पाकिस्तान में आवाम का हुआ बुरा हाल,पेट्रोल 450 तो डीजल 500 रुपए पार

 पाकिस्तान में आवाम का हुआ बुरा हाल,पेट्रोल 450 तो डीजल 500 रुपए पार
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पाकिस्तान इस समय सिर्फ आर्थिक संकट में नहीं, बल्कि एक गहरे दबाव और निर्भरता के जाल में फंसा हुआ दिख रहा है. एक तरफ पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध को लेकर बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की नीतियां उसे और कमजोर बना रही हैं. अमेरिका का करीबी बनने और अपनी जमीन तक सैन्य इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने की कीमत अब आम जनता चुका रही है. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पेट्रोल की कीमत 450 रुपए के पार पहुंच गई है और डीजल 500 रुपए के करीब है. महंगाई की यह मार सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि हर घर की रसोई और हर जेब पर साफ दिख रही है. यह स्थिति बताती है कि गलत नीतियों और बाहरी दबावों का अंजाम कितना भयावह हो सकता है. यहां तक कि पाकिस्तान ने अमेरिका को पिछले साल अक्टूबर में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की पहली खेप तक भेज डाली. अगर इस तरह की दलाली पाकिस्तान आज नहीं कर रहा होता तो उसकी माली हालत ठीक होती.ईरान संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह दबाव में आ गई है. विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सामने झुकना उसकी मजबूरी बन गया है. ऐसे में सरकार ने ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है. दावा किया जा रहा है कि गरीबों को राहत दी जाएगी, लेकिन असल में सबसे ज्यादा मार मध्यम वर्ग पर पड़ रही है. हालात यह हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी चलाना भी मुश्किल हो गया है और देश में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

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पंजाब सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए पशुधन के गोबर पर टैक्स लगाने जैसे कदम पर विचार कर रही है, जो आर्थिक बदहाली की गंभीर तस्वीर दिखाता है.बता दें कि पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 136 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की है. इसके बाद इसकी कीमत 458 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है. वहीं डीजल की कीमत 520 रुपए प्रति लीटर तक जाने की आशंका जताई जा रही है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही देश की अर्थव्यवस्था कमजोर स्थिति में है और आम लोगों की क्रय शक्ति लगातार घट रही है.यह कदम ऐसे समय आया है, जब सरकार नए राजस्व स्रोत खोजने में असफल रही है. हाल ही में पशुधन पर ‘गोबर टैक्स’ लगाने जैसे प्रस्ताव भी सामने आए थे, जो इस बात का संकेत हैं कि सरकार के पास पारंपरिक आर्थिक विकल्प खत्म हो चुके हैं. अब ईंधन की कीमतें बढ़ाकर घाटे को पूरा करने की कोशिश की जा रही है.ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के दबाव का सीधा परिणाम मानी जा रही है. पाकिस्तान को कर्ज की अगली किस्त पाने के लिए सब्सिडी खत्म करनी पड़ी है. सरकार ने ‘टार्गेटेड सब्सिडी’ का वादा किया है, लेकिन इससे मध्यम वर्ग को कोई राहत नहीं मिल रही. पेट्रोल की कीमत 458 रुपए तक पहुंचने का मतलब है कि अब हर चीज महंगी होने वाली है।

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