राहुल के इल्जाम पर सत्ता पक्ष दिखी आक्रामक,क्या सच में शिक्षा व्यवस्था पर RSS का कब्जा है?

 राहुल के इल्जाम पर सत्ता पक्ष दिखी आक्रामक,क्या सच में शिक्षा व्यवस्था पर RSS का कब्जा है?
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छात्र आंदोलन, हिंसा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026 आज लोकसभा से पास हो गया. पेपर लीक के खिलाफ मौजूदा कानून को कड़ा बनाने के लिए ये संशोधन बिल लाया गया, जिसपर मंगलवार को दोपहर 2 बजे से चर्चा की शुरुआत हुई और 10 घंटे की बहस के बाद सदन ने इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया. इन 10 घंटों की चर्चा में सबसे बड़ा विस्फोट नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के बाद हुआ. बिल के पास होने से ज्यादा चर्चा उनकी स्पीच की है.राहुल ने अपने शुरुआती भाषण में पैलेट गन और बल प्रयोग जैसे कई शब्द इस्तेमाल किए. इसके अलावा उन्होंने गृहमंत्री की सदन में अनुपस्थिति को लेकर भी टिप्पणी की, जिसके बाद एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल पूरी तरह बदल गया. तभी से पक्ष-विपक्ष आमने सामने हैं और जुबानी फायरिंग भी खूब हो रही है. राहुल जब बोलने आए तो छात्रों से हुई बातचीत के आधार पर उन्होंने व्यक्तियों की कुछ कैटेगरी भी बताई, जिनमें अंधभक्त जैसे शब्द थे. यहीं से विवाद शुरू हुआ.संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू खड़े हुए और उन्होंने राहुल को टोका तो नेता प्रतिपक्ष बैठ गए. फिर स्पीकर के दखल के बाद राहुल गांधी ने फिर से अपना भाषण शुरू किया. इस दौरान राहुल ने एक बार फिर अपनी बात दोहराई. हालांकि उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन सत्ता पक्ष उनका इशारा शायद समझ रहा था, इसलिए एक बार फिर से माहौल गरमा गया. राहुल एक बार फिर बैठ गए.

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कुछ देर तक भाषण रुका रहा, तो इस बार सदन में उप नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मोर्चा संभाला और पलटवार किया.सबसे ज्यादा विवाद तो तब शुरू हुआ जब राहुल ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना शुरू किया. लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गन और गोली चलाने की अनुमति देने को लेकर सीधे सरकार से सवाल पूछा. उन्होंने गृह मंत्री के सदन में नहीं आने पर भी कटाक्ष किया.राहुल गांधी के इल्जाम पर सत्ता पक्ष पूरी तरह आक्रामक हो गया. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए राहुल से माफी की मांग पर अड़ गए, लेकिन राहुल अपने बयान पर अड़े रहे और गरमा-गरमी के बीच सदन को स्थगित करना पड़ गया.राहुल गांधी के भाषण के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें करीब 7 बार टोका, जबकि स्पीकर ओम बिरला ने 11 से ज्यादा बार टोका और नेता प्रतिपक्ष हंगामे के दौरान थोड़ा-थोड़ा ब्रेक लेकर सरकार पर लगातार बरसते रहे. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर RSS के कब्जे का आरोप लगाया और ये भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री नहीं बल्कि सिर्फ एक प्रतीक थे. राहुल ने शिक्षा व्यवस्था को क्रूर और खराब बताया. राहुल के इस बयान पर सत्ता पक्ष के लोग हंगामा करने लगे.वहीं, स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन में अच्छी मर्यादा बनाने की कोशिश करनी चाहिए. जो तर्क से बोलता है, देश उसकी सुनता है और सम्मान भी करता है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि जिस असंसदीय शब्द का प्रयोग हमारे नेता प्रतिपक्ष ने किया है, उसे कार्रवाई से निकाल दिया जाए. मैं आप सभी से ये अपील करता हूं कि आप शांति से उनकी बात सुनें. हालांकि हंगामे के वजह से नेता प्रतिपक्ष का भाषण पूरा नहीं हो पाया. कुछ देर के लिए लोकसभा स्थगित रही और इस दौरान संसद भवन में हलचल तेज हो गई. पक्ष और विपक्ष के साथ मीटिंग का दौर भी शुरू हो गया, जिसमें सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध दूर करने की कोशिश हुई.संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू संसद भवन में गृह मंत्री अमित शाह से मिले.इसके बाद रिजिजू विरोध दर्ज कराने के लिए स्पीकर के पास गए.उनके निकलते ही कांग्रेस से प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और गौरव गोगोई स्पीकर से मिलने पहुंचे.उनके आने के बाद स्पीकर ने दोबारा किरेन रिजिजू को बुलाया.उन्होंने कांग्रेस सांसदों के सामने स्पीकर से कहा कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री का नाम लेकर गोली चलाने का आदेश देने का आरोप लगाया है.रिजिजू ने कहा कि ये बहुत संवेदनशील मामला है और इस तरह की गैरजिम्मेदार बात नहीं की जानी चाहिए.इसपर कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट रूप से इनकार किया और कहा कि राहुल गांधी को अपना भाषण पूरा करने दिया जाए.फिर रिजिजू ने स्पष्ट कहा कि अगर राहुल गांधी माफी नहीं मांगेंगे तो सदन नहीं चल सकता.इसके बाद रिजिजू ने अमित शाह से मिल कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. हालांकि इस दौरान सत्ता पक्ष और कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों के भाषण बाकी थे. इसके बावजूद भी ये तय हुआ कि चर्चा का जवाब देकर बिल को पारित करवा लिया जाए. इसी रणनीति के तहत दोपहर 3 बजे सदन शुरू होते ही केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जवाब देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने प्रियंका और राहुल के आरोपों पर तीखा जवाब दिया.जितेंद्र सिंह ने कहा कि शायद इनको काफिले की गाड़ियों की गिनती करने में भी दिक्कत है. इन्होंने कभी काफिला देखा ही नहीं. 30 गाड़ियां कभी भी गृह मंत्री के साथ नहीं चलतीं. तथ्यों के बिना, सत्य के बिना गैर जिम्मेदारी से इस सदन में बात कह देना और फिर कह कर निकल जाना, ये किसी नेता या प्रतिपक्ष का व्यवहार हो ही नहीं सकता. हालांकि, हंगामे के बीच बिल पास कर दिया गया.इस दौरान दिनभर के टकराव के बाद संसद की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित हो गई, लेकिन सियासी लड़ाई संसद से बाहर भी जारी रही. कांग्रेस ने बाहर निकलने के बाद भी सरकार से सवाल पूछा. छात्र आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सफाई मांगी तो सरकार ने विपक्ष के मुद्दों को तथ्यहीन और बेबुनियाद बताया. वहीं, लोकसभा में राहुल गांधी का भाषण अधूरा रह गया तो बाहर निकलने के बाद उन्होंने अपनी पूरी बात रखी. कांग्रेस मुख्यालय में शाम 6 बजे आधे घंटे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कुछ स्लाइड्स के जरिए प्रेजेंटेशन दिया.राहुल ने छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई की कुछ तस्वीरें दिखाईं. इनमें पैलेट गन के जख्म, कील वाली लाठी, महिलाओं से बदसलूकी और सादे कपड़ों में पिटाई करते लोग दिखाए गए. राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने गृह मंत्रालय को छात्रों के खिलाफ हुए एक्शन पर चिट्ठी भी लिखी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में छात्रों पर हुई कार्रवाई की जांच की मांग की. वहीं, उनकी मीडिया ब्रीफिंग के तुरंत बात बीजेपी ने भी जवाब दिया और उनसे कुछ सवाल पूछे.बीजेपी की ओर से सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस वालों से गृहमंत्री जी बात कर रहे थे, वो लगातार बात कर रहे थे, आपने देखा था क्या? क्या आप उनके ऑफिस में बैठे थे? कहां देखा? बताइए जरा. पैलेट गन चलाने के राहुल के दावे को खारिज करते हुए बीजेपी ने कहा कि एसडीएम और डिवीजनल मजिस्ट्रेट स्थानीय स्थिति के हिसाब से फैसला लेता है, ये उन्हें पता भी नहीं. जब छात्रों पर पैलेट गन चली ही नहीं तो फिर आदेश कौन दिया, इसका सवाल ही नहीं उठता है. राहुल गांधी के सदन में दिए बयान पर बीजेपी की बस एक ही मांग है कि राहुल गांधी माफी मांगें.

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