. इन दोनों राज्यों में लगभग पूरे हफ्ते अच्छी-खासी बारिश होने की उम्मीद है. खासकर एमपी के कुछ इलाकों में हफ्ते के बीच में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जिससे नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं.मौसम के इस बदले मिजाज को देखते हुए मौसम विभाग ने एक बेहद जरूरी चेतावनी भी जारी की है. चूंकि समंदर में हवाएं तेज चलेंगी और लहरें ऊंची उठ सकती हैं, इसलिए मछुआरों को साफ हिदायत दी गई है कि वे फिलहाल समंदर का रुख न करें. गुजरात के तटों से लेकर बंगाल की खाड़ी, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और अंडमान के समुद्री इलाकों में जाने से बचने को कहा गया है।बिहार के सभी 38 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने तेज बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है. कुछ जिले में पूरे दिन बादलों की आवाजाही रह सकती है. इस तरह से मौसम विभाग ने आज डबल अलर्ट जारी किया है.मौसम विभाग ने पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार जिले में येलो अलर्ट जारी किया है. जबकि बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गयाजी, नवादा, जमुई और बांका में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.मौसम विभाग के पूर्वानुमान की माने तो, गयाजी, नवादा और जमुई जिले में मॉनसून का ज्यादा प्रभाव रह सकता है. जिन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, वहां के लोगों से खास तौर पर सावधानी बरतने की अपील की गई है. मौसम में बदलाव से पिछले कुछ दिनों से पड़ रही उमस वाली गर्मी से लोगों को राहत मिल सकेगी.मौसम में अचानक बदलाव को लेकर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल और ओडिशा तट के पास कम दबाव का क्षेत्र बना है. इसके साथ ही इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण ऊंचाई तक फैला हुआ है. ऐसे में इसके उत्तर और पश्चिम की तरफ आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकतीं हैं.मौसम में बदलाव की मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र है। मौसम विभाग के मुताबिक इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण ऊंचाई तक फैला हुआ है।इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने तथा अगले 24 घंटों में और मजबूत होने की संभावना है। इसके अलावा मानसून ट्रफ भी सक्रिय है, जिसके प्रभाव से बिहार में बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं।
