डिएगो गार्सिया पर है ट्रंप की अगली नजर,जल्द करेगा कब्जा,इंडिया को दिलाएगा लाभ!

 डिएगो गार्सिया पर है ट्रंप की अगली नजर,जल्द करेगा कब्जा,इंडिया को दिलाएगा लाभ!
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनकी सेना कब वहां पर हमला कर दे और उसको अपने कब्जे में ले ले, ये किसी को नहीं पता. ग्रीनलैंड के लोग भी अलर्ट मोड में हैं. ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप समय-समय पर अपनी मंशा जाहिर कर चुके हैं. वहीं, उन्होंने अपने अगले प्लान का भी खुलासा किया है. ट्रंप का अगला टारगेट डिएगो गार्सिया है. उन्होंने कहा कि हमारा सहयोगी यूनाइटेड किंगडम डिएगो गार्सिया द्वीप मॉरीशस को देने की योजना बना रहा है और वो भी बिना वजह. उन्होंने ये भी कहा कि UK की ये डील बहुत बड़ी बेवकूफी होगी.ट्रंप के बयान से साफ है कि उनकी नजर इस द्वीप पर है और वो उनकी विश लिस्ट में शामिल है. दरअसल, अक्टूबर 2024 में UK सरकार ने घोषणा की थी कि वो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चागोस द्वीपों की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप देगी और उसमे इसे एक ऐतिहासिक राजनीतिक समझौता बताया.

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UK लंबे समय से चागोस और वहां स्थित डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस को कंट्रोल करता रहा है. वो इसे अमेरिका के साथ मिलकर चलाता है.चागोस द्वीपसमूह में 58 द्वीप हैं. ये हिंद महासागर में मालदीव के दक्षिण में लगभग 500 किमी दूर स्थित है. 18वीं सदी के आखिर तक यहां कोई नहीं था. सबसे पहले फ्रांसीसी लोग नए बने नारियल के बागानों में काम करने के लिए अफ्रीका और भारत से लोगों को लाए. 1814 में फ्रांस ने ये द्वीप अंग्रेजों को सौंप दिया. 1965 में UK ने ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी (BIOT) बनाया, जिसमें चागोस द्वीप शामिल थे. BIOT के कुछ दूसरे द्वीपों को बाद में 1976 में सेशेल्स को दे दिया गया.प्रशासनिक कामों के लिए चागोस को मॉरीशस से जोड़ा गया था, जो हिंद महासागर में ब्रिटेन की एक और कॉलोनी थी, लेकिन जब 1968 में मॉरीशस को आजादी मिली तो चागोस ब्रिटेन के पास ही रहा. UK सरकार ने चागोस द्वीपसमूह को अलग करने के बदले में नए आजाद देश को 3 मिलियन पाउंड का ग्रांट दिया.1966 में ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ एक समझौता किया. इसमें कहा गया कि BIOT दोनों देशों की रक्षा जरूरतों के लिए उपलब्ध होगा. 1967 में जमीन हासिल की गई और चार साल बाद डिएगो गार्सिया पर प्लांटेशन बंद कर दिया गया.डिएगो गार्सिया मेंअमेरिका ने अपना मिलिट्री बेस बनाया. अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट के महत्व को देखते हुए हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बनाए रखना बहुत जरूरी था. डिएगो गार्सिया में बेस बनाने से अमेरिकियों को मलक्का स्ट्रेट पर नजर रखने के लिए एक जगह भी मिल गई. मलक्का स्ट्रेट ग्लोबल ट्रेड के लिए एक अहम रास्ता है और ये खासकर चीन के लिए बहुत जरूरी है.इसके बाद BIOT प्रशासन ने एक इमिग्रेशन ऑर्डिनेंस लागू किया, जिसके तहत बिना परमिट के डिएगो गार्सिया में घुसना या रहना गैर-कानूनी हो गया. जो लोग द्वीप पर रह रहे थे उन्हें हटाने का रास्ता खुल गया. इसके बाद लगभग 2,000 नागरिकों को बाहर निकाल दिया गया. यह मुद्दा UK और मॉरीशस के बीच विवाद का मुख्य कारण रहा है.डिएगो गार्सिया 1986 में पूरी तरह से ऑपरेशनल मिलिट्री बेस बन गया. फॉरेन पॉलिसी मैगजीन के एक आर्टिकल के अनुसार, अपनी अहम लोकेशन की वजह से इस आइलैंड पर एक मिलिट्री बेस है जिसने खाड़ी युद्ध और इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान अमेरिकी हवाई ऑपरेशन्स के लिए एक जरूरी नोड के रूप में काम किया. 2024 में UK की घोषणा के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा, डिएगो गार्सिया एक जॉइंट US-UK मिलिट्री फैसिलिटी की जगह है जो राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है.मॉरीशस लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि UK ने चागोस पर गैर-कानूनी कब्जा किया हुआ है. उसने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया है. कुछ साल पहले, चागोस द्वीपों के भविष्य के लिए UK और मॉरीशस की सरकारों के बीच बातचीत शुरू हुई थी.समझौते के तहत UK ने द्वीपों पर अपने दावे छोड़ दिए हैं और मॉरीशस अब डिएगो गार्सिया को छोड़कर चागोस द्वीपसमूह के द्वीपों पर फिर से बसावट का कार्यक्रम लागू करने के लिए आजाद है. UK ने चागोस के लोगों के फायदे के लिए एक नया ट्रस्ट फंड बनाने का भी वादा किया. यह समझौता 99 साल के लिए डिएगो गार्सिया बेस को ऑपरेशनल रहने की इजाजत देता है. कई जानकारों ने इस डील की आलोचना की, क्योंकि इससे चीन को द्वीप के आसपास ज्यादा मौजूदगी मिल सकती है. चागोसियन समुदाय के लोगों ने भी मॉरीशस के कंट्रोल मिलने पर नाखुशी जताई.भारत ने चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस के दावों का लगातार समर्थन किया है और इस डील का स्वागत किया है. भारत ने 2019 में UNGA में द्वीप देश के पक्ष में वोट दिया था. हाल के सालों में भारत ने हिंद महासागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच मॉरीशस के साथ अपने संबंधों को गहरा करने की कोशिश भी की है.हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अमेरिका अगर डिएगो गार्सिया पर कब्जा करता है तो भारत को फायदा हो सकता है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका अपने इस मिलिट्री बेस पर कई परमाणु हथियारों की भी तैनाती रखता है. इस जगह से अमेरिका को दुनिया में कुछ भी करने की ताकत मिलती है.यहां पर कब्जा करने से हिंद महासागर में अमेरिका का दबदबा और बढ़ जाएगा. मौजूदा हालात को देखते हुए मान लीजिए अमेरिका को ईरान पर हमला करना है तो ये डिएगो गार्सिया से संभव है. चीन की मिलिट्री को चुनौती देना भी यहां से ज्यादा आसान है. मान लीजिए भारत और चीन के बीच फिर से तनाव होता है और स्थिति यहां तक पहुंच जाए कि भारत को अमेरिकी सेना का सपोर्ट लेना पड़ा तो ऐसे में ट्रंप के सैनिकों के लिए चीन पर हमला करना सरल रहेगा.

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