मणिपुर में नई सरकार के गठन होते हीं हालात हुआ बेकाबू!कुकी समुदाय और पुलिस के बीच झड़प
मणिपुर में नई सरकार बनने के एक दिन बाद ही बवाल शुरू हो गया है. गुरुवार को कुकी आदिवासी बहुल चुराचांदपुर जिले में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. कुकी समुदाय की ओर से बंद बुलाया गया था. इस दौरान प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाबलों से उस समय झड़प हुई जब पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों ने पथराव और आगजनी की।इससे पहले कई कुकी संगठनों ने अपने समुदाय के विधायकों को चेतावनी दी थी कि सरकार गठन की प्रक्रिया में वो हिस्सा ना लें. सरकार गठन के बाद चुराचांदपुर जिले के आदिवासी संगठन जॉइंट फोरम ऑफ सेवन ने शुक्रवार सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक कुकी बहुल इलाकों में पूर्ण बंद का आह्वान किया था. संगठन ने अलग कुकी प्रशासन की मांग दोहराई थी. साथ ही समुदाय के सदस्यों से गांवों में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के लिए कहा था।संगठन की ओर से कहा गया था, अगर समुदाय का कोई विधायक संगठन के फैसले की अनदेखी करेगा तो वह ऐसा अपनी व्यक्तिगत हैसियत में करेगा.

ऐसे एकतरफा फैसलों के परिणामों के लिए संगठन जिम्मेदार नहीं होगा. कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों ने समुदाय के विधायकों से कहा था कि वो सरकार गठन में हिस्सा ना लें.इससे पहले बुधवार रात कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास लोगों ने टायर जलाकर प्रदर्शन किया था. इस दौरान सड़क पर बांस रखकर नेमचा किपगेन के डिप्टी सीएम के रूप में शपथ लेने का विरोध किया था. कुकी लिबरेशन आर्मी ने कहा कि वह साफ स्पष्ट और आखिरी जारी कर रही है. कोई भी कुकी जनप्रतिनिधि अगर सरकार गठन में हिस्सा लेने का फैसला करता है तो उसे समुदाय के साथ विश्वासघात माना जाएगा.बयान में कहा गया था, ऐसे किसी भी फैसले की वजह से अगर कोई अनहोनी या अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी उन कुकी जनप्रतिनिधियों को होगी. इस बीच हमार जनजाति की संस्था हमार इनपुई ने दावा किया कि उसे पुख्ता जानकारी मिली है कि कुछ तत्व हिंसा भड़काने की कोशिश कर सकते हैं. साथ ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की संपत्तियों को निशाना बना सकते हैं।सूत्रों के मुताबिक, पुलिस से झड़पों के दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है। इलाके में अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सुरक्षाबल इलाके में हालात काबू करने में जुटे हुए हैं।बता दें कि कुकी विधायकों में उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन और विधायक एलएम खाउते और नगुरसांग्लुर सनाते के नाम शामिल हैं। इनके सरकार में भागीदार बनते ही इलाके में कुकी समुदाय के बीच तनाव में और बढ़ गया।इतना ही नहीं दो प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध करते हुए आत्मदाह करने की कोशिश की। हालांकि पुलिसकर्मियों ने समय पर तेजी दिखाई और उन्हें बचा लिया। हालांकि शाम 6 बजे यह प्रदर्शन उग्र हो गया और कई जगहों से सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद छिटपुट झड़पों की खबरें सामने आईं।रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि प्रदर्शनकारियों में कुकी विधायकों के एनडीए सरकार को समर्थन देने से असंतोष व्याप्त है। प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचित प्रतिनिधियों (विधायकों) पर समुदाय की भावनाओं की अवहेलना करने का आरोप लगाया है।
