भारत के समर्थन में उतरा पोलैंड,अमेरिका के लिए घाटे का सौदा!

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रूस से कच्चे तेल की लगातार खरीद को लेकर अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच पोलैंड ने भारत को समर्थन दिया है, जबकि वॉशिंगटन ने नई दिल्ली के खिलाफ टैरिफ की धमकी और तेज कर दी है, जिसमें 500 प्रतिशत तक की लेवी लगाने की संभावना भी शामिल है। बुधवार को वीमर ट्रायंगल ग्रुपिंग के साथ भारत की पहली बातचीत के बाद पेरिस में बोलते हुए, पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती करना शुरू कर दिया है। सिकोरस्की ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और दूसरे यूरोपीय नेताओं के साथ खड़े होकर कहा, “मैंने इस बात पर संतोष जताया है कि भारत ने रूसी तेल का इंपोर्ट कम कर दिया है, क्योंकि यह पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहा है।”

सिकोरस्की का यह बयान नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनावपूर्ण संबंधों के बैकग्राउंड में आया है। इस बीच यूरोप में मौजूद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के साथ रिश्तों को गहरा करने के महत्व पर जोर दिया। जयशंकर ने वीमर ट्रायंगल फॉर्मेट में भारत की पहली भागीदारी में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट, जर्मन प्रतिनिधियों और पोलैंड के विदेश मंत्री सिकोरस्की के साथ चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा यूरोप वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है और इसे भारत के संबंधों को मजबूत करने की जरूरत है।” जयशंकर ने कहा, ”मुझे लगता है कि हम अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक राजनीति दोनों में अधिक स्थिरता ला सकते हैं और इसीलिए मैं यहां हूं।”‘जयशंकर ने कहा कि हमारे के बीच खुलकर बात हुई है। बातचीत में भारत-ईयू संबंधों, इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन जंग पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन और उसके सदस्य देशों के साथ संबंध भारत की क्षमता को दिखाते हैं। आने वाले हफ्तों में, भारत जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और EU के सीनियर नेताओं की मेजबानी करेगा, जो बढ़ती अनिश्चितता और वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव के बीच वैश्विक पार्टनरशिप को संतुलित करने के लिए नई दिल्ली की कोशिशों को दिखाता है।वीमर ट्रायंगल एक क्षेत्रीय राजनीतिक समूह है जिसे 1991 में फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड ने यूरोपीय एकीकरण, राजनीतिक संवाद, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए बनाया था। इसका नाम उस जर्मन शहर के नाम पर रखा गया है जहां तीनों पहली बार मिले थे।गौरतलब है कि, यह डिप्लोमैटिक कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी एनर्जी स्ट्रैटेजी को फिर से एडजस्ट कर रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार, 2025 तक भारत का रूसी कच्चे तेल का मासिक आयात ज्यादा रहा, जिसमें नवंबर तक रूस की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से लेकर लगभग 39 प्रतिशत तक रही। नवंबर में आयात 7.7 मिलियन टन के शिखर पर पहुंच गया, जो भारत के कच्चे तेल की कुल खपत का 34 प्रतिशत था। हालांकि, तब से रूस की हिस्सेदारी घटकर 25 प्रतिशत से कम हो गई है और इस महीने इसमें और गिरावट आ सकती है।सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के डेटा से पता चलता है कि जनवरी की शुरुआत में गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से रूसी तेल की दैनिक खरीद लगभग 72.9 मिलियन यूरो तक गिर गई, जो नवंबर के आखिर में 130.5 मिलियन यूरो और जुलाई 2023 में 189 मिलियन यूरो से कम है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, HPCL और MRPL सहित कई रिफाइनरियों ने नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल का इंपोर्ट रोक दिया है, जबकि अन्य गैर-प्रतिबंधित सप्लायर से खरीद जारी है।इस बीच यहां यह भी बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ना सिर्फ पहले भारतीय इंपोर्ट पर 50 परसेंट टैरिफ लगाया, बल्कि एक बाइपार्टी बिल को भी हरी झंडी दी है, जो अमेरिका को उन देशों पर 500 परसेंट तक टैरिफ लगाने की इजाजत दे सकता है जो जानबूझकर रूसी तेल या यूरेनियम खरीदते हैं। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक मीटिंग के बाद इस कानून को मंजूरी दी है और अगले सप्ताह की शुरुआत में इसपर वोटिंग हो सकती है।

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