भू-माफिया पर सख्त हुई नीतीश सरकार,बदलने जा रहा है जमीन रजिस्ट्री का नियम

 भू-माफिया पर सख्त हुई नीतीश सरकार,बदलने जा रहा है जमीन रजिस्ट्री का नियम
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बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है, जिसका मकसद फर्जीवाड़े पर रोक लगाना, विवाद कम करना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है. अब सरकार ने तीन बड़े स्तरों पर सुधार लागू करने का फैसला किया है. पहला- भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई और पुलिस-प्रशासन की भूमिका तय करना, दूसरा- जमीन रजिस्ट्री से पहले पूरी जानकारी देना अनिवार्य करना और तीसरा- तकनीक के जरिए जमीन की पहचान और सत्यापन को मजबूत बनाना, जिसमें सेटेलाइट तस्वीर तक शामिल होगी. इन सभी बदलावों का उद्देश्य यही है कि आम लोगों को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से जमीन खरीदने का अधिकार मिले और लंबे समय तक चलने वाले विवाद खत्म हों. बिहार में जमीन रजिस्ट्री का नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा.सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब सरकार ने सीधे भू-माफियाओं पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है.

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राज्य के हर अंचल में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वो दो से चार ऐसे कुख्यात भू-माफियाओं की पहचान करें, जो जमीन पर अवैध कब्जा या फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को ठगते हैं. इनकी पहचान होते ही उन पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी और कानूनी कार्रवाई शुरू होगी.सरकार ने साफ कहा है कि अगर कोई व्यक्ति जमीन को जानबूझकर विवादित बनाकर उस पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा. खासकर फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन हड़पने के मामलों में सख्त कानून लागू किया जाएगा, जिसमें सात से दस साल तक की सजा का प्रावधान है. इसका सीधा मतलब है कि अब जमीन से जुड़े अपराधों को हल्के में नहीं लिया जाएगा.एक और महत्वपूर्ण बदलाव पुलिस की भूमिका को लेकर भी किया गया है. अब पुलिस सीधे जाकर जमीन पर कब्जा दिलाने या विवाद में हस्तक्षेप नहीं कर सकेगी. इसके लिए अंचल अधिकारी (सीओ) को पहले जानकारी देना अनिवार्य होगा. बिना सीओ के संज्ञान के पुलिस किसी विवादित जमीन पर नहीं जाएगी. इससे अक्सर होने वाले दखल-कब्जा और दबाव की घटनाओं पर रोक लगेगी.सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर पुलिस इस नियम का पालन नहीं करती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देश जारी किए जाएंगे. जरूरत पड़ने पर विभाग सीधे पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी पत्र लिख सकता है.इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि जमीन विवादों को कानून के दायरे में रखकर सुलझाया जाए और किसी भी तरह की दबंगई या मनमानी को खत्म किया जाए. इससे आम नागरिकों को सुरक्षा मिलेगी और उन्हें अपने अधिकारों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा.दूसरा बड़ा बदलाव जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने से जुड़ा है. अब एक अप्रैल 2026 से रैयती जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले खरीदारों को उस जमीन की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. इसके लिए ई-निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की जानकारियां भरना अनिवार्य कर दिया गया है.इस फैसले के पीछे सरकार का मानना है कि अधूरी जानकारी के कारण ही ज्यादातर जमीन विवाद पैदा होते हैं.लोग बिना पूरी जांच-पड़ताल के जमीन खरीद लेते हैं और बाद में पता चलता है कि जमीन पर पहले से विवाद है या दस्तावेज सही नहीं हैं.नई व्यवस्था के तहत आवेदक को सबसे पहले पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाना होगा और लॉग इन करना होगा. इसके बाद जिस जमीन की रजिस्ट्री करनी है, उससे जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी. इसमें निबंधन कार्यालय का नाम, अंचल, मौजा, थाना, खाता संख्या, खेसरा संख्या, जमीन का रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी, जमाबंदी धारक का नाम, खरीदार और विक्रेता का नाम, और जमीन का प्रकार जैसी जानकारियां शामिल हैं.यहां एक महत्वपूर्ण विकल्प भी दिया गया है. अगर आवेदक चाहे, तो वह जमीन की आधिकारिक जानकारी भी प्राप्त कर सकता है. इसके लिए उसकी दी गई जानकारी संबंधित अंचल अधिकारी या राजस्व अधिकारी के पास भेज दी जाएगी. साथ ही आवेदक को एसएमएस के जरिए इसकी सूचना भी मिलेगी. अंचल अधिकारी इस जानकारी की जांच-पड़ताल करेंगे और 10 दिनों के भीतर आवेदक को सही जानकारी उपलब्ध कराएंगे. अगर 10 दिनों के अंदर अधिकारी कोई जवाब नहीं देते हैं, तो यह माना जाएगा कि आवेदक द्वारा दी गई जानकारी सही है और प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी. इस व्यवस्था का फायदा यह होगा कि खरीदार पहले ही जान सकेगा कि जमीन पर कोई विवाद है या नहीं, उसका मालिक कौन है और दस्तावेज कितने सही हैं. इससे फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी के मामलों में काफी कमी आएगी.तीसरा और सबसे आधुनिक बदलाव तकनीक से जुड़ा है. अब जमीन, मकान या फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए सेटेलाइट तस्वीर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया जाएगा. यानी जब तक संबंधित संपत्ति की तस्वीर पोर्टल पर अपलोड नहीं होगी, तब तक रजिस्ट्री के लिए समय (स्लॉट) नहीं मिलेगा.इस नई व्यवस्था का ट्रायल दरभंगा में किया गया, जो सफल रहा. इसके बाद सरकार ने इसे पूरे राज्य में लागू करने का फैसला लिया है. इस प्रणाली के तहत जमीन की पहचान अक्षांश और देशांतर (latitude-longitude) के आधार पर की जाएगी, जिससे उसकी सटीक लोकेशन दर्ज हो सकेगी.अब आवेदक को खाता नंबर, प्लॉट नंबर और अन्य जरूरी जानकारी के साथ-साथ संपत्ति की सेटेलाइट इमेज भी अपलोड करनी होगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि जिस जमीन की रजिस्ट्री हो रही है, वही जमीन वास्तव में मौजूद है और उसके दस्तावेज सही हैं.इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक ही जमीन को बार-बार बेचने की धोखाधड़ी पर रोक लगेगी. जब किसी जमीन की तस्वीर और विवरण पहले से सिस्टम में दर्ज रहेगा, तो अगर कोई व्यक्ति उसे दोबारा बेचने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट दे देगा और रजिस्ट्री की अनुमति नहीं मिलेगी.इसके अलावा यह व्यवस्था मकान और फ्लैट की रजिस्ट्री पर भी लागू होगी, जिससे शहरी क्षेत्रों में होने वाले फर्जीवाड़े को भी रोका जा सकेगा. यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी.

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