महाराष्ट्र में शरद की चाल,अब NDA पर है सबकी नजर
अगले महीने 10 राज्यों में रिक्त पड़ी राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है. इस द्विवर्षीय चुनाव को लेकर सभी दल अपने जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं. इन 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराए जाएंगे. चुनाव के साथ ही सत्ता के नए गणित का खेल भी शुरू हो गया है. लेकिन ये लड़ाई सिर्फ एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन के बीच ही नहीं है बल्कि कई राज्यों में एनडीए के अंदर की कशमकश शुरू हो गई है.राज्यसभा की जिन 37 सीटों पर चुनाव कराए जाने हैं, उसमें से 25 सीटें विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के पास है जबकि 12 सीटें एनडीए के खाते में हैं. कुल मिलाकर बीजेपी और एनडीए के पास राज्यसभा में अपनी संख्या बढ़ाने का शानदार मौका है, लेकिन इनके लिए सभी घटक दलों को साथ लेकर चलना भी बड़ी चुनौती है. अगर गणित साध लिया गया तो एनडीए अपनी 3-4 सीटें बढ़ा सकता है, लेकिन अंदरूनी असंतोष ने चुनावी तस्वीर को थोड़ा रोचक बना दिया है.सबसे पहले उन चेहरों पर एक नजर डालते हैं जिनका कार्यकाल अगले कुछ दिनों में खत्म होने वाला है. इनमें महाराष्ट्र से दिग्गज नेता शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी, रामदास अठावले, तमिलनाडु में एम थंबीदुरई, तिरुचि शिव, कनिमोझी, एनवीएन सोमू, पश्चिम बंगाल में साकेत गोखले, बिकाश रंजन भट्टाचार्य, सुब्रता बख्शी, बिहार में उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर, हरिवंश नारायण सिंह जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं.नंबर के लिहाज से सबसे दिलचस्प मुकाबला बिहार में माना जा रहा है. बिहार में 5 सीटें खाली हो रही हैं. यहां एक सीट के लिए 41 वोट जरूरी होते हैं, जबकि एनडीए के पास 202 विधायक हैं और जीत के लिए चाहिए 205 वोट. वहीं महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पास 5 और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पास एक सीट है, अगर ये साथ आए तो विपक्ष अपनी एक सीट निकाल सकता है.बिहार में एनडीए का फॉर्मूला है कि राज्यसभा की 2 सीट भारतीय जनता पार्टी के पास जाए तो 2 सीट जनता दल यूनाइटेड और एक सीट सहयोगी दल के पास जाएगी. अब सवाल है कि राज्यसभा पाने वाला सहयोगी कौन होगा? क्योंकि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी), जीतन राम मांझी की हम पार्टी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा तीनों ही प्रवल दावेदार हैं, यानी असली चुनौती विपक्ष नहीं बल्कि सीट बंटवारा होगा।

अब अगर बाकी राज्यों की तस्वीर पर नजर डाली जाए तो असम की 3 सीटों में से 2 बीजेपी के पास जाएगी तो तीसरी सीट के लिए कांग्रेस-AIUDF की चुनौती होगी. हरियाणा में 2 सीटें खाली हो रही हैं और मौजूदा गणित के लिहाज से एक सीट बीजेपी तो एक सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी. छत्तीसगढ़ में 2 सीटें रिक्त होंगी और इस बार यहां पर जीत की संभावना 1-1 की बन रही है. तेलंगाना में 2 सीट हैं और दोनों ही सीटें कांग्रेस के खाते में जा सकती हैं. इसी तरह हिमाचल प्रदेश की 1 सीट है और वह कांग्रेस के पक्ष में जाती दिख रही है.कुल मिलाकर तस्वीर साफ है कि इस द्विवार्षिक चुनाव से एनडीए को 3 से 4 सीटों का फायदा हो सकता है जबकि इंडिया ब्लॉक 3 से 4 सीटें का नुकसान हो सकता है. बीजेपी खुद 9 से बढ़कर 12 तक जा सकती है तो कांग्रेस को भी 4-5 सीटों का फायदा हो सकता है. लेकिन असली कहानी सीटों की नहीं बल्कि संतुलन साधने की है.अगर बीजेपी अपने सहयोगियों को साध लेती है तो राज्यसभा में पहले के मुकाबले बढ़त मिलेगी, लेकिन अगर अंदरूनी खींचतान बढ़ी तो ये चुनाव विपक्ष से पहले एनडीए की एकजुटता की परीक्षा भी बन सकती है. इस क्रम में गृह मंत्री अमित शाह 25 फरवरी को बिहार दौरे पर रहेंगे. अपनी इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ गृह मंत्री की बैठक की भी संभावना है।
