क्या सच में औरंगजेब मुग़ल साम्राज्य का था सबसे विवादित शासक,जानें क्या कहता है इतिहास?

 क्या सच में औरंगजेब मुग़ल साम्राज्य का था सबसे विवादित शासक,जानें क्या कहता है इतिहास?
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आज हम बात करेंगे एक ऐसे मुग़ल शासक की, जिसने इतिहास के पन्नों में अपनी एक अलग छाप छोड़ी। हम बात कर रहे हैं मुग़ल बादशाह औरंगजेब की। औरंगजेब का जीवन संघर्ष, विजय, और विवादों से भरा हुआ था। औरंगजेब का जन्म 3 नवंबर 1618 को गुजरात के दोहद में हुआ था। उनके पिता शाहजहाँ और माता मुमताज़ महल थीं। औरंगजेब का पूरा नाम अबुल मुज़फ़्फ़र मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब था। वह शाहजहाँ और मुमताज़ महल के तीसरे पुत्र थे। औरंगजेब ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा फ़ारसी, अरबी और इस्लामी धर्मशास्त्र में ली। वह बचपन से ही एक गंभीर स्वभाव के व्यक्ति थे और उनका ध्यान अक्सर धार्मिक पुस्तकों और आध्यात्मिक चर्चाओं में रहता था। उनके भाई-बहनों के मुकाबले, औरंगजेब के स्वभाव में अनुशासन और कठोरता अधिक थी। उन्होंने युद्धकला और शासन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का भी अध्ययन किया, जिससे उनकी प्रशासनिक योग्यता बढ़ी। औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया। उन्होंने कंधार, बल्ख और दक्षिण भारत के कई इलाकों में मुग़ल सेना का नेतृत्व किया। उनकी वीरता का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण 1633 में सामने आया, जब उन्होंने एक हाथी पर सवार होकर अपनी जान की परवाह किए बिना संघर्ष किया। 1657 में शाहजहाँ बीमार पड़े, और इसके बाद मुग़ल साम्राज्य के उत्तराधिकार के लिए एक संघर्ष शुरू हुआ। औरंगजेब ने इस संघर्ष में अपने भाइयों दारा शिकोह, मुराद और शुजा के खिलाफ युद्ध छेड़ा। अंततः, 1658 में उन्होंने अपने सबसे बड़े भाई दारा शिकोह को हराकर सत्ता प्राप्त की। शाहजहाँ को आगरा के किले में बंदी बनाकर औरंगजेब ने दिल्ली की गद्दी पर अधिकार कर लिया। औरंगजेब ने 1658 से 1707 तक लगभग 49 वर्षों तक मुग़ल साम्राज्य पर शासन किया। उनके शासनकाल में मुग़ल साम्राज्य ने अपने विस्तार की चरम सीमा देखी।

उन्होंने दक्षिण भारत में कई अभियान चलाए और बीजापुर और गोलकुंडा जैसी शक्तियों को हराया। लेकिन औरंगजेब का शासन विवादास्पद भी रहा। उन्होंने इस्लामी कानून शरीयत का कड़ाई से पालन किया और कई हिंदू मंदिरों को तोड़ा। जज़िया कर को पुनः लागू किया, जिसे उनके पूर्वजों ने हटा दिया था। उनके धार्मिक दृष्टिकोण ने हिंदू प्रजा के साथ-साथ कई राजपूत राजाओं और मराठाओं को भी उनके खिलाफ कर दिया। शिवाजी महाराज के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता विशेष रूप से प्रसिद्ध रही। शिवाजी ने उनके खिलाफ स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और मराठा साम्राज्य की नींव रखी।औरंगजेब एक बहुत ही धार्मिक व्यक्ति थे। उन्होंने अपने निजी जीवन में भी सादगी अपनाई और मुग़ल दरबार की भव्यता से दूर रहे। उन्होंने संगीत को हराम मानते हुए अपने दरबार से संगीत को बाहर कर दिया। औरंगजेब खुद कुरान की नक़ल किया करते थे और अपनी जीविका के लिए टोपियाँ भी बुनते थे। वह हर प्रकार की विलासिता से दूर रहकर इस्लाम के सिद्धांतों का पालन करते थे। उनके धार्मिक दृष्टिकोण ने उन्हें इस्लाम का सच्चा अनुयायी बना दिया, लेकिन यह दृष्टिकोण उनके प्रशासन में कठोरता और धार्मिक असहिष्णुता के रूप में भी देखा गया। उनके धार्मिक फैसलों की वजह से हिंदू-मुस्लिम एकता को गहरा आघात पहुंचा। 1707 में, औरंगजेब की मृत्यु दक्षिण भारत के अहमदनगर में हुई। उनकी मृत्यु के बाद, मुग़ल साम्राज्य का पतन शुरू हो गया, जो उनकी कठोर नीतियों और लम्बे युद्धों का परिणाम था। औरंगजेब को महाराष्ट्र के खुलदाबाद में दफनाया गया, और उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार उनकी कब्र को साधारण रखा गया। औरंगजेब के शासनकाल को लेकर इतिहासकारों के बीच मतभेद रहे हैं। कुछ लोग उन्हें एक महान शासक मानते हैं जिन्होंने साम्राज्य को मजबूत किया, जबकि अन्य उन्हें एक कट्टर और धार्मिक असहिष्णु शासक के रूप में देखते हैं। उनके शासनकाल के दौरान मुग़ल साम्राज्य का विस्तार तो हुआ, लेकिन उनकी धार्मिक नीतियों ने साम्राज्य के विभिन्न वर्गों के बीच तनाव को बढ़ा दिया, जिसके कारण साम्राज्य की नींव कमजोर हो गई। आपसे फिर मिलेंगे एक और दिलचस्प और रोचक कहानी के साथ।

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