56 लाख लोगों को डायल 112 से मिल चुकी है मदद,जान लीजिए कैसे तुरंत एक्शन लेती है बिहार पुलिस?
बिहार में 3 साल से डायल 112 अभियान की तरह चल रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर बिहार ने अलग पहचान बनाई है और औसतन रिस्पांस टाइम 11 मिनट का है. पिछले तीन साल में 56 लाख से अधिक लोगों तक डायल 112 के जरिए मदद पहुंची है. हर रोज डायल 112 कंट्रोल रूम में 6000 से 7000 फोन कॉल अटेंड किए जाते हैं. कुल मिलाकर 90 पुलिस पदाधिकारी की टीम कंट्रोल रूम में काम करती है. पूरे बिहार के फोन कॉल अटेंड किए जाते हैं.बिहार में विधि-व्यवस्था को मजबूत करना हमेशा से सरकारों के लिए बड़ी चुनौती रही है. अपराध, सड़क दुर्घटनाएं, महिलाओं की सुरक्षा और स्थानीय विवाद जैसे मामलों में त्वरित कार्यवाही और पुलिस सहायता सुनिश्चित करने के लिए डायल 112 महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई है. जुलाई 2022 डायल 112 की शुरूआत की गई थी.

तीन वर्षों में इस सेवा ने लाखों लोगों तक मदद पहुंचाकर पुलिस की कार्य प्रणाली को नई पहचान दी है. क्विक रिस्पांस टीम 14 से 15 मिनट के अंदर घटनास्थल पर पहुंच रही है.6 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एकीकृत आपातकालीन सेवा डायल-112 की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य पुलिस, अग्निशमन, भूमि विवाद और अन्य आपात सेवाओं को एक ही नंबर पर सुलझाया जा सकता है. लॉन्चिंग के समय अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि किसी भी कॉल पर 20 मिनट के भीतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिये.बिहार सरकार ने डायल 112 के लिए डेडीकेटेड दफ्तर और कंट्रोल रूम तैयार कराया. कंट्रोल रूम में कुल 90 पुलिस पदाधिकारी को लगाया गया है जिसमें कि ज्यादातर महिलाएं हैं. इसके अलावे एडीजी डीआईजी अरे पुलिस अधीक्षक की तैनाती भी की गई है. कंट्रोल रूम 24 घंटे फंक्शनल होता है.असल में डायल 112 को फोन करने के साथ ही सिस्टम Event पंजीकृत हो जाता है. पंजीकरण के बाद मामला सीएडी आफिसर के पास आ जाता है. पूरे बिहार में 1800 इमरजेंसी रिस्पांस साइकिल कम कर रहे हैं. इमरजेंसी रिस्पांस वेकिल को ईआरवी भी कहा जाता है. मोटर साइकिल को एमईआर भी कहा जाता है. शिकायत दर्ज होने के बाद पूरी जानकारी ईआरपी में मौजूद ऑफिसर के टैब पर सूचना चली जाती है. गाड़ी के टैब पर सूचना प्रेषित जाता है. पुलिस पदाधिकारी के लिए दस मिनट रिस्पॉन्स टाइम हुआ करता है।
