ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता नहीं कर पाया पाकिस्तान,असफल रही पीस टॉक?

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ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में दूसरी शांति वार्ता की कोशिश एक बार फिर विफल हो गई. हालांकि दोनों देशों ने फिलहाल टकराव से बचने की बात कही है और बातचीत के विकल्प खुले रखे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ओमान लौट गए, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा रद्द करते हुए कहा कि 18 घंटे की यात्रा का कोई औचित्य नहीं है.पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से बातचीत की. अरागची अमेरिका के प्रस्तावों पर तेहरान का फॉर्मल जवाब लेकर इस्लामाबाद पहुंचे, जिसमें ‘क्षेत्रीय स्थिति’ और सीजफायर के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई. बैठक में पाकिस्तान के टॉप सिविलियन और मिलिट्री लीडरशिप मौजूद थे, जिसमें आर्मी चीफ असीम मुनीर और डिप्टी पीएम इसहाक डार शामिल थे.इस दौरे की तारीफ करते हुए और इसे ‘काम का’ बताते हुए, अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “पाकिस्तान का बहुत काम का दौरा, जिसके अच्छे कामों और हमारे क्षेत्र में शांति वापस लाने की भाईचारे की कोशिशों को हम बहुत महत्व देते हैं. ईरान पर युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए काम करने लायक फ्रेमवर्क के बारे में ईरान की राय से सहमत थे. अभी यह देखना बाकी है कि अमेरिका डिप्लोमेसी को लेकर सच में सीरियस है या नहीं.”पाकिस्तान की बातचीत कराने की कोशिशों के बावजूद, ईरान और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट बातचीत नहीं हुई. तेहरान ने साफ कर दिया कि वह दौरे पर आए अमेरिकी डेलीगेशन से नहीं मिलेगा, जिसमें मिडिल ईस्ट के दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल थे. इसके बजाय ईरान ने पाकिस्तानी बिचौलियों के जरिए अपनी बात बताई, और दोहराया कि कोई भी बातचीत इनडायरेक्ट रहेगी.तेहरान की एक मुख्य शर्त यह थी कि ईरानी बंदरगाहों और स्ट्रेटेजिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी हटाई जाए. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों और एनालिस्ट ने बातचीत की उम्मीदों को ‘तेजी से खत्म होते हुए’ बताया, क्योंकि इस्लामाबाद एक ही समय में दोनों पक्षों की मेजबानी करने के बावजूद बातचीत की टेबल पर नहीं ला पाया.उम्मीद की जा रही बातचीत से पहले, इस्लामाबाद को पहले कभी नहीं हुए सिक्योरिटी लॉकडाउन में रखा गया था मुख्य सड़कों को सील कर दिया गया था और रेड जोन को घेर लिया गया था, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह से रुक गई थी.हालांकि, बड़े सिक्योरिटी इंतजामों से कोई डिप्लोमैटिक कामयाबी नहीं मिली.

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वाशिंगटन और तेहरान के बीच उम्मीद के मुताबिक हाई-लेवल बातचीत नहीं हो पाई, जिससे पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें सामने आ गईं.पाकिस्तानी लीडरशिप के साथ कई मीटिंग के बाद, अरागची उसी दिन इस्लामाबाद से चले गए, जिससे शहर में बातचीत के दूसरे राउंड की उम्मीदें खत्म हो गईं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी डेलीगेशन ने पाकिस्तान को ‘मांगों की एक ऑफिशियल लिस्ट’ सौंपी, जिसे अमेरिका और उसके साथियों को बताया जाना था. इनमें दुश्मनी खत्म करने और बैन और ब्लॉकेड हटाने जैसी शर्तें शामिल थीं.अरागची ने बाद में कहा कि ईरान ने सीजफायर और जिसे उन्होंने ‘थोपा हुआ युद्ध’ बताया, उसके खत्म होने के बारे में अपनी ‘असली राय’ बता दी है. अब उनका ओमान और रूस जाने का प्लान है, जो तेहरान के डिप्लोमैटिक फोकस को पाकिस्तान से हटाने का इशारा है.एक बड़े डेवलपमेंट में, अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने मतलब की बातचीत की कमी का हवाला देते हुए अमेरिकी दूतों के पाकिस्तान दौरे का प्लान कैंसिल कर दिया. ट्रंप ने कहा, “मैंने अपने लोगों से कहा है… आप वहां जाने के लिए 18 घंटे की फ्लाइट नहीं ले रहे हैं… हमारे पास सारे कार्ड हैं. वे जब चाहें हमें कॉल कर सकते हैं.”

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