जेडीयू पार्टी को कमजोर करने में जुटे कई विधायक,मंत्रिमंडल में नहीं मिली जगह तो कर दी बगावत!
सम्राट चौधरी की सरकार बनने और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जेडीयू में विरोध के स्वर उभरने लगे हैं. पहले पूर्व सांसद अरुण कुमार ने नाराजगी जताई और उसके बाद आनंद मोहन ने नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. वहीं, अब मंत्री नहीं बनाए जाने से हरिनारायण सिंह के भी नाराज होने की खबर है. हालांकि वह इससे इंकार करते हैं. आधा दर्जन नेता ऐसे हैं, जो मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से नाराज चल रहे हैं.आनंद मोहन की गिनती बिहार के बाहुबली नेताओं में होती है. लंबे समय तक जेल में रहे और नीतीश सरकार की पहल के बाद ही जेल से बाहर आए. उनकी पत्नी लवली आनंद जेडीयू की सांसद हैं तो बेटे चेतन आनंद भी पार्टी के विधायक हैं. विधानसभा चुनाव में शिवहर के स्थान पर उन्हें नबीनगर से टिकट दिया गया था. इससे भी आनंद मोहन खुश नहीं थे. वहीं जब पहली बार शिवहर से चुनाव जीतने वाली श्वेता गुप्ता को मंत्रिमंडल में जगह दी गई तो वह उबल पड़े।आनंद मोहन चाहते थे कि बेटे चेतन आनंद को भी मंत्रिमंडल में जगह दी जाए लेकिन उनकी नहीं सुनी गई. उसके बाद से आनंद मोहन लगातार जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोल रहे हैं. चेतन आनंद भी निशांत के 14 युवा विधायकों की टीम के सदस्य हैं. फिलहाल आनंद मोहन के खिलाफ जेडीयू की ओर से जवाब देने के लिए राजपूत नेताओं को ही मैदान में उतारा गया है.पहले मंत्री लेसी सिंह और फिर विधान पार्षद संजय सिंह से खुलकर आनंद मोहन के खिलाफ बयान दिलवाया गया, वहीं अब अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले भीष्म सहनी ने भी आनंद मोहन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वह आरोप लगा रहे हैं कि अति पिछड़ा वर्ग से आने वाली श्वेता गुप्ता को मंत्री बनाया गया है, यही बात आनंद मोहन को पच नहीं रही है.मंत्रिमंडल विस्तार में जगह नहीं मिलने से कई नेता नाराज हैं. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अरुण कुमार जेडीयू में शामिल हुए थे लेकिन जिस प्रकार से मंत्रिमंडल विस्तार के समय आमंत्रित नहीं किया गया, उससे खफा हैं. अरुण कुमार के बेटे ऋतुराज जेडीयू के टिकट पर जहानाबाद के घोसी से विधायक चुने गए हैं. वह अपने बेटे को मंत्रिमंडल में शामिल कराना चाहते थे. ऋतुराज भी निशांत के 14 युवा विधायकों की टीम के सदस्य हैं.इस बार राष्ट्रीय टीम में वशिष्ठ नारायण सिंह को जगह नहीं दी गई है. पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली थी. इस बार स्वास्थ्य कारणों और अधिक उम्र के कारण जगह नहीं दी गई है. वह फिलहाल किसी सदन के सदस्य भी नहीं है. विधानसभा चुनाव में वह अपने बेटे सोनू कुमार को डुमरांव से चुनाव लड़ाना चाहते थे. इससे संबंधित उन्होंने बयान भी दिया था लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया. चर्चा थी कि एमएलसी बनाया जाएगा लेकिन अब तक एमएलसी भी नहीं बनाया गया.

हालांकि नीतीश कुमार के खिलाफ बयान अब तक नहीं दिया है और अभी बोलने से बच रहे हैं.हरि नारायण सिंह हरनौत से 10वीं बार विधायक चुने गए हैं. नीतीश कुमार ने शुरुआत में उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया था लेकिन इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है. वह अधिक उम्र और स्वास्थ्य कारणों से अपने बेटे को भी राजनीति में एंट्री कराना चाहते हैं लेकिन पार्टी की तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है और इसके कारण कहीं ना कहीं नाराज हैं. हालांकि वह नाराजगी की बात से इनकार कर रहे हैं लेकिन चाहते हैं कि बेटे को मौका मिले.महेश्वर हजारी भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज हैं. हालांकि अब तक पार्टी नेतृत्व के खिलाफ उन्होंने कोई बयान नहीं दिया है. लोकसभा चुनाव में महेश्वर हजारी के बेटे सन्नी कांग्रेस के टिकट पर समस्तीपुर से कैंडिडेट थे, जबकि मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी चिराग पासवान की पार्टी (एलजेपीआर) से चुनाव लड़ी थीं और उनकी जीत हुई. विधानसभा चुनाव के बाद उनको न तो नीतीश कैबिनेट में जगह मिली और न ही सम्राट मंत्रिमंडल में स्थान मिला।श्याम रजक ने आरजेडी से जेडीयू में वापसी करने के बाद फुलवारी शरीफ से चुनाव लड़ा था. विधायक बनने के बाद उनको उम्मीद थी कि मंत्री बनेंगे लेकिन उनकी जगह दलित कोटे से जेडीयू ने अशोक चौधरी, रत्नेश सदा और सुनील कुमार को मंत्री बनाया. श्याम रजक ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर तो नहीं बोला लेकिन अपनी भड़ास फेसबुक लाइव पर आकर जरूर कर दी और अपनी उपेक्षा का एक तरह से आरोप भी लगा दिया.विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक 33 राजपूत विधायक एनडीए से चुनाव जीत कर आए हैं और उसमें से 4 को मंत्री बनाया गया है. चुनाव के समय ही आनंद मोहन बेटे चेतन आनंद को मंत्री बनाए जाने की चर्चा करते रहे थे लेकिन जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ और विस्तार हुआ तो चेतन आनंद को नहीं बनाए जाने से उन्हें धक्का लगा है और अब खुलकर मैदान में आ गए हैं. हालांकि जेडीयू नेतृत्व की तरफ से अभी तक इसको लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है.जानकर कहते है कि नीतीश कुमार के कमजोर होने के कारण यह स्थिति देखने को मिल रही है. वे कहते हैं कि अभी तो शुरुआत है, पार्टी के अंदर नाराजगी और भी देखने को मिलेगी. फिलहाल आनंद मोहन से पार्टी किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है और इसलिए नीतीश कुमार ने संजय सिंह के आवास पर जाकर उन्हें मैसेज देने की कोशिश कर दी है।
