पोस्ट ऑफिस की ‘ग्राम प्रिया स्कीम’ के तहत मिलेंगे लाखों रुपए,जान लीजिए कैसे करना है इन्वेस्टमेंट?

 पोस्ट ऑफिस की ‘ग्राम प्रिया स्कीम’ के तहत मिलेंगे लाखों रुपए,जान लीजिए कैसे करना है इन्वेस्टमेंट?
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आज के आर्थिक परिवेश में, जहां महंगाई तेजी से बढ़ रही है, सुरक्षित और मुनाफेदार निवेश हर किसी की पहली प्राथमिकता बन गया है. शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में रिटर्न भले ही ज्यादा मिल सकता है, लेकिन वहां वित्तीय जोखिम भी उसी अनुपात में बना रहता है. ऐसे में कई लोग ऐसी जगह निवेश करना चाहता है जहां पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहे. इसी जरूरत को समझते हुए भारतीय डाकघर (Post Office) ने कई शानदार योजनाएं पेश की है . इसी में से एक योजना है ‘ग्राम प्रिया स्कीम’. यह रूरल पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस (RPLI) के तहत आने वाली एक ऐसी मनी-बैक पॉलिसी है, जो न केवल निवेश को सुरक्षित रखती है, बल्कि एक तय समय के बाद गारंटीड बोनस के साथ बेहतरीन रिटर्न भी देती है।ग्राम प्रिया स्कीम की कुल अवधि मात्र 10 साल तय की गई है. अगर आप इस योजना में हर महीने 5,042 रुपये का प्रीमियम जमा करते हैं, तो 10 साल पूरे होने पर मैच्योरिटी राशि के रूप में आपको 7.25 लाख रुपये का शानदार फंड मिलेगा.नियमों के अनुसार, इस योजना में न्यूनतम सम एश्योर्ड (बीमा राशि) 10,000 रुपये और अधिकतम 5 लाख रुपये है. डाकघर इस स्कीम में हर साल प्रति हजार रुपये के सम एश्योर्ड पर 45 रुपये का बोनस देता है. गणित के हिसाब से समझें तो 5 लाख के सम एश्योर्ड पर सालाना बोनस 22,500 रुपये बनता है।

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यह बोनस 10 सालों में जुड़कर 2,25,000 रुपये हो जाता है. इस बोनस और आपके 5 लाख के सम एश्योर्ड (जिसका एक हिस्सा मनी-बैक के रूप में मिलता रहता है) को मिलाकर कुल 7.25 लाख रुपये का लाभ मिलता है. बीच-बीच में मिलने वाली किस्तों से घर की छोटी-बड़ी आर्थिक जरूरतें भी आसानी से पूरी होती रहती हैं.ग्राम प्रिया केवल एक निवेश योजना नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवन बीमा भी है. मल्होत्रा समिति की सिफारिशों के आधार पर शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत में बीमा कवरेज की स्थिति को सुधारना था. एक समय था जब देश की केवल 22 प्रतिशत आबादी के पास ही जीवन बीमा मौजूद था, लेकिन आज इस योजना ने लाखों ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा के दायरे में ला दिया है.इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका डेथ बेनिफिट है. अगर पॉलिसी अवधि के दौरान दुर्भाग्यवश पॉलिसीधारक का निधन हो जाता है, तो नॉमिनी को तुरंत पूरा सम एश्योर्ड दे दिया जाता है. इस स्थिति में परिवार को न तो बचे हुए प्रीमियम भरने की चिंता करनी होती है और न ही 10 साल पूरे होने का इंतजार करना पड़ता है.किसी भी वित्तीय योजना में पैसा लगाने से पहले उसके नियम व शर्तों को समझना एक जागरूक निवेशक की निशानी है. यह योजना पूरी तरह से भारत सरकार के अधीन संचालित होती है, इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं पड़ता. हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह 10 साल की एक प्रतिबद्धता है. आपको नियमित रूप से अपनी प्रीमियम राशि जमा करनी होगी. यदि प्रीमियम भरने में चूक होती है, तो पॉलिसी लैप्स हो सकती है और आपको इसके पूर्ण लाभ से वंचित होना पड़ सकता है. इसके अतिरिक्त, इस स्कीम में मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने (प्री-मैच्योर विड्रॉल) के विकल्प काफी सीमित होते हैं. इसलिए, इस स्कीम को एक अनुशासित और फिक्स्ड सेविंग प्लान मानकर ही अपना निवेश शुरू करें।

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