वर्ल्ड बैंक ने भारत की ग्रोथ को बताया बेहतर,विश्व में तेजी से अब बढ़ेगा इंडिया
वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उथल-पुथल के बीच भारत के लिए एक बहुत ही अच्छी खबर सामने आई है। विश्व बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ा दिया है। जहां दुनिया के कई बड़े देश मंदी और महंगाई की मार झेल रहे हैं, वहीं भारत की रफ्तार देखकर पड़ोसी देश पाकिस्तान और अन्य प्रतिद्वंद्वियों को जलन होना तय है।विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। यह पिछली रिपोर्ट में दिए गए 6.5 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मांग में मजबूती और निर्यात में लचीलेपन की वजह से वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा दुनिया की किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे तेज है।इस बढ़त के पीछे सबसे बड़ी वजह हाल ही में जीएसटी (GST) दरों में की गई कटौती को माना जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं की मांग बढ़ी है और लोगों ने खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच बुधवार (8 अप्रैल) को हुए दो हफ्तों के सीजफायर ने वैश्विक बाजारों को बड़ी राहत दी है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच अस्थायी शांति से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद जगी है, जो सीधे तौर पर भारत की ग्रोथ को सपोर्ट करेगी।भले ही अनुमान बढ़ाया गया है, लेकिन विश्व बैंक ने कुछ सावधानियां भी बरतने को कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अभी सीजफायर हुआ है, लेकिन इस युद्ध की अनिश्चितता और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भविष्य में विकास की रफ्तार को थोड़ा धीमा (6.6%) कर सकती हैं। दुनिया भर में ऊर्जा की हाई कीमतें घरों की बचत और खर्च करने की क्षमता पर दबाव डाल सकती हैं। रसोई गैस और उर्वरक पर मिलने वाली सब्सिडी के बढ़ते बोझ से सरकारी खपत की वृद्धि दर थोड़ी नरम रह सकती है।

अगर अन्य वैश्विक रेटिंग एजेंसियों से तुलना करें, तो भारत की स्थिति काफी मजबूत दिखती है। जहां मूडीज ने 6 प्रतिशत और ओईसीडी ने 6.1 प्रतिशत का अनुमान लगाया है, वहीं आरबीआई का अनुमान 6.9 प्रतिशत है। विश्व बैंक का 6.6 प्रतिशत का यह अनुमान यह साफ करता है कि भारत आने वाले वर्षों में भी दुनिया का ग्रोथ इंजन बना रहेगा।वहीं दूसरे तरफ RBI ने कहा कि उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की औसत कीमत 85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहेगी और रुपया डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर पर रहेगा. केंद्रीय बैंक ने बुधवार को जारी अपनी छमाही मौद्रिक नीति रिपोर्ट में ये अनुमान लगाए हैं. वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही (H2FY26) के लिए 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के अनुमान की तुलना में, वित्त वर्ष 2027 के लिए कच्चे तेल की कीमत का अनुमान बढ़ाकर 85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इसने FY27 के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक्सचेंज रेट के अनुमान को बढ़ाकर 94 कर दिया है, जो H2FY26 के दौरान 88 था.केंद्रीय बैंक की छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से बेंचमार्क रीपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने के लिए मतदान किया. समिति ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेज़ी, रुपए की कमज़ोरी और व्यापार प्रवाह में आई बाधाओं के बाद बढ़ी हुई अनिश्चितता की ओर इशारा किया. RBI की नीतिगत स्थिति को तटस्थ बनाए रखा गया।
