शरद पवार की एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद छिड़ी बहस,एनडीए का जल्द बनेंगे हिस्सा

 शरद पवार की एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद छिड़ी बहस,एनडीए का जल्द बनेंगे हिस्सा
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महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से सियासी हलचल तेज है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े नेताओं की मुलाकातों का दौर जारी है. इस बीच बीजेपी ने एनसीपी के दोनों धड़ों को बड़ा ऑफर दिया है. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि एनसीपी के दोनों धड़े विलय करने के बाद ही एनडीए में शामिल हों. एनसीपी (शरद पवार) को अलग से एनडीए में लेने के बजाय विलय पर जोर दिया है. परिसीमन बिल पर एनसीपी (एसपी) के नरम रुख और समर्थन की संभावना के बीच बीजेपी ने ये बात क्लियर की है.सूत्रों का कहना है कि एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय हो तो दोनों धड़ों से एक-एक मंत्री पद बाद में दिया जा सकता है. शरद पवार गुट के लोकसभा में आठ और राज्यसभा में एक सांसद है.

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परिसीमन बिल पारित कराने के लिए इन 9 सांसदों का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण है. हालांकि, शरद गुट के एनडीए को समर्थन की अटकलों से सुनेत्रा पवार असहज बताई जा रही हैं.हाल में शरद पवार की एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद इन अटकलों ने जोर पकड़ा है. उधर, राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. चर्चा है कि एनसीपी नेता जयंतराव पाटिल राज्य के नए वित्त मंत्री बन सकते हैं. पिछले दस दिनों से राज्य की राजनीति में हलचल मची हुई है. जयंतराव पाटिल और विनोद तावड़े की मुलाकात की.इसके बाद वरिष्ठ नेता शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात, जयंतराव की प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के साथ वार्षिक बैठक और अंत में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की बैठक, इन घटनाओं के क्रम से नए राजनीतिक समीकरण की रूपरेखा स्पष्ट हो रही है. एकनाथ शिंदे की बैठक के बाद, ऐसा माना जा रहा है कि जयंतराव पाटिल के वित्त मंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है.इस नए राजनीतिक घटनाक्रम के चलते आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि बीजेपी ने एक ही झटके में कितने विकेट लिए हैं. इसे दोनों एनसीपी के साथ आने की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है. यह भी माना जा रहा है कि संसद में अटके महत्वाकांक्षी विधेयकों को अंतिम रूप देने का काम पूरा हो गया है. पिछले दस दिनों में शरद पवार और अजीत पवार की राष्ट्रवादी पार्टी, बीजेपी और शिवसेना से करीबी लगातार उजागर होती रही है.इस पर बहस भी हुई है. वित्त विभाग को कुशलतापूर्वक संभालने वाले नेता की तलाश करने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि चेहरा तो मौजूद था लेकिन विचारों की समस्या थी. सूत्रों ने बताया है कि इसी समस्या को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसी के चलते दोनों राष्ट्रवादी दलों के विलय को नई गति मिली है.

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