पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट,महंगाई से मिलेगी राहत!

 पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट,महंगाई से मिलेगी राहत!
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अमेरिका ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए ढील दी है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच, दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही ऊर्जा की कीमतों को कम करने के लिए अमेरिका ने कदम उठाया है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक आम लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत शुक्रवार को न्यूयॉर्क समय के अनुसार रात 12:01 बजे से पहले जहाजों पर लादे गए ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल कार्गो की बिक्री की परमीशन मिली है. यह अनुमति 19 अप्रैल तक लागू रहेगी.इस कदम का मकसद सप्लाई पर पड़ रहे दबाव को कम करना है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ से होने वाली जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई थी. यह एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल की ढुलाई होती है. हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई है, जो कि 2022 के मध्य के बाद से इसका अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.X पर एक पोस्ट में, US के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस छूट को एक “सीमित दायरे वाला” और कम समय के लिए उठाया गया कदम बताया. उन्होंने अनुमान लगाया कि इससे बाजार में लगभग 140 मिलियन बैरल तेल आ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को इन बिक्री से मिलने वाली रकम तक पहुंचने में मुश्किल होगी.

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ट्रंप प्रशासन ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 45 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल जारी किया है और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट को कम करने के लिए लंबे समय से चले आ रहे शिपिंग नियमों में भी कुछ समय के लिए ढील दी है. US में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले, बढ़ती फ्यूल की कीमतें एक बड़ी राजनीतिक चिंता बनकर उभर सकती हैं.लगातार बढ़ती महंगाई से सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर कंट्रोल खतरे में पड़ सकता है. यह नीतिगत बदलाव US के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिल रहे मिले-जुले संकेतों के बीच आया है. तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी आने पर जब बाजार ने नेगेटिव रिस्पांस किया तो उसके तुरंत बाद ट्रंप ने कहा कि वह सैन्य अभियानों को “धीरे-धीरे खत्म करने” पर विचार कर रहे हैं.इस बीच, ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अपने जवाबी हमलों का दायरा बढ़ा सकता है. वहीं, पूरे क्षेत्र में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर लगातार दबाव बना हुआ है. यह संघर्ष नवरोज (Nowruz) यानी फारसी नव वर्ष के समय हुआ है, जिसे जारी हवाई हमलों और बढ़ती अनिश्चितता के साये में मनाया जा रहा है.

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