LPG की कीमतों में बढ़ोतरी की है आशंका?वार सर्वे में निकलकर आई ये बातें
अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. एक तरफ अमेरिका के हमले हैं, तो दूसरी तरफ ईरान का जवाब भी उतना ही आक्रामक है. इस टकराव का असर अब सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर तेल बाजार और आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है.कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने एलपीजी और पेट्रोलियम सप्लाई को लेकर वैश्विक संकट खड़ा कर दिया है. ऐसे में बड़ा सवाल है—क्या यह जंग और भयानक रूप लेगी? और इसका असर हमारी जेब, महंगाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर कितना पड़ेगा?इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए सी-वोटर ने मार्च महीने में भारत के टीवी इतिहास में पहली बार वॉर सर्वे किया. इस सर्वे में देश के हर राज्य और हर जिले के लोगों से उनकी राय जानी गई. सर्वे में 50% लोग मानते हैं LPG के दाम दोगुने होंगे. वहीं, 70% लोगों को LPG की किल्लत महसूस हुई. 82% लोगों का मानना है तेल महंगा हो सकता है और 60% लोग रसोई गैस के दाम को लेकर चिंतित हैं.तो आखिर इस जंग को लेकर देश की जनता क्या सोचती है? क्या लोगों को बड़े युद्ध और आर्थिक संकट का डर सता रहा है? आइए जानते हैं इस खास सर्वे के नतीजे—दरअसल में सी-वोटर सर्वे में यह सवाल किया गया कि क्या रसोई का ईंधन महंगा होने से आप चिंतित हैं? तीसरे और चौथे हफ्ते में 26 फीसदी लोगों ने माना कि कोई चिंता नहीं है, जबकि तीसरे और चौथे हफ्ते में क्रमशः 27 और 29 फीसदी लोगों ने माना कि कुछ हद तक चिंतित हैं. वहीं, 28 और 27 फीसदी लोगों ने माना कि वे बहुत ज्यादा चिंतित हैं. दोनों हफ्तों में 11 फीसदी लोगों ने माना कि उन्हें इसे लेकर थोड़ी चिंता है।सर्वे में यह सवाल किया गया कि LPG की कीमत कितनी बढ़ सकती है?

दोनों हफ्तों में 32 और 34 फीसदी लोगों ने माना कि 10-20% के बीच कीमतें बढ़ सकती है. वहीं, 23 और 26 फीसदी लोगों ने माना कि एलपीजी की कीमतें 20 से 50 फीसदी तक बढञ सकती हैं. दो हफ्तों में 12 और 11 फीसदी लोगों ने माना कि 20-50% के बीच एलपीजी की कीमतें बढ़ सकती हैं. 13 फीसदी लोगों ने माना कि कीमतें डबल-100% से ऊपर बढ़ सकती हैं.सर्वे में यह सवाल किया गया कि क्या आपके पास रसोई में ईंधन का कोई वैकल्पिक स्रोत है? मार्च के तीसरे हफ्ते में 34 फीसदी और चौथे हफ्ते में 36 फीसदी ने हां में जवाब दिया, जबकि क्रमशः 49 और 50 फीसदी ने नहीं में जवाब दिया.सी-वोटर सर्वे में यह सवाल किया गया कि खाना बनाने का वैकल्पिक स्रोत नहीं है, तो खरीदने की योजना बना रहे हैं? तीसरे हफ्ते में 32 फीसदी और चौथे हफ्ते में 35 फीसदी ने हां में जवाब दिया, जबकि क्रमशः 43 और 45 फीसदी ने नहीं में जवाब दिया.यह सवाल किया गया कि ईंधन की कमी होने या कीमतें अधिक बढ़ने पर आप सबसे पहले क्या करेंगे? तीसरे हफ्ते में 68 फीसदी और चौथे हफ्ते में 66 फीसदी ने कहा कि गोबर, चूल्हा, लकड़ी का इस्तेमाल करेंगे. वहीं, 15 और 16 फीसदी ने कहा कि इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकर का इस्तेमाल करेंगे. सात और 8 फीसदी ने कहा कि गर्म भोजन का सेवन कम करेंगे. 4 और 5 फीसदी ने कहा कि सामुदायिक कार्यक्रमों में खाना खाएंगे।
