महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की तारीफ में पढ़े कसीदे,कहा-सीजफायर कराने में पाक का रहा है अहम भूमिका

 महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की तारीफ में पढ़े कसीदे,कहा-सीजफायर कराने में पाक का रहा है अहम भूमिका
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अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर को लेकर जम्मू-कश्मीर के बड़े नेताओं समेत अलगाववादियों ने भी इसका स्वागत किया है. उम्मीद जताई है कि यह युद्धविराम अस्थायी के बजाय स्थायी हो. पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसे मुबारक दिन करार दिया. उन्होंने पाकिस्तान की तारीफ में कसीदे भी पढ़े. फारूक अब्दुल्ला ने सीजफायर के लिए अमेरिका और ईरान को बधाई दी और कहा कहा कि युद्ध कोई समाधान नहीं है. वहीं, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि टकराव की जगह संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. आइए जानते हैं किस नेता ने क्या कहा.पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज इस हिसाब से भी मुबारक दिन हैं कि जो पिछले कई दिनों से हमारी मुस्लिम उम्मत एक मुसीबत में थी. ईरान पर अमेरिका और इजराइल ने हमला किया. इससे वहां से हजारों लोग मारे गए. बड़ा खतरनाक माहौल था. लग रहा था कि ये जंग विश्व युद्ध की तरफ जाएगी. आज मुझे खुशी है कि अल्लाह ने ईरान को हिम्मत और हौसला दिया कि उन्होंने अमेरिका का डटकर का सामना किया. इजराइल जुलुम के अलावा कुछ नहीं जानता है.महबूबा ने कहा, इस सीजफायर में जो पाकिस्तान का रोल रहा, उसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उसका बड़ा अहम रोल रहा. पाकिस्तान ने इस पूरे खित्ते को, पूरी दुनिया को जंग से बचाया. उम्मीद करनी चाहिए कि आने वाले वक्त में हमारा मुल्क और पाकिस्तान भी साथ बैठकर जितने भी मसले हैं, उनको मिलजुलकर हल करेंगे. यह भी तारीफ करने की बात है कि ईरान ने अमरीका और इजराइल की तरह स्कूलों पर हमले नहीं किए. केवल सैन्य ठिकानों पर हमला किया. हम उम्मीद और दुआ करते हैं कि यह युद्धविराम परमानेंट होगा.वहीं, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस सीजफायर पर सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा शांति की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है. टकराव की जगह संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. अत्यधिक आक्रामकता के बावजूद ईरानी जनता और नेतृत्व द्वारा दिखाया गया धैर्य और साहस सराहनीय है. इस महत्वपूर्ण युद्धविराम को संभव बनाने के लिए उन्हें और इस्लामाबाद सहित सभी पक्षों को बधाई. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि वह ईश्वर का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर बैठकर अपने मुद्दों को सुलझाने का साहस दिया.

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बातचीत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. युद्ध कोई समाधान नहीं है. युद्ध कभी समाधान नहीं रहा है और न कभी होगा. इसलिए वह और जनता इन देशों को बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि दोनों बैठकर बातचीत करेंगे. ईश्वर से प्रार्थना है कि दोनों मुल्क शांति की बात करें क्योंकि इस युद्ध ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है.अब्दुल्ला ने कहा, अगर युद्ध कुछ और समय तक चलता तो लोगों की मुश्किलें बढ़ जातीं, क्योंकि एनर्जी सोर्सेज दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और ईश्वर ने इन देशों को एनर्जी सोर्सेज दिए हैं. हमारे देश के और विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के कई लोग अरब देशों में काम करते हैं. इस युद्ध ने उनके जीवन को झकझोर दिया है.उन्होंने कहा, हमें नहीं पता कि शांति स्थापित होने में कितना समय लगेगा. हम वहां काम करने वाले और आजीविका कमाने वाले लोगों की दुर्दशा को लेकर चिंतित हैं. हम चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो. अब्दुल्ला ने आशा जताई कि भारत तनाव कम करने में अपनी भूमिका निभाएगा. उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि भारत भी अपनी मदद का हाथ बढ़ाएगा क्योंकि वह अमेरिका का मित्र है, क्योंकि इसका हम पर भी बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा.

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