बांकीपुर विधानसभा सीट से कौन होगा उम्मीदवार?निर्णायक भूमिका में है कायस्थ आबादी
बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा में है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नबीन ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद बाद यह सीट खाली हो गई है. इसके साथ ही राजधानी पटना की इस हाई-प्रोफाइल सीट पर दावेदारी को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो चुकी है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन 2006 से बांकीपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. अब तक कुल पांच बार विधायक रह चुके हैं. उनसे पहले उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भी बांकीपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. बांकीपुर विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 182) का इतिहास काफी दिलचस्प है।बांकीपुर विधानसभा सीट आधिकारिक रूप से 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. इससे पहले यह क्षेत्र मुख्य रूप से ‘पटना पश्चिम’ विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था. नितिन नबीन के पिता 1995 से पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे. उनके निधन के बाद उनके पुत्र नितिन नबीन ने 2006 के उपचुनाव में जीत हासिल की और तब से वे लगातार (पटना पश्चिम और फिर बांकीपुर) इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. बांकीपुर को भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला माना जाता है. परिसीमन के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट बनी और इस सीट ‘पटना पश्चिम’ सीट पर दशकों से एक ही परिवार (पिता-पुत्र की जोड़ी) का दबदबा रहा है. यहां का सामाजिक समीकरण भी बीजेपी के लिहाज से काफी मजबूत है।बांकीपुर विधानसभा सीट का नाम ‘मीर बाकी’ के नाम पर पड़ा है. इस इलाके को ऐतिहासिक रूप से ‘बांकी बाजार’ के नाम से भी जाना जाता था. बांकीपुर विधान सभा सीट पर ‘कायस्थ’ बिरादरी के मतदाताओं को निर्णायक माना जाता है. यहां शहरी और शिक्षित मतदाताओं की संख्या अधिक है. कायस्थों की संख्या अधिक होने के वजह से तमाम पार्टियां इसी जाति के उम्मीदवार को उम्मीदवार बनाती है।भारतीय जनता पार्टी के अंदर उम्मीदवारों की तलाश शुरू हो गई है और दावेदारों ने भी अपनी ओर से बड़े नेताओं के समक्ष दावा पेश करना शुरू कर दिया है. फेहरिस्त में सबसे पहला नाम संजय मयूख का है. संजय मयूख बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं और इनका कार्यकाल इसी साल खत्म हो रहा है. इस वजह से वह उपचुनाव में भाग्य आजमाना चाहते हैं।ऋतुराज सिंन्हा का नाम भी प्रमुख दावेदारों की सूची में शामिल है. वह पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के पुत्र हैं. वर्तमान में ऋतुराज बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव हैं और बिहार की कमेटी में सदस्य भी हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान ऋतुराज पटना साहिब लोकसभा सीट पर दावेदार थे. कई बार दावेदारी के बाद भी उनको टिकट नहीं मिला. इस बार उनको उम्मीद है कि मौका मिल सकता है.तीसरा नाम रणवीर नंदन का है.

वह बीजेपी में काफी सक्रिय हैं और विधान पार्षद रह चुके हैं. वर्तमान में रणवीर नंदन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं. लंबे समय से रणवीर नंदन की नजर बांकीपुर विधानसभा सीट पर है. इस बार भी वह चुनाव लड़ने की कोशिश में है. कायस्थ समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.अजय आलोक भी बीजेपी के मजबूत नेताओं में गिने जाते हैं. वह भी कायस्थ समाज से आते हैं. वर्तमान में राष्ट्रीय प्रवक्ता है और बाई लिंगुअल होने के चलते मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते हैं. अजय आलोक विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं. वह भी इस सीट पर भाग्य आजमाना चाहते हैं.कुम्हरार विधानसभा सीट से विधायक रह चुके अरुण सिन्हा की नजर भी बांकीपुर विधानसभा सीट पर है. पार्टी ने 2025 चुनाव में उनको टिकट नहीं दिया लेकिन इसके बावजूद वह पार्टी के प्रति वफादार हैं. अरुण सिंन्हा अपने पुत्र आशीष सिन्हा को बांकीपुर विधानसभा सीट से लड़ाना चाहते हैं. आशीष पटना विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रह चुके हैं।प्रेम रंजन पटेल कहते हैं कि बांकीपुर सीट पर उम्मीदवार वही बनाया जाएगा, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की काबिलियत रखता हो. केंद्रीय नेतृत्व उचित समय पर उम्मीदवार तय करेगा. जिसके नाम पर मुहर लगेगी, वह चुनाव लड़ेगा और जीतेगा.कई लोगों का कहना है कि बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर कई नेता लॉबिंग कर रहे हैं और दावेदारी भी पेश कर रहे हैं. फिलहात तो संजय मयूख फ्रंट रनर के रूप में दिख रहे हैं, क्योंकि वह दिल्ली की सियासत में मजबूत दखल रखते हैं और गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं।
