प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR नहीं होंगे वापस!सरकार के खिलाफ फिर से उतरेंगे छात्र

 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR नहीं होंगे वापस!सरकार के खिलाफ फिर से उतरेंगे छात्र
Sharing Is Caring:

एक तरफ बिहार सरकार राज्य में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, तो दूसरी तरफ अब यह सामने आया है कि सरकार के सभी विभागों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के कांड शिक्षा विभाग से ही जुड़े हैं. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अलग-अलग विभागों में दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों की पूरी सूची तैयार कर संबंधित विभागों को सौंप दी है और इस सूची ने सरकारी तंत्र के भीतर फैले भ्रष्टाचार की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निगरानी विभाग ने राज्य के सभी प्रशासनिक विभागों के साथ-साथ सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को 30 जून 2026 तक दागी पदाधिकारियों की पूरी सूची उपलब्ध करा दी है. इस सूची में संबंधित पदाधिकारी-कर्मी पर दर्ज कांड और उनके खिलाफ समर्पित आरोप-पत्रों तक की पूरी जानकारी दी गई है. दरअसल यह कोई एकबारगी कवायद नहीं है. निगरानी विभाग हर साल जनवरी और जुलाई महीने में, यानी साल में दो बार, सभी प्रशासी विभागों को उनके यहां के दागी अधिकारियों-कर्मचारियों की अद्यतन सूची भेजता है, ताकि प्रमोशन और तैनाती जैसे फैसलों में जवाबदेही तय की जा सके.इस सूची के जारी होने के बाद एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी हुआ है.

1000798135

अब बिहार सरकार के विभिन्न विभागों, प्रमंडल और जिला कार्यालयों को अपने पदाधिकारियों-कर्मियों की पदोन्नति के लिए हर बार अलग से निगरानी विभाग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी. विभाग खुद अपने यहां की सूची के आधार पर फैसला ले सकेंगे, जिससे प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन साथ ही सवाल यह भी उठता है कि क्या इससे जवाबदेही कमजोर तो नहीं पड़ेगी।निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पत्र के मुताबिक, अभी तक कुल 5,136 मामले दर्ज हैं और इनमें सबसे ज्यादा 988 कांड अकेले शिक्षा विभाग से जुड़े हैं. यानी हर पांचवां भ्रष्टाचार का मामला किसी न किसी रूप में शिक्षा विभाग से निकलता है. खास बात यह है कि इन मामलों में सिर्फ स्कूली शिक्षक ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों के कुलपति और गैर-शैक्षणिक पदाधिकारी व कर्मचारी तक आरोपित हैं. यानी भ्रष्टाचार का यह जाल स्कूल स्तर से लेकर उच्च शिक्षा के सबसे बड़े पदों तक फैला हुआ है.शिक्षा विभाग के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सबसे ज्यादा 545 पदाधिकारी और कर्मचारी निगरानी के मामलों में आरोपी पाए गए. इसके बाद पंचायती राज विभाग में 348, बिहार पुलिस में 288, सामान्य प्रशासन विभाग में 251 और स्वास्थ्य विभाग में 187 कर्मचारियों पर मामले दर्ज हैं. वहीं ग्रामीण विकास विभाग में 145, नगर विकास विभाग में 140, जल संसाधन विभाग में 124, पथ निर्माण विभाग में 84 और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में 82 पदाधिकारी एवं कर्मचारी निगरानी के मामलों में आरोपी हैं.इसके अलावा इन सरकारी पदाधिकारियों-कर्मियों के साथ ही 727 निजी व्यक्तियों पर भी निगरानी ब्यूरो में मामले दर्ज हैं, जो किसी न किसी सरकारी भ्रष्टाचार के मामले में सह-आरोपी के तौर पर जांच के दायरे में हैं. यह आंकड़े साफ बताते हैं कि भ्रष्टाचार सिर्फ किसी एक विभाग या स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य प्रशासन के लगभग हर बड़े महकमे में किसी न किसी रूप में मौजूद है, लेकिन तादाद के लिहाज से शिक्षा विभाग बाकी सबसे कहीं आगे है.सिर्फ पद और नौकरी के दुरुपयोग तक ही बात सीमित नहीं है, निगरानी ब्यूरो ने इससे पहले ही महीने की शुरुआत में भ्रष्टाचार से बनाई गई संपत्तियों पर भी कार्रवाई तेज कर दी है. ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार के मुताबिक, भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों की करीब 102 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, जिसमें से करीब 32 करोड़ रुपये की संपत्ति की अंतिम जब्ती पूरी की जा चुकी है. सजा दिलाने की दर में भी सुधार हुआ है. जहां पहले हर साल औसतन करीब साढ़े पांच आरोपितों को ही सजा मिल पाती थी, वहीं साल 2025 में 30 आरोपितों को दोषी करार दिया गया, और इस साल अब तक 10 मामलों में सजा सुनिश्चित हो चुकी है.कुल मिलाकर, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की यह सूची बिहार के सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की स्थिति की एक तस्वीर पेश करती है. शिक्षा विभाग, जो सीधे लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़ा है, 988 मामलों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर है. सरकार ने पदोन्नति प्रक्रिया में बदलाव और भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन इन 5,136 मामलों में कार्रवाई कितनी तेज और प्रभावी होती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

Comments
Sharing Is Caring:

Related post