पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने बीते दिन अपने हीं देश की खाली पोल,अमेरिका को बताया धोखेबाज!

 पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने बीते दिन अपने हीं देश की खाली पोल,अमेरिका को बताया धोखेबाज!
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पाकिस्तान की संसद में वहां के रक्षा मंत्री, ख्वाजा आसिफ ने एक बहुत ही चौंकाने वाला बयान दिया है. उनके इस बयान को पाकिस्तान सेना के लिए एक बड़ी शर्मिंदगी माना जा रहा है. ख्वाजा आसिफ ने भरी संसद में ये माना कि पाकिस्तान वो देश है, जो अपने उन सैनिकों को सही सम्मान नहीं देता जो ड्यूटी के दौरान मारे जाते हैं. वैसे उनके इस बयान के पीछे कड़वी सच्चाई है, जिसे दुनिया कई बार देख चुकी है.भले ही पाकिस्तानी फौज के मुखिया को ये बात अच्छी न लगे, लेकिन ख्वाजा आसिफ ने सबके सामने माना कि जब देश के शहीद सैनिकों का अंतिम संस्कार होता है, तो अक्सर बड़े राजनेता वहां शामिल तक नहीं होते. ये उनकी शहादत की बेइज्जती नहीं तो और क्या है? पाकिस्तान की सेना पर अक्सर पाक अधिकृत कश्मीर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में मारे गए सैनिकों की संख्या छिपाने का आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब रक्षा मंत्री ने भी यही बात कह दी है.ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान में तो लड़ाई में मारे गए सैनिकों को सम्मान तक नहीं मिलता. ख्वाजा आसिफ का गुस्सा इस बात पर फूट रहा था कि राजनीतिक फायदे के लिए पाकिस्तान में सब बंटे हुए हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस तरह अंदर से बंटा है कि नेता अपने फायदे के लिए शहीदों के जनाजे में नहीं जाते. उनका इस तरह खुले आम ये कहना पाकिस्तान के लिए शर्मिंदगी की इंतेहां है. वैसे दुनिया के देखा कि ऑपरेशन सिंदूर में मरे आतंकियों के जनाजे में सेना प्रमुख और पीएम शामिल हुए थे लेकिन ऐसा कभी किसी सैनिक के लिए नहीं हुआ.ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान के अंदर राष्ट्रीयता की भावना ही नहीं है.

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ख्वाजा आसिफ का इशारा बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हो रही चरमपंथी हिंसा की तरफ था. पाकिस्तान का सैनिक नेतृत्व अपने घर में चल रहे बवाल को लेकर अपनी नाकामयाबी छिपाने के लिए ठींकरा भारत के सिर फोड़ता रहता है. आसिफ ने संसद के अंदर कबूल किया कि पाकिस्तान के अंदर अलग-अलग गुट आपस में लड़ रहे हैं. ख्वाजा आसिफ ने कहा – ‘कोई दिल्ली में जाकर बैठ जाए, कोई अफगानिस्तान में, कोई यूरोप या लंदन में जाकर बैठ जाए, इससे पहले हमें खुद को ठीक करना चाहिए.’ उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश के लिए जान देने वाले जवानों पर ही देश का कर्ज है?रिपोर्ट के मुताबिक 2023 की जनगणना के अनुसार सेना में जिलों की जनसंख्या के अनुरूप प्रांतवार प्रतिनिधित्व पंजाब से 51.1 फीसदी, खैबर पख्तूनख्वा से 16.28 फीसदी, सिंध से 20.52 फीसदी, बलूचिस्तान से 6.04 फीसदी, आज़ाद जम्मू और कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान से 2.54 फीसदी और अल्पसंख्यकों से 3.52 फीसदी था. हालांकि, आंकड़े पढ़ते समय ख्वाजा आसिफ ने गलती से पंजाब का प्रतिनिधित्व 51.1 फीसदी के बजाय 91.1 फीसदी बता दिया. उन्होंने यह भी बताया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सशस्त्र बलों ने कई बलिदान दिए हैं।हैरान कर देने वाली बात ये है कि इस भाषण के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने 1999 के बाद अमेरिका के साथ फिर से जुड़ने की भारी कीमत चुकाई, एक ऐसी कीमत जिससे देश अभी तक पूरी तरह उबर नहीं पाया है. उन्होंने पूर्व सैन्य शासकों जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ पर सीधा हमला किया, उन पर पाकिस्तान को ऐसे युद्धों में घसीटने का आरोप लगाया जो उसके अपने नहीं थे. संसद में भड़कते हुए, ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान का इस्तेमाल “टॉयलेट पेपर से भी बदतर” तरीके से किया गया. पहले, जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया गया, और फिर बेरहमी से छोड़ दिया गया।डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने पार्लियामेंट में ये बात मानी है कि US ने अपने स्ट्रेटेजिक फायदों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया है और फिर “टॉयलेट पेपर से भी बदतर हालत में उसे फेंक दिया.” इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अमेरिका की लड़ाइयों में शामिल होने की भारी कीमत चुकानी पड़ी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ख्वाजा आसिफ ने 1999 के बाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान के फिर से एक्टिव होने पर सवाल उठाए हैं और इस्लामाबाद ने फिर से अमेरिकी सपोर्ट पाने के लिए वाशिंगटन के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया।

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