तेल के रेट में आई भारी गिरावट,जनता की टेंशन हुई कम!
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे महीने गिरावट देखने को मिली. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार जून और दूसरी तिमाही में कच्चे तेल के दाम साल 2020 में कोविड के दौरान के बाद सबसे ज्यादा गिरे हैं. निवेशक चार महीने से चल रहे वॉर के बीच दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत पर नजर रखे हुए हैं, जबकि इस दौरान एक अस्थाई युद्धविराम भी लागू है. ब्रेंट फ्यूचर्स 23 सेंट या 0.3% गिरकर 72.92 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.25 डॉलर या 1.8% गिरकर 69.50 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ.अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट फ्यूचर्स मंगलवार को एक्सपायर हो गए और उनकी जगह सितंबर कॉन्ट्रैक्ट ने ले ली, जो लगभग $73.31 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. दोनों क्रूड बेंचमार्क उसी स्तर के आस-पास थे जहां वे 27 फरवरी को ट्रेड कर रहे थे – यानी ईरान पर US-इज़राइली वॉर शुरू होने से एक दिन पहले – जब ब्रेंट 72.48 डॉलर प्रति बैरल और WTI 67.02 डॉलर पर बंद हुआ था.

UBS के एनालिस्ट जियोवानी स्टौनोवो ने कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि मार्केट ने रिस्क प्रीमियम को हटा दिया है, लेकिन खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाजों की संख्या बढ़ने से पहले फंसे हुए जहाज उपलब्ध हो गए हैं, जिससे नई सप्लाई की एक अस्थायी लहर पैदा हुई है. मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि अब उसका अनुमान है कि 2027 में ग्लोबल ऑयल मार्केट में 4.8 मिलियन बैरल प्रति दिन का सरप्लस (अतिरिक्त सप्लाई) होगा. मंगलवार को एक कतर के अधिकारी ने कहा कि दोहा पहुंचे टॉप US दूत ईरान के साथ कोई हाई लेवल बैठक नहीं करेंगे.इससे ईरान युद्ध को स्थायी रूप से रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलने की कोशिशों की प्रगति पर संदेह पैदा हो गया है. युद्ध से पहले दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल सप्लाई इसी स्ट्रेट से होकर गुजरती थी. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में जानकारी दी कि इस हफ्ते क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर तकनीकी बातचीत होगी, जिसे बाद में सीनियर लेवल पर ले जाया जा सकता है. .मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और दूत स्टीव विटकॉफ के दोहा पहुंचने से पहले, वीकेंड पर गोलीबारी हुई थी, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून के अंतरिम समझौते की परीक्षा ली थी. दोनों पक्षों को स्थायी युद्धविराम पर बातचीत करने और भविष्य से जुड़े मुश्किल मुद्दों को सुलझाने के लिए 60 दिन का समय दिया गया था.मंगलवार को कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, जिससे दोनों क्रूड बेंचमार्क तकनीकी रूप से ‘ओवरसोल्ड’ (बहुत ज़्यादा बिके हुए) दायरे में बने रहे.; ब्रेंट लगातार 13 दिनों से और WTI लगातार 11 दिनों से इस स्थिति में है. जून महीने में ब्रेंट में लगभग 21 फीसदी की गिरावट आई, जबकि मई में इसमें करीब 19 फीसदी की गिरावट हुई थी. मार्च 2020 में कोविड के कारण मांग में भारी कमी से आई रिकॉर्ड 55 फीसदी की गिरावट के बाद यह इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी.पहली तिमाही में 94 फीसदी की भारी बढ़त के बाद दूसरी तिमाही में ब्रेंट में लगभग 38 फीसदी की गिरावट आई. 2020 की पहली तिमाही में रिकॉर्ड 66 फीसदी की गिरावट के बाद यह इसकी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट थी. पिछली तिमाही में हुई 94% की बढ़त 1990 की तीसरी तिमाही में फ्यूचर्स में आई रिकॉर्ड 142 फीसदी की बढ़त के बाद सबसे ज़्यादा थी.अगस्त में ‘डेटेड ब्रेंट’ बेंचमार्क का आधार बनने वाले नॉर्थ सी क्रूड ऑयल के पांच ग्रेड की सप्लाई में, कम से कम 2021 के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड शामिल नहीं होगा. अमेरिका में, एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मंगलवार को जारी मासिक आंकड़ों से पता चला कि अप्रैल में क्रूड ऑयल का उत्पादन बढ़कर 13.93 मिलियन बैरल प्रति दिन के मासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ने पर उत्पादकों ने उत्पादन बढ़ा दिया था.तेल बाजार को मंगलवार को अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (एक ट्रेड ग्रुप) और बुधवार को US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से आने वाली साप्ताहिक स्टोरेज रिपोर्ट का इंतजार है. विश्लेषकों का अनुमान है कि 26 जून को खत्म हुए हफ्ते के दौरान एनर्जी कंपनियों ने स्टोरेज से 4.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल निकाला.अगर यह अनुमान सही निकलता है, तो ऐसा पहली बार होगा जब एनर्जी कंपनियों ने लगातार 10 हफ्तों तक स्टोरेज से कच्चा तेल निकाला हो. इससे जनवरी 2018 में बने रिकॉर्ड की बराबरी हो जाएगी. इसकी तुलना पिछले साल के इसी हफ्ते में हुई 3.8 मिलियन बैरल की बढ़ोतरी और पिछले पांच सालों (2021 से 2025) में हुई औसतन 5.5 मिलियन बैरल की कमी से की जा सकती है.भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में 37 दिनों से कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है. आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बार तेजी देखने को मिली थी. जानकारों की मानें तो जिस तरह से कच्चे तेल की कीमतों में कमी देखने को मिल रही है अनुमान यही है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फ्रीज बटन दबा रहेगा. दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमत क्रमश: 102.12 रुपए 95.20 रुपए प्रति लीटर हैं.कोलकाता में पेट्रोल के दाम 113.51 रुपए और डीजल की कीमत 99.82 रुपए प्रति लीटर है. मुंबई में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 111.21 रुपए और 97.83 रुपए प्रति लीटर देखने को मिल रहे हैं. जबकि चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपए और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर पर आ गए हैं. वैसे मई के महीने में फ्यूल की कीमतों में 7 से 8 फीसदी का इजाफा देखने को मिला था.
