Gen-Z अब राजनीति में दिखाएंगे अपनी शक्ति,Akhilesh Yadav को यूपी चुनाव में करेंगे मदद?
जेन-जी की ताकत दुनिया ने देखी। अब इससे चौकन्ने हो रहे राजनीतिक दल नए सिरे से अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। उनकी प्राथमिकता सूची में अब इंस्टाग्राम जैसा युवाओं में बेहद लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम है।18 से 29 साल के छात्रों,प्रोफेशनल्स व बेरोजगारों से खुद को ज्यादा प्रभावी तरीके से जोड़ने पर फोकस बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों युवाओं को संबोधित अपने तीन वीडियो संदेश इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए। अब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अपने अभियान में इसी के जरिए युवाओं के बीच पैठ और बढ़ाएगी। साथ ही विरोधियों के हमलों पर जवाब भी देगी। भाजपा को संदेश दिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म में जहां युवा सबसे ज्यादा सक्रिय हैं, वहां अपनी बात पहुंचाएं।समाजवादी पार्टी अब ‘जेन-जेड संवाद’ शुरू कर रही है। यह सपा के विजन इंडिया अभियान का विस्तार माना जा रहा है। कांग्रेस भी युवाओं से जुड़ने का विशेष अभियान तय करने जा रही है। वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी उपाध्यक्ष आकाश आनंद को युवाओं से जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी दी है।

जेन-जी की ताकत को पार्टियों ने तब ही भांपना शुरू कर दिया जब जंतर-मंतर से लेकर देश के दूसरे हिस्सो में युवाओं का आंदोलन तेजी से आगे बढ़ रहा था। दलों को इससे संदेश मिला कि युवा अपने मुद्दों पर मुखर हैं और उनका वोट राजनीतिक रुझान से उलट हो सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रणनीति के तहत प्रदर्शन को फैलने से रोका, वहीं सपा, कांग्रेस व अन्य पर छात्रों को भड़काने का आरोप लगाया। उधर, सपा सांसद डिंपल यादव धरना स्थल पर पहुंच प्रदर्शकारियों की मदद करती दिखीं।दिल्ली बीजेपी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव बब्बर ने कहा कि Gen-Z ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से अधिक सख्त कार्रवाई की मांग की थी. उनका कहना है कि सरकार पहले से ही इस मामले को लेकर संवेदनशील थी, लेकिन युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया गया और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार शुरू किए गए.उन्होंने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए विशेष कानून बनाया गया, जिसमें 3 से 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा अगले दो वर्षों में परीक्षा प्रणाली को डिजिटल बनाने, परीक्षा केंद्रों और ट्रांसपोर्टेशन की निगरानी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स लगाने, फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और नंदन जी की अध्यक्षता में परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए समिति गठित करने जैसे कदम उठाए गए हैं.राजीव बब्बर ने कहा कि पेपर लीक के बाद महज 27 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा कराई गई और करीब 11.5 लाख छात्र सफल हुए. उनके मुताबिक, यह दिखाता है कि सरकार ने पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ संभाला. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अनुभव में भले कम हो, लेकिन यदि उसकी मांग उचित हो तो उसे स्वीकार करना चाहिए. यही लोकतंत्र की ताकत है और सरकार ने उसी भावना के साथ युवाओं की बात सुनी.राजीव बब्बर का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नई पीढ़ी से संवाद कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री की रील को 392 मिलियन व्यू मिलना इस बात का संकेत है कि Gen-Z उनसे जुड़ाव महसूस करती है. उनके अनुसार, प्रधानमंत्री युवाओं की भावनाओं को समझते हैं और हर पीढ़ी के बीच संवाद का अंतर कम करने का प्रयास कर रहे हैं.प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि पिछले 27-28 दिनों की घटनाओं ने परिवारों और समाज के सामने भी नई चुनौती रखी है. उनका कहना है कि अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना होगा, उनकी सोच को समझना होगा और उनकी अभिव्यक्ति की शैली पर भी सकारात्मक मार्गदर्शन देना होगा.उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पहले से अधिक जागरूक है,लेकिन जागरूकता के साथ जिम्मेदारी और शालीनता भी उतनी ही आवश्यक है. समाज को Gen-Z की ऊर्जा और उनकी अपेक्षाओं को समझते हुए सही दिशा देने की जरूरत है।
