एथनॉल वाली फैसला से घिर गई भाजपा सरकार,गडकरी के बयान से संतुष्ट नहीं है जनता
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल की आलोचना करने वालों को चुनौती देते हुए एक बड़ा बयान दिया है.गडकरी ने कहा, “जब हमने मक्के से एथनॉल बनाने का फैसला किया, तो मक्के की बाजार कीमत ₹1,200 प्रति क्विंटल थी, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹1,800 प्रति क्विंटल था. इस फैसले के बाद, मक्के की कीमत बढ़कर ₹2,800 प्रति क्विंटल हो गई.” उन्होंने आगे कहा, “उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को ₹45,000 करोड़ का अतिरिक्त फायदा हुआ.”सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ज्यादा एथनॉल-मिश्रित ईंधन और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने के लिए गाड़ियों से होने वाले उत्सर्जन के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. इस कदम का मकसद सभी कैटेगरी की गाड़ियों के लिए ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ गाड़ियों और पूरी तरह से बायोफ्यूल पर चलने वाली गाड़ियों का रास्ता साफ करना है.सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में प्रस्तावित बदलावों का मकसद E85 (पेट्रोल में 85% एथनॉल मिला हुआ) और E100 (गाड़ियों को लगभग शुद्ध इथेनॉल पर चलाने में सक्षम बनाने वाला) जैसे ईंधनों के साथ-साथ ही B100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-CNG मिश्रण के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.

नवराष्ट्र के मुताबिक, ‘विकसित भारत’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला और पेट्रोल) पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है. इससे ईंधन आयात पर सालाना ₹22 लाख करोड़ खर्च होते हैं और पर्यावरण को भी खतरा होता है. इसलिए, देश की प्रगति के लिए स्वच्छ ऊर्जा अपनाना बहुत जरूरी है.उन्होंने कहा, “E20 पेट्रोल के कारण कार में समस्या आने का एक भी मामला सामने नहीं आया है. क्या देश में कोई ऐसी कार है जिसे E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई दिक्कत हुई हो? बस एक का नाम बताइए.” गडकरी ने कहा कि ज्यादा एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और आरोप लगाया कि यह अभियान कुछ खास हितों वाले लोगों द्वारा चलाया जा रहा है.असल में, भारत ने पहले ही 20% एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है. इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है. एथनॉल का उत्पादन गन्ने, मक्के या चावल जैसे बायोमास स्रोतों से किया जाता है. जहां भारत में गाड़ी मालिकों के पास पेट्रोल पंप पर अलग-अलग तरह के ईंधन चुनने का विकल्प नहीं होता, वहीं ब्राजील में ग्राहक अलग-अलग कीमतों पर ईंधन चुन सकते हैं. ब्राजील के कानून में ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन मिश्रण के लिए कीमत में छूट का प्रावधान है.इस आरोप पर कि उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियां एथनॉल उत्पादन से जुड़ी हैं. और इसलिए वे ज्यादा एथनॉल वाले पेट्रोल को बढ़ावा दे रहे हैं. इस पर केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भले ही उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें हैं, लेकिन उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं. उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल की अधिकता है.समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पिछले दिनों लखनऊ में आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े लोगों ने मक्का की खरीद कर कीमतों को प्रभावित किया. कहा कि बीजेपी से जुड़े लोगों की करतूत से किसानों को मक्के की उचित कीमत नहीं मिल पा रही है. आरोप लगाया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उन्होंने कहा कि देशभर से शिकायतें आ रही हैं. उत्तर प्रदेश के किसान हर रोज अपनी दर्द बता रहे हैं. किसानों के साथ आम लोगों का कहना है कि एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से गाड़ी के इंजन खराब हो रहे हैं, इससे माइलेज कम हो रहा है. गाड़ियों का रख रखाव महंगा हो गया है.एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को कांग्रेस और सपा भले ही चुनावी रंग देने की कोशिश में है, लेकिन राजनीतिक रूप से देखें तो इसके दो पहलू समझ में आते हैं. एथेनॉल पूरी तरह से किसानों को फायदा पहुंचाने वाला प्रोडक्ट है. यह गन्ना और मक्के से तैयार होता है, नितिन गडकरी लगातार दावा कर रहे हैं कि किसानों की आमदनी इससे जबरदस्त तरीके से बढ़ी है. ऐसे में अगर सपा और कांग्रेस इसेयूपी चुनाव में राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करती है तो इससे बैकफायर का भी डर बना रहेगा. यूपी में गन्ना और मक्के की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है. वहीं सपा और कांग्रेस को ज्यादातर गांव कस्बों से ही वोट मिलते रहे हैं।कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ये लूट की छूट दे रहे हैं. इन्होंने कहा था एथेनॉल मिक्स E20 आप दीजिए और इंजन वैसा दीजिए और एथेनॉल का रेट आप रख दीजिए ₹50. नितिन गडकरी ने तो कहा था एथेनॉल मिक्स पेट्रोल जो है ₹15 लीटर में हम देंगे. लेकिन ₹110 लीटर में दे रहे हैं. प्रीमियम पेट्रोल ₹150 ₹170 रुपये दे रहे हैं. उसके बाद एथेनॉल मिक्स पेट्रोल की तुलना पाकिस्तान के प्रीमियम पेट्रोल से करेंगे. पाकिस्तान में इतना महंगा, हिंदुस्तान में इतना सस्ता. तो इस तरीके की ये जो बौद्धिक जुगाली करते हैं, बौद्धिक दरिद्रता दिखाते हैं. यह बड़ी खराब चीज है।
