नवरात्रि के पांचवें दिन आज होगी मां स्कंदमाता की पूजा,पढ़िए मंत्र,आरती और कथा

 नवरात्रि के पांचवें दिन आज होगी मां स्कंदमाता की पूजा,पढ़िए मंत्र,आरती और कथा
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23 मार्च यानि कि आज चैत्र का पांचवां दिन माता स्कंदमाता की पूजा होगी. स्कंदमाता की पूजा से संतान प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं और बच्चों की सुरक्षा तथा उन्नति के लिए उनका विशेष आशीर्वाद मिलता है। जिन लोगों को संतान से जुड़ी चिंता होती है, उनके लिए यह पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है.स्कंदमाता की उपासना से व्यक्ति का मन भक्ति में लगने लगता है और आत्मिक विकास होता है। यह पूजा व्यक्ति को धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है. मान्यता है कि स्कंदमाता अपने भक्तों की हर प्रकार की बाधाओं और भय से रक्षा करती हैं. उनकी पूजा से जीवन के संकट दूर होते हैं और व्यक्ति को साहस मिलता है।

स्कंदमाता को प्रसन्न करने का मंत्र:

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्।

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मां स्कंदमाता की आरती:

जय तेरी हो स्कंद माता.पांचवां नाम तुम्हारा आता.
सबके मन की जानन हारी.जग जननी सबकी महतारी.
तेरी जोत जलाता रहू मैं.हरदम तुझे ध्याता रहू मै.
कई नामों से तुझे पुकारा.मुझे एक है तेरा सहारा.
कही पहाडो पर है डेरा.कई शहरों में तेरा बसेरा.
हर मंदिर में तेरे नजारे.गुण गाए तेरे भक्त प्यारे.
भक्ति अपनी मुझे दिला दो.शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो.
इंद्र आदि देवता मिल सारे.करे पुकार तुम्हारे द्वारे.
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए.तू ही खंडा हाथ उठाए.
दासों को सदा बचाने आयी.भक्त की आस पुजाने आयी.

मां स्कंदमाता की व्रत कथा:

शास्त्रों के अनुसार, प्राचीन काल में धरती पर तारकासुर नाम का एक शक्तिशाली राक्षस रहता था. अपनी असाधारण शक्ति और इच्छाओं को पूरा करने के लिए उसने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की. उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उससे वरदान मांगने को कहा.तारकासुर ने भगवान ब्रह्मा से अमरता का वरदान मांगा. ब्रह्मा जी ने उसे समझाया कि इस संसार में कोई भी अमर नहीं हो सकता और कोई अन्य वरदान मांगो. यह सुनकर तारकासुर थोड़ी निराश हुआ, लेकिन चतुराई दिखाते हुए उसने योजना बनाई. उसे ज्ञात था कि भगवान शिव कभी विवाह नहीं करेंगे और उनकी कोई संतान नहीं होगी.इस विचार के आधार पर, तारकासुर ने ब्रह्मा जी से विशेष वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो. ब्रह्मा जी ने उसे यह वरदान दे दिया.वरदान मिलने के बाद तारकासुर का अहंकार और बढ़ गया. उसे लगने लगा कि अब कोई उसे नहीं मार सकता. उसने तीनों लोकों में आतंक फैलाना शुरू कर दिया और देवताओं, ऋषियों तथा मनुष्यों पर अत्याचार करने लगा. वह इतना शक्तिशाली हो गया कि स्वर्गलोक से देवराज इंद्र को भी पराजित कर दिया और खुद को तीनों लोकों का स्वामी घोषित कर दिया.तारकासुर के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास मदद मांगने गए. भगवान विष्णु ने उन्हें बताया कि तारकासुर को केवल भगवान शिव का पुत्र ही मार सकता है.देवताओं ने मिलकर भगवान शिव से प्रार्थना की. भगवान शिव ने देवताओं की बात और संसार की दुर्दशा देखकर माता पार्वती से विवाह करने का निर्णय लिया. इसके बाद, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ और उनके यहाँ एक तेजस्वी पुत्र का जन्म हुआ, जिसे कार्तिकेय या स्कंद कुमार के नाम से जाना गया।

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