बीते दिन बंगाल में हुई बंपर वोटिंग से किसे होगा फायदा?समझिए मुस्लिम बाहुल्य सीटों का समीकरण
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग ने नया इतिहास रच दिया है. फर्स्ट फेज में 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर इतनी बंपर वोटिंग हुई है कि पिछले सभी आंकड़े ढह गए. 2021 के चुनाव में कुल 77.99 फीसदी वोट पड़े थे. शाम 8 बजे तक कुल 91.95 प्रतिशत वोटिंग हो चुकी थी. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ये आजादी के बाद बंगाल में सबसे ज्यादा मतदान है.इस चुनाव में मुसलमान मतदाताओं का क्या रुख रहा, इसकी झलक मुर्शिदाबाद की 4 मुस्लिम बहुल सीटों के ट्रेंड देखकर लगाया जा सकता है. यहां कम से कम 4 मुस्लिम बहुल सीटें ऐसी हैं, जहां मतदान का प्रतिशत 95 फीसदी को पार कर गया है. ये मुस्लिम वोटरों का नया ट्रेंड साफ दिखाता है.आंकड़ों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में रघुनाथगंज विधानसभा सीट पर भारी संख्या में मतदान हुआ है. शाम 5 बजे तक वोटिंग का प्रतिशत 95.64 को पार कर गया था. चाणक्या के मुताबिक, इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 79.9 फीसदी है. इस लिहाज से देखें तो अधिकतर मतदाताओं ने इस बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया है.इसी तरह भगवानगोला सीट पर कुल वोटरों में मुस्लिम समुदाय की संख्या 85.7 फीसदी बताई जाती है. इस बार चुनाव में शाम 5 बजे तक वहां 95.31 फीसदी वोटिंग दर्ज की जा चुकी है. लालगोला सीट पर भी बंपर वोटिंग हुई है. यहां कुल मतदाताओं में 77.3 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, जबकि इस चुनाव में मतदान करने वालों की संख्या 95.07 प्रतिशत से आगे निकल गई है.अब शमशेरगंज सीट का भी ट्रेंड देख लीजिए. शाम 5 बजे तक के मतदान के आंकड़े देखें तो यहां 95.34 फीसदी से ज्यादा मतदाता वोटिंग के लिए निकले. चाणक्या के अनुसार, इस सीट पर 79.8 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग 27 फीसदी थी. राज्य के मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों को मुस्लिम बहुल माना जाता है.2021 के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को मुस्लिमों के प्रभाव वाली सीटों पर भर-भरकर वोट मिले थे. इस चुनाव में मुस्लिम बहुल 85 सीटों में से 75 पर टीएमसी को जीत मिली थी. देखना है कि इस बार राज्य के मतदाता ममता बनर्जी पर मेहरबान होते हैं या फिर नए बदलाव की पटकथा लिखते हैं. इसके लिए 4 मई तक का इंतजार करना होगा।भारी मतदान के बाद दोनों ही खेमों में जीत के दावे तेज हो गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली के दौरान कहा कि ‘बंपर वोटिंग इस बात का सबूत है कि बंगाल की जनता का ‘भय’ अब ‘भरोसे’ में बदल गया है.’ बीजेपी का मानना है कि साइलेंट वोटर और महिलाएं इस बार बड़ी संख्या में घर से बाहर निकली हैं, जो उनके पक्ष में जा सकता है।वहीं, तृणमूल कांग्रेस का तर्क है कि उच्च मतदान उनके मजबूत संगठन और ममता बनर्जी की जन-कल्याणकारी योजनाओं जैसे लक्ष्मी भंडार के प्रति जनता के अटूट समर्थन को दर्शाता है. टीएमसी खेमे में उत्साह है कि भारी संख्या में ग्रामीण और अल्पसंख्यक मतदाताओं ने ‘बाहरी’ ताकतों को रोकने के लिए वोट किया है. फिलहाल, दोनों ही पार्टियां खुद को ‘बमबम’ बता रही हैं, लेकिन पर्दे के पीछे बेचैनी साफ देखी जा सकती है।अगर साल 2021 से तुलना करें तो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल 82.29% मतदान हुआ था. उस समय भी भारी वोटिंग को सत्ता परिवर्तन की लहर माना गया था, लेकिन ममता बनर्जी ने प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की थी. हालांकि, 2026 के पहले फेज में ही वोटिंग प्रतिशत का 90% के करीब पहुंच जाना यह संकेत देता है कि जनता के मन में किसी गहरी नाराजगी या बड़े बदलाव की छटपटाहट है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब भी वोटिंग प्रतिशत इतना अधिक उछलता है, तो वह अक्सर प्रो-इंकम्बेंसी यानी सरकार के पक्ष में या एंटी-इंकम्बेंसी सरकार के खिलाफ की एक बड़ी लहर का संकेत होता है।
