ओवैसी का दिखा तेवर,सभी पार्टी के विपक्षी सांसदों और विधायकों पर खड़ा कर दिया सवाल
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के बाद अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के सांसद टूट गए हैं. ऐसी चर्चा है कि उद्धव के छह सांसद शिंदे गुट में मर्जर के लिए स्पीकर को चिट्ठी दे चुके हैं. इन दो पार्टियों में टूट के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि शिकारी नया है, जाल पुराना है।ओवैसी ने एक्स पर लिखा, ‘उद्धव बाला साहेब ठाकरे के कुछ सांसद भी BJP में शामिल होने की सोच रहे हैं. शायद हमें उन दो ‘बड़े’ सांसदों से पूछना चाहिए कि किन लोगों ने इन सांसदों को BJP में शामिल होने के लिए ‘धमकाया’? बाकी 19 TMC सांसदों ने पार्टी क्यों छोड़ी? शायद किसी पर आरोप लगाने में एक महीना लग जाए. जैसा कि कुरान में कहा गया है- हर चुगलखोर और बुराई करने वाले के लिए बर्बादी है.ओवैसी ने पूछा कि भारतीय जनता पार्टी में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का शामिल होना इतना आसान क्यों है? ये सभी लोग क्यों भाग रहे हैं? आप अपनी सभी नाकामियों के लिए किसी एक ‘बड़े सांसद’ को दोषी नहीं ठहरा सकते. उन्होंने आगे लिखा- शिकारी नया है, जाल पुराना है.शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 सांसदों ने अलग गुट बना लिया है. कहा जा रहा है कि इस अलग गुट ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की है और उन्हें एकनाथ शिंदे में मर्जर को लेकर पत्र भी सौंप दिया है. बगावत करने वालों में शिर्डी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे, आष्टीकर हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल, मुंबई नॉर्थ-ईस्ट से सांसद संजय दीना पाटिल, परभणी से सांसद संजय हरिभाऊ जाधव, निंबालकर उस्मानाबाद से सांसद ओमप्रकाश राजे, यवतमाल से संजय देशमुख शामिल हैं।टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय का ऐलान किया. बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार हैं, जो पहले ममता बनर्जी की करीबी भी रह चुकी हैं. उन्होंने रविवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपने के बाद इसका ऐलान किया. उन्होंने कहा- हम PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ काम करेंगे. टीएमसी के इन बागी सांसदों ने पहले बंगाल बीजेपी प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ मीटिंग की थी।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ पर गोरेगांव के एनईएससीओ सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि शिवसैनिक ही बालासाहेब ठाकरे के विचारों के सच्चे वारिस हैं. सिर्फ किसी से रिश्तेदारी बता देने से कोई वारिस नहीं बन जाता. केवल नाम के आगे-पीछे किसी का नाम (ठाकरे) लगा लेने से कोई वारिस नहीं हो जाता. शिवसेना जमीन का कोई टुकड़ा नहीं है. शिवसेना विचारों का और आप-हमारे संघर्षों का एक आंदोलन है. शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह भगवा तूफान है.एकनाथ शिंदे ने कहा कि जो भगवे को भूल गया, वह राजनीति से समाप्त हो गया. हमने यह होते हुए देखा है.सिर्फ सत्ता और कुर्सी के लिए आपने बालासाहेब के विचार छोड़ दिए. कुर्सी के लिए आपने हिंदुत्व छोड़ दिया. बालासाहेब ठाकरे को उनके जीवनकाल में भी परेशान किया गया, उन्हें कष्ट दिए गए.शिंदे ने कहा कि लेकिन उनके जाने के बाद भी जिन लोगों ने सत्ता के लिए उनके विचारों और हिंदुत्व को छोड़ दिया, जनता ने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया. शिवसेना बालासाहेब ठाकरे के विचारों, हिंदुत्व और मराठी अस्मिता की ध्वजवाहक है, और शिवसैनिक ही उसकी असली ताकत हैं.उन्होंने कहा कि हमारी महायुति मजबूत है, बहुत मजबूत है और इसमें शामिल दलों के बीच का तालमेल और आपसी बंधन लगातार मजबूत होता जा रहा है. कुछ लोग मेरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका कोई प्रयास सफल नहीं होने वाला है, क्योंकि हम एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं.एकनाथ शिंदे ने कहा कि कुछ लोग चुपके-चुपके जाकर उन्हें कुछ बताते हैं और कुछ लोग चुपके-चुपके हमारे बारे में दूसरी बातें पहुंचाते हैं, लेकिन वे खुद आकर हमें सब कुछ बता देते हैं. आखिर आप हमें क्या बताने वाले हैं? क्योंकि हमारा एजेंडा सिर्फ कुर्सी नहीं है. हमारा एजेंडा महाराष्ट्र की जनता के जीवन में बदलाव लाना है. हम उसी एजेंडे पर काम कर रहे हैं।
