जमीन को लेकर बिहार सरकार आखिर क्या सोच रही है?मौजे के अनुसार अब तय होगा जमीन का दाम

 जमीन को लेकर बिहार सरकार आखिर क्या सोच रही है?मौजे के अनुसार अब तय होगा जमीन का दाम
Sharing Is Caring:

बिहार सरकार जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर बड़ा बदलाव करने जा रही है. अब तक सड़क या शहर से दूरी के आधार पर मुआवजा तय होता था, जिससे एक ही मौजा में पास-पड़ोस की जमीनों के दाम में भी भारी अंतर आ जाता था. इसी भेदभाव के कारण किसानों में गुस्सा रहता था और मामले अक्सर कोर्ट तक पहुंच जाते थे, जिससे सरकारी परियोजनाएं सालों-साल अटकी रहती थीं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अब इस व्यवस्था को बदलकर मौजा को मुआवजा तय करने का मुख्य आधार बनाने जा रहा है, ताकि एक ही मौजा की सभी जमीनों को समान दर पर मुआवजा मिल सके. आइए आपको इससे जुड़े सारे प्रमुख सवालों का जवाब आसान भाषा देते हैं.क्योंकि नई व्यवस्था में मौजा को ही सबसे बड़ा आधार माना जाएगा.

1000792766

इसका मकसद यह है कि एक ही मौजा में जमीन चाहे कहीं भी स्थित हो, उसका मुआवजा रेट पूरी तरह बराबर रहे और किसानों के बीच भेदभाव की स्थिति खत्म हो.अभी तक मुख्य रूप से जमीन की सड़क या शहर के मुख्यालय से दूरी के आधार पर मुआवजा तय किया जाता था. इस वजह से एक ही मौजा के भीतर आसपास मौजूद जमीनों में भी मुआवजे की दर अलग-अलग हो जाती थी—किसी किसान को ज्यादा तो उसके बगल वाले किसान को कम मुआवजा मिलता था.नई व्यवस्था से किसानों के बीच मुआवजे को लेकर होने वाला भेदभाव खत्म होगा. इससे किसानों में नाराजगी कम होगी, धरना-प्रदर्शन और कोर्ट-कचहरी के मामले घटेंगे, और सरकारी परियोजनाएं बिना रुकावट समय पर पूरी हो सकेंगी., नई व्यवस्था के तहत एक ही मौजा के अंदर आने वाली सभी जमीनों का मुआवजा रेट पूरी तरह एक समान होगा, चाहे वह जमीन मौजा के भीतर कहीं भी स्थित हो.नई व्यवस्था के तहत तय होने वाली दर समान होगी, यानी प्रति इकाई (जैसे प्रति एकड़ या प्रति कट्ठा) मुआवजा रेट एक ही मौजा में सबके लिए बराबर होगा. किसी किसान को मिलने वाली कुल रकम उसकी जमीन के रकबे पर निर्भर करेगी, यानी दर एक समान होगी लेकिन कुल भुगतान जमीन के क्षेत्रफल के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है.मौजा राजस्व प्रशासन की एक इकाई होती है, जो गांव या उसके किसी हिस्से के भू-अभिलेख क्षेत्र को दर्शाती है. नई व्यवस्था में इसी मौजा को मुआवजा तय करने का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है, ताकि दूरी जैसे कारकों की वजह से एक ही इलाके में मुआवजे की दरों में असमानता न रहे.सरकार का मकसद जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाना है. मौजूदा व्यवस्था में असमानता के कारण किसानों में असंतोष रहता था और परियोजनाएं देरी से पूरी होती थीं, इसलिए भू-अर्जन निदेशालय ने इस नई और साफ-सुथरी व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया है.यह एक राज्यस्तरीय नीतिगत बदलाव होगा, जिसे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और भू-अर्जन निदेशालय के जरिए लागू किया जाएगा. फिलहाल राज्य में अलग-अलग विकास कार्यों के लिए 45 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण चल रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा जमीन उद्योग विभाग के लिए 24 जिलों में ली जा रही है.राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बहुत जल्द इसका आधिकारिक आदेश जारी करने वाला है. अभी तक इसकी सटीक तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन विभाग की तैयारी अंतिम चरण में है. मौजूदा व्यवस्था के तहत मुआवजा मुख्य रूप से जमीन की सड़क या शहर के मुख्यालय से दूरी के आधार पर तय होता है. नई व्यवस्था में इस दूरी के मानदंड को पूरी तरह हटाया नहीं जाएगा, बल्कि उसके साथ मौजा को भी मुख्य आधार बनाया जाएगा ताकि दरों में एकरूपता आए. यह बदलाव मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य उच्चपथ, रेलवे विस्तार, एयरपोर्ट, तटबंध, कोर्ट भवन, अस्पताल और स्कूल जैसी बुनियादी परियोजनाओं के लिए हो रहे अधिग्रहण पर लागू होगा, जिन पर सरकार करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है.

Comments
Sharing Is Caring:

Related post