वंदे मातरम् बिल पास होते हीं अब गरमा गए ओवैसी,देशभक्ति को लेकर RSS को दिखाया आईना
संसद ने गुरुवार को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी. राज्यसभा में बुधवार (29 जुलाई) को पारित होने के बाद लोकसभा ने भी हंगामे के बीच ध्वनिमत से इसे पास कर दिया. अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा.इस संशोधन से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी वही कानूनी संरक्षण मिल जाएगा जो अभी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान को प्राप्त है. संसद के दोनों सदनों से पास किए गए राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 के अनुसार जानबूझकर वंदे मातरम का गायन रोकने या किसी सभा में इसके गायन के दौरान व्यवधान पैदा करने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.इसमें दोबारा अपराध पर न्यूनतम एक साल की सजा का भी प्रावधान है. बिल गायन को अनिवार्य नहीं बनाता, बल्कि जानबूझकर बाधा डालने को अपराध बनाता है.

सरकार ने बिल के उद्देश्यों में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बयान का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान सम्मान मिलेगा.यह कदम वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के वर्ष में उठाया गया है. ये विधेयक बुधवार को राज्यसभा से पारित किया गया था और गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच पास कर दिया गया.इस विधेयक पर एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ा विरोध जताया है. एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि, “वंदे मातरम में देवी-देवताओं की पूजा की बात है, यह संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 का उल्लंघन करता है. जन गण मन लोगों और देश के बारे में है. वंदे मातरम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में नहीं है. उन्होंने कहा कि, राजेंद्र प्रसाद ने बिना किसी प्रस्ताव के इसे राष्ट्रीय गीत बना दिया, यह गलती थी.ओवैसी ने कहा, “राष्ट्रीय गीत की कोई परिभाषा नहीं है. मैं किसी और की प्रार्थना नहीं करूंगा, नहीं तो मुसलमान नहीं रहूंगा.” ओवैसी ने कहा कि, आरएसएस अंग्रेजों के लिए सैनिक इकट्ठा कर रहा था और उन्होंने इसे कभी पढ़ा भी नहीं. ओवैसी ने यह भी कहा कि जन गण मन में देश और जनता दिखती है, जबकि वंदे मातरम में भगवान और देवी की पूजा की बात है. उन्होंने उन मुजाहिदीन-ए-आजादी यानी स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र किया जिन्होंने देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी.वहीं, इसके विरोध का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का जवाब देते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि यह भारत की स्वतंत्रता और पहचान से जुड़ा है. विरोध करना उचित नहीं. उन्होंने कहा, “प्रोटेस्ट हर किसी का अधिकार है, लेकिन वंदे मातरम के खिलाफ प्रोटेस्ट, जो भारतीय स्वतंत्रता का अभिन्न अंग है… इसकी जितनी आलोचना हो उतनी कम है.”उन्होंने बिल को भारत की आजादी और पहचान से संबंधित बताया तथा विरोध को अनुचित करार दिया. विपक्ष के कुछ दलों, खासकर अन्नाद्रमुक ने इसे हिंदुत्व एजेंडा बताया और हंगामा किया. लोकसभा में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बिल पेश किया और कहा कि यह भारतीय गौरव के लिए है, किसी राज्य या विचारधारा के खिलाफ नहीं. सरकार सभी राज्यों और उनकी भाषाई अस्मिता का सम्मान करती है. बिल अब राष्ट्रपति के पास जाएगा. लागू होने के बाद वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी सुरक्षा मिल जाएगी.
