पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनते हीं लागू कर दो जाएगी UCC,मोदी सरकार की नीति हुई हिट
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का वादा किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ये ऐलान शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी का घोषणापत्र जारी करते वक्त किया. मौजूदा चुनावी राज्यों में असम के बाद पश्चिम बंगाल दूसरा राज्य है, जहां बीजेपी ने यह वादा किया है. वैसे ये पहली बार नहीं है जब बीजेपी ने किसी चुनावी राज्य में UCC लागू करने का वादा किया हो.बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर भी लंबे समय से एक समान कानून लाने की बात करती रही है पर ये अभी तक परवान चढ़ नहीं सका. पीएम मोदी ने भी हाल ही में पार्टी के स्थापना दिवस पर सेक्युलर सिविल कोड की बात की, जो भेदभाव को खत्म करेगा और संविधान की भावना को मजबूत करेगा.बीजेपी के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) की कहानी दशकों लंबी वैचारिक प्रतिबद्धता और गठबंधन की राजनीति की असलियत या मजबूरी की कहानी रही है. बीजेपी के लिए तीन अहम वैचारिक मुद्दों में अनुच्छेद 370 को हटाने और राम मंदिर के साथ ही समान नागरिक संहिता भी रहा है.मोदी सरकार में बीजेपी ने राम मंदिर और अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण जैसे दो प्रमुख वैचारिक वादों को पूरा किया है, लेकिन समान नागरिक संहिता लागू करने का तीसरा वादा अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर पूरा नहीं हो सका है. यही कारण है कि पार्टी ने इसे राज्य दर राज्य आगे बढ़ाने का फैसला किया है.हालांकि बीजेपी के चुनाव दर चुनाव घोषणापत्र के इतिहास को खंगाले तो पता चलता है कि एक राष्ट्र, एक कानून यानि UCC तक पहुंचने का रास्ता सीधा नहीं रहा है.बीजेपी के UCC को लेकर यात्रा की शुरुआत 1980 के दशक में हुई. भारतीय जनसंघ के रास्ते पर आगे बढते हुए बीजेपी ने UCC को अनुच्छेद 44 के तहत एक संवैधानिक दायित्व के रूप में पेश किया, पर जहां 1996 के बीजेपी के घोषणापत्र में UCC शामिल था, पर 1998 और 1999 के घोषणापत्रों में यह नदारद था. वजह थी गठबंधन की मजबूरी.

अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में 20 से ज्यादा क्षेत्रीय की अगुवाई वाली सरकार का नेतृत्व किया पर गठबंधन में शामिल समता पार्टी और टीडीपी के चलते UCC के वादे को ठंडे बस्ते में डाल दिया. हालांकि फिर यूपीए सरकार में विपक्ष में रहते हुई पार्टी ने UCC को समय समय पर उठाया.फिर 2014, 2019 और 2024 के चुनावी घोषणापत्र में बीजेपी ने UCC को पूरी तरजीह दी, लेकिन 2024 में मोदी सरकार का बहुमत नाजुक स्थिति में है और फिर वही पुराने सहयोगी नीतीश कुमार और टीडीपी साथ है, जिनके चलते कभी UCC के वादे को पीछे रखना पड़ा था.चंद्रबाबू नायडु को आंध्रप्रदेश में तो नीतीश कुमार को बिहार में मुस्लिम वोटरों का समर्थन मिलता रहा है. लिहाजा UCC को लेकर वो सतर्क थे. यही वजह है कि इन दोनों ही दलों ने UCC पर आगे बढने से पहले व्यापक चर्चा और विचार विमर्श की वकालत की.जिसके बाद बीजेपी ने एक नया रास्ता निकाला जो राज्यों के जरिए आता था यानि कि UCC को बीजेपी शासित राज्य सरकार के जरिए आगे बढाया जाए.2025 की जनवरी में उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया. वहीं, उसके लगभग एक साल बाद मार्च 2026 मे गुजरातने भी सख्त समान नागरिक संहिता कानून पारित कर दिया.इस बार के असम विधानसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में बीजेपी ने सरकार बनने के तीन महीने के भीतर UCC लागू करने का वादा किया है. अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा के चुनावी घोषणापत्र मे भी UCC का वादा रहेगा मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस साल दिवाली तक राज्य में UCC कानून लागू करने का टार्गेट रखा है.केंद्र स्तर पर गठबंधन की मजबूरियों के बीच बीजेपी अपनी राज्य सरकारों के मार्फ़त रणनीतिक तरीके से यूसीसी को लेकर आगे बढ़ रही है. ताकि राज्यों के रास्ते ही सही देर सबेर राष्ट्रीय स्तर पर भी UCC एक हकीकत बन सके.
