अब दिल्ली की राजनीति करेंगे तेजस्वी,राज्यसभा जाने की तैयारी में जुटे!

 अब दिल्ली की राजनीति करेंगे तेजस्वी,राज्यसभा जाने की तैयारी में जुटे!
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बिहार में 5 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. चार सीट पर तो एनडीए की जीत तय है लेकिन पांचवीं सीट पर पेंच फंसा हुआ है. महागठबंधन की तरफ से नेता आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के नाम की भी चर्चा शुरू हो गई है. इस बीच जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि आरजेडी नेता को समझ में आ गया है कि उनके लिए बिहार में अब कोई संभावना नहीं बची है.तेजस्वी यादव के राज्यसभा जाने की हो रही चर्चा पर संजय झा ने चुटकी लेते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में क्या-क्या बोल रहे थे? अब उनको भी पता चल गया है कि बिहार में उनके लिए भविष्य में भी कोई जगह नहीं है. इसके साथ ही जेडीयू नेता ने कहा कि पांचवां सीट पर भी एनडीए की जीत होगी।झा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर अभी हम लोग बातचीत करेंगे. मुख्यमंत्री के साथ बैठकर नाम तय करेंगे, पांचों सीट हम लोग ही जीतेंगे. उपेंद्र कुशवाहा के राज्यसभा फिर से भेजने के सवाल पर जेडीयू नेता ने कहा कि सब कुछ एनडीए की बैठक में तय होगा.

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वहीं, निशांत कुमार की लगातार कमान संभालने की हो रही मांग को संजय झा ने टालते कहा कि इस पर मैं क्या बोलूं?वहीं, शराबबंदी को समाप्त करने को लेकर सत्ता पक्ष के सदस्यों की मांग पर संजय झा ने कहा कि शराबबंदी से गांव में बड़े सामाजिक बदलाव आए हैं. महिलाओं से पूछिये तब इसका पता चलेगा क्या असर हुआ है लेकिन सेंट परसेंट तो कोई कानून इंप्लीमेंट नहीं हो पता है और मुख्यमंत्री का यह फैसला है. जेडीयू के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने भी शराबबंदी समाप्त करने की बात कही है. इस पर संजय झा ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत बयान है.16 मार्च को बिहार की 5 राज्यसीटों पर चुनाव होना है. 5 मार्च तक नामांकन होगा. विधायकों की संख्या के हिसाब से 4 सीटों पर एनडीए की जीत तय है. इनमें 2 सीट जेडीयू और 2 बीजेपी के हिस्से में आएगी. 5वीं सीट के लिए एनडीए को 3 अतिरिक्त वोट की जरूरत पड़ेगी. वहीं, 35 विधायकों वाले महागठबंधन को जीत के लिए एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के एक विधायक का समर्थन चाहिए.सूत्रों के मुताबिक राघोपुर सीट पर उपचुनाव होने पर तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. पार्टी के अंदर इस संभावना पर चर्चा भी शुरू हो चुकी है. हालांकि आरजेडी की ओर से अब तक किसी भी नाम पर आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राज्यसभा चुनाव और संभावित उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. सभी की नजर अब पार्टी की औपचारिक घोषणा पर टिकी हुई है. इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा असर विधानसभा की राजनीति पर भी पड़ सकता है.हालांकि पार्टी की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. फिर भी इस संभावना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो यह आरजेडी की रणनीतिक चाल मानी जाएगी. एक ओर पार्टी राज्यसभा में अपनी मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करेगी, वहीं दूसरी ओर राघोपुर सीट पर अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करेगी. राघोपुर लंबे समय से आरजेडी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, इसलिए वहां उम्मीदवार चयन बेहद अहम माना जा रहा है।

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