विजेंद्र यादव जिन्होंने नीतीश कुमार का दिया साथ,जात की नहीं बल्कि जमात की राजनीति करते हुए बढ़े है आगे

 विजेंद्र यादव जिन्होंने नीतीश कुमार का दिया साथ,जात की नहीं बल्कि जमात की राजनीति करते हुए बढ़े है आगे
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बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शपथ लेने वाले विजेंद्र प्रसाद यादव बिहार की राजनीति में एक अजात शत्रु के रूप में गिने जाते हैं. बिजेंद्र यादव उन चुने हुए नेताओं में हैं, जो अब तक अजेय हैं. 79 साल के बिजेंद्र यादव की राजनीतिक पारी लगभग साढ़े तीन दशक की है. इस दरमियान उनका राजनीतिक करियर एकदम बेदाग रहा है. राज्य के सुपौल जिले से ताल्लुक रखने वाले विजेंद्र यादव सुपौल से विधायक हैं. विजेंद्र यादव की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां की जनता उन्हें प्यार से कोसी का विश्वकर्मा भी कहती है.1990 में जनता दल की टिकट पर जीत दर्ज करने वाले विजेंद्र यादव ने आज तक कोई चुनाव नहीं हारा है. वह लगातार नौ बार के विधायक रहे हैं. जनता दल की टिकट पर उन्होंने 1990 के अलावा 1995 में जीत दर्ज की थी और तब उन्हें ऊर्जा विभाग का राज्य मंत्री बनाया गया था. जब लालू प्रसाद यादव के बाद राज्य की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी बनी तो वह राबड़ी सरकार में भी मंत्री बने. हालांकि, 2000 में वह जनता दल यूनाइटेड की टिकट पर चुनाव लड़े और फिर विजयी हुए.विजय विजेंद्र यादव ने अपने सबसे लंबा योगदान ऊर्जा योजना और विकास विभाग के मंत्री के रूप में दिया है. ऐसा माना जाता है कि बिहार को ढिबरी युग से एलईडी की लाइट में लाने में विजेंद्र यादव का बहुत अहम योगदान है. सीमांचल के अलावा मिथिलांचल में विजेंद्र यादव ने अपने शासनकाल में बखूबी काम मिला किया है. ऐसा भी कहा जाता है कि चुनाव के दौरान विजेंद्र यादव केवल हाथ जोड़ लेते हैं तो जनता उन्हें जीता कर के सदन में भेज देती है. कोसी और मिथिलांचल की जनता का भरपूर समर्थन उन्हें मिलता रहा है.

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सुपौल की राजनीति में जिस किसी ने भी विजेंद्र यादव के खिलाफ चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी ठोकी, उसे केवल हार का सामना करना पड़ा. विजेंद्र यादव की छवि कड़क मानी जाती है. राजनीतिक जानकारों की माने विजेंद्र यादव किसी भी सूरत में गलत बात या काम को बर्दाश्त नहीं करते हैं. विभाग के कार्यों के बारे में यह भी कहा जाता है कि अगर किसी काम को करने के लिए उन्होंने कोई समय सीमा तय कर दी तो वह समय सीमा किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ पाती है.मूल रूप से सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड के मुरली निवासी विजेंद्र यादव के पिता का नाम स्वर्गीय सुखराम यादव है. विजेंद्र यादव ने 1965 में वीरपुर स्थित राजकीय उच्च विद्यालय से उच्चतर माध्यमिक की डिग्री ली थी. बड़ी बात यह की विजेंद्र यादव पर कोई क्रिमिनल केस नहीं है, साथ ही साथ कोर्ट में भी कोई मुकदमा उनके ऊपर नहीं है. विजेंद्र यादव के बारे में यह भी मशहूर है कि वह जात की नहीं बल्कि जमात की राजनीति करते हैं शायद यही कारण है कि सुपौल में उनको जबरदस्त जन समर्थन हासिल है. उनकी गिनती सीएम नीतीश कुमार के अत्यंत गरीबी नेताओं में होती है. जब-जब भी नीतीश कुमार की सरकार बनी, विजेंद्र यादव उसमें मंत्री जरूर बने.

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