नौकरी के बदले जमीन मामले में तेजस्वी ने आरोपों से किया इंकार,बीते दिन कोर्ट में मुकदमा लड़ने का चुना विकल्प
रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने से जुड़े कथित स्कैम से CBI मामले में RJD नेता तेजस्वी यादव सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए. लैंड फॉर जॉब से जुड़े इस केस में तेजस्वी यादव ने आरोपों को मानने से इनकार कर दिया. तेजस्वी यादव ने मामले में मुकदमा लड़ने का विकल्प चुना. अब इस मामले में उनके खिलाफ ट्रायल चलेगा.दरअसल, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 29 जनवरी को RJD नेताओं लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच औपचारिक आरोप तय करने के लिए अदालत में पेश होने की अनुमति दी थी. लालू परिवार और अन्य के खिलाफ आरोप तय करते हुए कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव और उनके परिवार ने एक आपराधिक गिरोह की तरह काम किया है. उनकी ओर से एक व्यापक साजिश रची गई थी.बताया जा रहा है कि किन्हीं कारणों की वजह से बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कोर्ट में पेश नहीं हो पाए थे.

इसके बाद केस के सभी आरोपियों को 15 फरवरी तक कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया था. इसी के चलते बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने कोर्ट में अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से इनकार कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि उनके या परिवार पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है. वे ट्रायल का सामना करेंगे. इस केस की नियमित सुनवाई 9 मार्च से शुरू होने वाली है.सोमवार को तेजस्वी ने मीडिया से भी बात की. उन्होंने कहा कि वह रूटीन प्रक्रिया के चलते यहां आए हैं. उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा है. इस बीच उनसे बड़े भाई तेज प्रताप के आरोपों पर सवाल किया गया. इस पर तेजस्वी यादव ने चुप्पी साध ली. बता दें कि एक दिन पहले ही लालू के बड़े बेटे एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप ने आरजेडी के 5 नेताओं को जयचंद बताकर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया था.यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे. सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि रेलवे में ग्रुप‑D नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों के परिवारों ने जमीन के छोटे‑छोटे प्लॉट लालू परिवार या उनसे जुड़े लोगों के नाम ट्रांसफर किए. यह ट्रांसफर बिहार के कई जिलों में हुआ और बाद में इन जमीनों को परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज किया गया.
