सऊदी,बहरीन,UAE किंग समेत ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें,ईरान लेकर रहेगा बदला

 सऊदी,बहरीन,UAE किंग समेत ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें,ईरान लेकर रहेगा बदला
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सुप्रीम लीडर ईरान का सबसे बड़ा पद है. अमेरिका ने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को मार डाला था. अब ईरान इसका बदला लेने के लिए बेताब है. टारगेट लिस्ट भी बनाई गई है जिसमें ट्रंप, इजरायली पीएम नेतन्याहू और अमेरिका के सहयोगी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के नाम शामिल हैं. लेकिन ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने सबसे अधिक अरब देशों की जमीन और एयरस्पेस का इस्तेमाल किया.अब मांग उठी है कि अरब देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भी हिट लिस्ट में शामिल किया जाए, क्योंकि अमेरिका के मददगार भी पूर्व सुप्रीम लीडर की हत्या में बराबरी के गुनहगार हैं. इससे पहले ईरान ने कहा था, पड़ोसी देशों से उनकी कोई दुश्मनी नहीं है. ईरान के टारगेट पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं. उनके निशाने पर अमेरिकी सैन्य सामान थे. लेकिन अब ईरान अपनी नीति बदलने जा रहा है.ईरान अब पड़ोसियों को निशाना बनाने के साथ ही उसकी टॉप लीडरशिप को खत्म करने की सौगंध ले रहा है. ईरान के सांसद अमीरहोसैन साबेती ने सरकार से मांग की है. हिट लिस्ट में खाड़ी देशों के शासकों को जोड़ा जाए.

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अमेरिका को जमीन देने वाले देशों के किंग को टारगेट बनाया जाए.अमेरिका ने जंग की शुरुआत में ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या कर दी थी. अब ईरान में मुज्तबा काल की शुरुआत हुई है. जिसने उसकी आक्रमकता को एक नई रफ्तार दी है. यही वजह है कि ईरान अब खुलकर हिटलिस्ट जारी करने लगा है.ईरान की हिट लिस्ट में ट्रंप का नाम टॉप पर है. और ईरान में इसे लेकर कई पोस्टर जारी हो चुके हैं. दूसरा नाम पीएम नेतन्याहू का है. लेकिन अब ईरान में नई मांग है कि अमेरिका के मददगारों के सुप्रीम नेताओं का नाम भी हिटलिस्ट में शामिल होना चाहिए. मांग है कि हिटलिस्ट में तीन राजवंश शामिल किए जाएं. जिसमें सऊदी अरब का अल सऊद राजवंश UAE का अल नाहयान राजवंश और बहरीन के अल खलीफा राजवंश है.ईरान का ये मिशन अरब देशों के खतरे का नया अलार्म है. क्योंकि खाड़ी देश खुद ट्रंप पर भरोसा नहीं कर रहे और ईरान से डील करने के रास्ते तलाश रहे हैं. लेकिन एक बार अरब देश और ईरान के बीच अदावत नए सिरे से शुरु हुई तो समीकरण बदल सकते हैं. अरब देश अपनी सुरक्षा के लिए ईरान के खिलाफ लामबंद होंगे और नए सिरे से जंग के लिए समझौते करेंगे. आपको बताते हैं कि ईरान की हिटलिस्ट में खाड़ी देशों के राजवंश को शामिल किया गया तो किन नामों को हिटलिस्ट में जोड़ा जा सकता है.बहरीन साम्राज्य का शासक शाही परिवार है, जो 1783 से लगातार बहरीन पर शासन कर रहा है. किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा बहरीन के वर्तमान किंग हैं. इनके पास ही देश की सर्वोच्च शक्तियां हैं. जबकि क्राउन प्रिंस सलमान बिन हमद अल खलीफा राजा के सबसे बड़े बेटे हैं, वो इस वक्त बहरीन के Crown Prince होने के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री भी हैं.संयुक्त अरब अमीरात में 7 अमीरात हैं, और प्रत्येक अमीरात पर एक पारंपरिक शाही परिवार का शासन है. इनमें सबसे शक्तिशाली और प्रमुख दो परिवार अल नाहयान और अल मकतूम हैं. शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान अबू धाबी के शाही परिवार से हैं इसलिए वो राष्ट्रपति हैं. जबकि शेख मोहम्मद बिन राशद अल मकतूम UAE के प्रधानमंत्री हैं.सऊदी अरब पर सऊद राजवंश का शासन है. सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद वर्तमान में सऊदी के किंग हैं. जबकि मोहम्मद बिन सलमान किंग के बेटे हैं. वर्तमान में वे सऊदी अरब के प्रधानमंत्री और वास्तविक शासक हैं. ईरान में इन्हीं तमाम लोगों को हिट लिस्ट में शामिल करने की मांग हुई है.अमेरिका के हमले रुकने और उसके हथियारों का स्टॉक खत्म की खबरें सामने आने के बाद से ईरान का हौसला बढ़ा हुआ है. ईरान शुरु ही अरब देशों से अमेरिका निष्कासन की रणनीति पर कायम कर रहा है. माना जा रहा है कि ऐसे बयानों से ईरान सऊदी अरब, कतर, UAE पर दबाव बना रहा है. ईरान खाड़ी देशों को डराने की रणनीति आगे बढ़ा रहा है. ईरान की कोशिश खाड़ी देशों को अमेरिका से दूर करने की है. इस बार सीधे तौर पर ईरान ने खाड़ी देशों की टॉप लीडरशिप को टारगेट किया है. ताकि अमेरिका से दूरी बढ़ाने का दबाव और बढ़ सके.अरब देशों वर्षों से सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहे हैं लेकिन अब हथियारों का स्टॉक खत्म होने के बाद से अरब अपनी सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद हैं. ईरान इस वक्त बहुत अलर्ट है. क्योंकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर ने अरब का दौरा किया है. सेंट्रल कमांड के कमांडर ने 6 देशों के सैन्य प्रमुखों से मिल चुके हैं. एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन का भी दौरा किया गया.ट्रंप ने भी सीक्रेट मीटिंग करके ईरान की फिक्र बढ़ाई है. ईरान को आशंका है कि अमेरिका फिर ईरान पर हमले की तैयारी में है. ईरान जानता है कि अगर फिर ईरान पर हमला किया गया तो अमेरिका खाड़ी देशों की जमीन को इस्तेमाल करेगा. इस बीच कतर के साथ ईरान का नया विवाद शुरु हो गया है. ईरान आरोप लगा रहा है कि मार्च से अब तक कतर ने उसके तीन पायलट्स को कैद करके रखा हुआ है.दरअसल, ईरान ने 2 मार्च को कतर में हमला किया था. 2 सुखोई विमानों ने अल-उदैद एयरबेस पर हवाई हमला किया था. इस हमले के दौरान अमेरिकी बेस पर तैनात एयर डिफेंस और रडार नाकाम रहे क्योंकि दोनों फाइटर जेट काफी नीचे उड़ान भर रहे थे. ईरानी विमानों से बेस पर बमबारी की गई. इस हमले के दौरान ही कतर से F-15 जेट ने टेकऑफ किया ईरान के दोनों सुखोई 24 जेट को निशाना बनाया. F-15 के हमले की वजह से ईरान के दोनों फारस की खाड़ी के करीब क्रैश हो गए.ईरान का दावा है कि दोनों जेट में सवाल चारों पायलट हमले के दौरान जेट से निकल गए थे. बाद में एक पायलट का शव मिला था. कतर ने इसकी सूचना ईरान को दी थी. लेकिन अब ईरान दावा कर रहा है कि बाकी के 3 पायलट को कतर ने कैद करके रखा है और इसकी जानकारी नहीं दी गई है. यही कतर और ईरान के बीच नए तनाव की वजह है.कतर ने ईरान के आरोपों को खारिज कर दिया है. कतर ने दावा किया है कि उसने ईरान के किसी पायलट को बंदी बनाकर नहीं रखा है. इस बीच रिपोर्ट है कि अरब देश अमेरिका की हालत को लेकर फिक्रमंद हैं. अरब देशों की चिंता की वजह ट्रंप का बैकफुट पर जाना है. अमेरिका सरकार की कोई ठोस रणनीति नजर नहीं आ रही. ईरान की धमकियों को लेकर अमेरिका का कोई एक्शन नहीं है. कुछ देशों ने अमेरिकी सैन्य अड्डों को हटाने पर विचार शुरु कर दिया है.इस्लामिक देश अब NATO की तर्ज पर अलग ग्रुप बनाने की योजना पर भी काम कर रहे हैं. इस्लामिक NATO के नाम से चर्चित रक्षा ढांचा असल में सऊदी अरब से बनने वाला एक ऐतिहासिक सैन्य और रणनीतिक गठजोड़ है. 7 अगस्त को सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान में डील हुई है. तीनों देशों मक्का रक्षा समझौते के नाम से नई डील की है. किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर प्रहार माना जाएगा. NATO के आर्टिकल 5 की तर्ज पर इस समझौते के नियम हैं कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला होने पर तीनों देश मिलकर मुकाबला करेंगे.

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