बांकीपुर से उम्मीदवार बनाए जाएंगे निशांत कुमार?नेताओं ने कह दिया उसी सीट से लड़ेंगे चुनाव!
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने के बाद से जेडीयू के अंदर लगातार मंथन चल रहा है कि संगठन और सरकार में क्या भूमिका हो. भले ही निशांत के पास अभी तक पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है लेकिन उन्होंने एक तरह से पार्टी की कमान संभाल ली है. निशांत ने 14 विधायकों की कोर टीम भी बनाई है लेकिन उसके अलावे के एक-एक कर सभी विधायकों से भी फीडबैक ले रहे हैं.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं. 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता लेंगे और पटना लौटने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी भी छोड़ेंगे. ऐसे में नई सरकार में भी निशांत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. पार्टी के नेता निशांत को लेकर इस बात पर भी मंथन करने लगे हैं कि निशांत की संसदीय जीवन में धमाकेदार ढंग से लॉन्चिंग हो।विधानसभा चुनाव के समय ही यह चर्चा हो रही थी कि निशांत को हरनौत से चुनाव लड़ाया जा सकता है लेकिन तब तक निशांत ने राजनीति में आने को लेकर फैसला नहीं लिया था. जिस वजह से वहां से हरि नारायण सिंह को चुनाव लड़ाया गया, जिन्होंने 10वीं बार चुनाव जीत कर रिकॉर्ड बनाया है. अब एक बार फिर से चर्चा हो रही है कि हरनौत से ही निशांत की लांचिंग की जाए.हालांकि जनता दल यूनाइटेड की नजर पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भी है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद विधायकी से इस्तीफा दे दिया है. 6 महीने के अंदर उपचुनाव होना तय, ऐसे में जेडीयू के युवा नेता चाहते हैं कि उनको यहां से कैंडिडेट बनाया जाए. छात्र मोर्चा के प्रदेश महासचिव धीरज कुमार कहते हैं कि हमलोग चाहते हैं कि निशांत राजनीति में आएं. वो कहीं से भी लड़ें, जीत तय है।जेडीयू के युवा नेता भले ही बांकीपुर सीट पर निशांत की उम्मीदवारी की बात कर रहे हैं लेकिन बड़े नेता खुलकर बोलने बच रहे हैं. नीतीश कुमार के खास और एमएलसी संजय गांधी का कहते हैं, ‘निशांत जहां से भी चुनाव लड़ेंगे जीतेंगे लेकिन कोई भी फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा. बांकीपुर का सीट एनडीए का सीट है और खासकर बीजेपी की सीट है, उस पर हम क्या बोल सकते हैं. पार्टी के नेता ही तय करेंगे.’वहीं जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि अब निशांत ही पार्टी के भविष्य हैं. उनके हाथ में पार्टी को सौंप दिया गया है. जहां तक चुनाव लड़ने की बात है तो विधानसभा चुनाव लड़कर भी सदस्य बन सकते हैं और विधान परिषद से भी जा सकते हैं. निशांत के लिए सभी ऑप्शन खुले हैं लेकिन यह फैसला पार्टी के शीर्ष नेता ही करेंगे.बांकीपुर विधानसभा सीट असल में बीजेपी की पारंपरिक सीट रही है. जहां से नितिन नबीन लगातार जीतते रहे हैं. उनके इस्तीफे के बाद सीट खाली हुई है.

ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या बीजेपी निशांत के लिए अपनी सीट छोड़ने के लिए तैयार हो जाएगी?निशांत की राजनीति में एंट्री हो गई है. अब संसदीय जीवन की शुरुआत कैसे हो, इसकी तैयारी है. नेता पुत्र होने का जो तोहमत लगेगा, उससे बचने के लिए निशांत को चुनाव लड़ाया जा सकता है. जहां तक बांकीपुर सीट का सवाल है तो जेडीयू और बीजेपी के बीच तीन दशक से भी अधिक समय का गठबंधन है. पहले भी कई सीटों की अदला-बदली होती रही है. हरनौत से ही नीतीश कुमार ने अपने संसदीय पारी की शुरुआत की थी. वैसे निशांत के लिए विधान परिषद से भी जाने का ऑप्शन है.नालंदा के हरनौत से चुनाव जीतकर निशांत संसदीय जीवन की कर सकते हैं शुरुआत लेकिन इसके लिए हरिनारायण सिंह को इस्तीफा देना होगा. चर्चा है हरिनारायण सिंह से इस्तीफा लेकर उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया जा सकता है. बीजेपी अगर सहमत हो जाए तो बांकीपुर विधानसभा सीट भी उपचुनाव लड़ सकते हैं. नीतीश कुमार के इस्तीफे से विधान परिषद का सीट खाली हुई है, ऐसे में निशांत उस सीट पर विधान परिषद के सदस्य बन सकते हैं.निशांत की राजनीति में धमाकेदार एंट्री के बाद अब सरकार में भी धमाकेदार एंट्री कराने की तैयारी हो रही है. जनता के बीच से चुनाव जीतकर आने पर पार्टी नेताओं को लगता है कि पूरे बिहार में एक अच्छा मैसेज आएगा, क्योंकि 20 सालों से नीतीश कुमार बिना चुनाव लड़े विधान परिषद से ही सदस्य बनते रहे हैं. विपक्ष भी इसको लेकर हमला करता रहा है. इसलिए निशांत की शुरुआत अगर जनता के बीच से चुनकर होगी तो विपक्ष को भी निशांत की ताकत का अंदाजा होगा लेकिन चुनाव लड़ने का फैसला निशांत और नीतीश कुमार के साथ पार्टी के शीर्ष नेता को करना होगा।
