मेट्रो में नौकरी दिलाने वाले रैकेट का हुआ भंडाफोड़,पटना पुलिस को मिली बड़ी सफलता

 मेट्रो में नौकरी दिलाने वाले रैकेट का हुआ भंडाफोड़,पटना पुलिस को मिली बड़ी सफलता
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पटना पुलिस ने पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में नौकरी दिलाने वाले एक फर्जी रैकेट का भंडाफोड़ किया है. साथ ही कथित मास्टरमाइंड सहित तीन आरोपियों को मामले में गिरफ्तार किया है. गिरोह लगभग दो साल से एक फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाता था. फर्जी परीक्षाओं और पेड ट्रेनिंग स्कीमों से जरिए बेरोजगारों को निशाना बनाता था.इस संबंध में 28 दिसंबर को जक्कनपुर पुलिस स्टेशन और 18 दिसंबर को रामकृष्ण नगर पुलिस स्टेशन में कई शिकायतें दर्ज हुई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. एक सूचना के आधार पर जक्कनपुर पुलिस ने बाईपास रोड पर फर्जी इंटरव्यू लेते हुए दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया.

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एएसपी सदर (पटना) अभिनव कुमार ने बुधवार को बताया कि पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने एक फर्जी पटना मेट्रो वेबसाइट चलाने की बात कबूल की. ​​यह गैंग दो साल से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डिजिटल कैंपेन चला रहा था. यह सुनिश्चित करते हुए कि उनके विज्ञापन पटना मेट्रो जॉब्स जैसी सर्च के लिए प्रमुखता से दिखाई दें.पुलिस के अनुसार नौकरी दिलाने के बाद पर गिरोह शुरुआती ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर लगभग 1200 रुपए लेता था. पूरे बिहार से 2,000 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और लगभग 700 को अगले चरणों के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया. जुलाई 2025 में पटना में फर्जी लिखित परीक्षाएं आयोजित की गईं, जिसके बाद इंटरव्यू हुए. 700 शॉर्टलिस्ट किए गए लोगों में से, लगभग 80 को जानबूझकर फेल कर दिया गया और उन्हें डेटा ऑपरेटर, इलेक्ट्रीशियन या फिटर जैसी भूमिकाओं के लिए पेड ट्रेनिंग कोर्स के माध्यम से दूसरा मौका दिया गया.ट्रेनिंग फीस 50,000 रुपए से 60,000 रुपए तक थी. जिन पीड़ितों ने पैसे दिए, वह ट्रेनिंग या जॉब पोस्टिंग के लिए बताए गए पते पर पहुंचे, लेकिन वहां कोई नहीं मिला, तब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है. ASP ने बताया कि अब तक इस गिरोह ने पीड़ितों से करीब 8 लाख रुपए की ठगी की है. उन्होंने बताया कि चल रही जांच से पता चलता है कि कुल रकम इससे ज्यादा हो सकती है.आरोपियों की पहचान नवनीत कुमार के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर इस गैंग का मास्टरमाइंड है और सहरसा जिले का रहने वाला है. वह पहले एक कंप्यूटर सेंटर चलाता था. उसे आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. उसके साथी अखिलेश कुमार चौधरी, जो सुपौल जिले का रहने वाला है और नवादा जिले का दिनेश कुमार साओ, जिन्होंने फर्जी इंटरव्यू कराने में मदद की थी, उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया है.

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