बिहार के डीजीपी ने क्यों करने लगे आत्मरक्षा का जिक्र?भरत तिवारी मामले में फिर से आया नया मोड़!

 बिहार के डीजीपी ने क्यों करने लगे आत्मरक्षा का जिक्र?भरत तिवारी मामले में फिर से आया नया मोड़!
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बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला एक बार फिर चर्चा में है. सरकार की ओर से परिवार के लिए मुआवजे और सरकारी नौकरी का ऐलान होने के बाद अब पुलिस की भूमिका को लेकर नया सवाल खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार को मदद देने की घोषणा की. सरकार के इस कदम को मामले में जवाबदेही की दिशा में अहम माना जा रहा है. इससे पहले घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठते रहे हैं और जांच की मांग भी तेज हुई थी.मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान के करीब 24 घंटे बाद बिहार के डीजीपी का बयान इस पूरे मामले को फिर से चर्चा में ले आया है. डीजीपी ने कहा कि पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलाने का अधिकार है. साथ ही उन्होंने साफ किया कि मामले की जांच अभी जारी है और यह देखा जा रहा है कि कहीं पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल तो इस्तेमाल नहीं किया.

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यानी एक तरफ सरकार अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर परिवार को मुआवजा और नौकरी देने की बात कर रही है, वहीं पुलिस की ओर से कार्रवाई के दौरान आत्मरक्षा के अधिकार की बात सामने आ रही है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भरत तिवारी के एनकाउंटर में पुलिस की कार्रवाई को लेकर जांच में क्या सामने आएगा?मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार के लिए बड़ी घोषणा की है. उन्होंने परिवार को मुआवजा देने और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया. सरकार का यह फैसला एनकाउंटर को लेकर उठे सवालों के बीच आया है. मामले की न्यायिक जांच अभी जारी है. सरकार का कहना है कि अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया है. अब अंतिम जांच रिपोर्ट से यह साफ होगा कि एनकाउंटर के दौरान पुलिस की कार्रवाई नियमों के मुताबिक थी या नहीं. वहीं, डीजीपी ने आत्मरक्षा में गोली चलाने को पुलिस का अधिकार बताया है.डीजीपी ने पुलिस की कार्रवाई के दूसरे पहलू की ओर ध्यान दिलाया. उनका कहना है कि अगर पुलिसकर्मियों को अपनी जान का खतरा हो तो आत्मरक्षा में गोली चलाना पुलिस का अधिकार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है. जांच में यह देखा जा रहा है कि पुलिस ने परिस्थिति के हिसाब से जितना बल जरूरी था, उतना ही इस्तेमाल किया या उससे ज्यादा बल का प्रयोग हुआ.हालांकि,घोषणा के बाद भरत तिवारी की मां आशा देवी ने कहा कि परिवार के लिए सबसे पहले न्याय जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पहले इस मामले में संलिप्त लोगों की गिरफ्तारी होनी चाहिए और उन्हें फांसी की सजा मिलनी चाहिए। इसके बाद ही परिवार बैठकर सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता को लेकर आगे का निर्णय करेगा।मालूम हो कि बीते गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर कहा था कि न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार दिवंगत भरत तिवारी के पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। साथ ही, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी बात कही गई है।गौरतलब है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में जून महीने में पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी को गोली लगी थी। पुलिस का दावा था कि भरत तिवारी अवैध हथियार लेकर मौजूद थे और उन्होंने पुलिस पर फायरिंग करने का प्रयास किया था। इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उन्हें गोली लगी। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई थी।घटना के बाद भरत तिवारी के सोशल मीडिया पर किए गए फेसबुक लाइव वीडियो को लेकर पुलिस के दावे पर सवाल उठे थे। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप था कि वीडियो में भरत तिवारी पुलिस के सामने सरेंडर करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे थे और उन्होंने अपनी पिस्टल पुलिस की ओर फेंक दी थी।इसके बाद परिवार की ओर से इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। भरत तिवारी बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार आवाज उठाते थे। मामले को लेकर परिजनों और समर्थकों की ओर से लंबे समय से न्याय की मांग की जा रही थी।

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